करनाल की बेटी बनी दिल्ली में जज, पीड़ितों को न्याय दिलाना लक्ष्य

Bhaskar News Network

May 22, 2019, 08:10 AM IST

Karnal News - करनाल में जन्मी दिव्या गुप्ता ने दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेज एग्जाम में 12वां रैंक हासिल कर दिल्ली में सिविल जज...

Karnal News - haryana news karnal39s daughter became judge in delhi aims to bring justice to victims
करनाल में जन्मी दिव्या गुप्ता ने दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेज एग्जाम में 12वां रैंक हासिल कर दिल्ली में सिविल जज लगने का सपना सच किया है। इससे पहले उन्होंने पिछले साल मध्य प्रदेश ज्यूडिशियल एग्जाम में 31वां रैंक हासिल कर ग्वालियर में सिविल जज के पद पर रही हैं।

उनकी इच्छा राष्ट्रीय राजधानी में सिविल जज लगने की थी, जिसके तहत उन्होंने इस बार दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेज एग्जाम 2019 देकर 12वें रैंक के साथ सफलता हासिल की है। उनके जीवन का लक्ष्य पीड़ित लोगों को न्याय दिलाना है। जज की परीक्षा में दोबारा से उनकी सफलता पर पेरेंट्स की खुशी का ठिकाना नहीं है। शहर के चौड़ा बाजार के मूल निवासी उनके पिता सुशील कुमार गर्ग भिवानी में एडिशनल सेशन जज के तौर पर कार्यरत हैं और मम्मी संध्या गुप्ता स्कूल टीचर हैं। पिता की प्रेरणा पाकर ही दिव्या गुप्ता ने इस मुकाम को हासिल किया है। खुश मिजाज दिव्या गुप्ता अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि न्यायिक सेवा में आना उनकी अपनी इच्छा थी, लेकिन इसके पीछे पापा की प्रेरणा का अहम रोल है। उनके मम्मी-पापा ने उनका पूरा सहयोग किया है।

बेटियों को शिक्षित करके ही बराबरी पर ला सकते हैं : दिव्या गुप्ता ने कहा कि समाज में महिला-पुरुष के बीच की असमानता को मिटाने के लिए बेटियों को शिक्षित किया जाना जरूरी है। शिक्षित करके ही बेटियों को बराबरी पर ला सकते हैं। समाज में समानता आने से बहुत सी बुराइयों का हल खुद हो जाएगा।

दिव्य गुप्ता ने बताया : सफलता का मूलमंत्र हार्ड वर्क

दिव्य गुप्ता अपनी मां के साथ।

दो बार जज की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली दिव्या गुप्ता कहती हैं कि किसी भी क्षेत्र में सफलता का मूलमंत्र हार्ड वर्क है। अगर हम मेहनत, लगन व ईमानदारी से हार्ड वर्क करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने इसी मूलमंत्र को अपनाते हुए यह सफलता पाई है।

डिसिजन पावर स्ट्रॉन्ग होना जरूरी

दिव्या गुप्ता ने कहा कि समाज व राष्ट्र में न्यायपालिका काे सर्वोच्च स्थान मिला हुआ है। लोगों का न्यायालय में विश्वास है कि वहां से उनको न्याय हर हाल में मिलेगा। न्यायालय भी इस कार्य को बखूबी कर रहे हैं। एक जज को न्यूट्रल तो रहना ही है साथ ही उनमें स्ट्रॉन्ग डिसिजन पावर होना भी जरूरी है।

मध्यस्थता से बेहतर ढंग से सुलझ सकते हैं विवाद : जज दिव्या गुप्ता का कहना है कि न्यायालय लोगों को न्याय दिलाने का काम करते हैं, लेकिन इसमें प्रक्रिया जरा लंबी है। जबकि बहुत से ऐसे मामले हैं जिनको मध्यस्थता से बेहतर ढंग से निपटाया जा सकता है।

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