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तमाम बाधाएं आईं सुजाता ने नहीं मानी हार, 30 साल से संवार रही दिव्यांगों का जीवन

2 वर्ष पहले
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महिलाओं के सामर्थ्य को कम तोलना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि महिलाओं को जहां भी चांस मिला अपनी काबिलियत को सिद्ध कर दिखाया है। शहर में ऐसी ही महिलाओं में एक नाम जो उभरकर सामने आता है वह है डॉ. सुजाता।

पिछले 30 सालों से दिव्यांग बच्चों के जीवन को संवारने में लगी हुई हैं। आज वे ऐसा चेहरा बन गई हैं, जो महिलाओं के लिए सशक्त प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने जीवन के तमाम रुकावटों को पार करते हुए दिव्यांग बच्चों की खुशियों को ही अपनी खुशी बना लिया। इस कार्य को वे बिना सरकारी सहायता के कर रही हैं। लोगों द्वारा दी जाने वाले डोनेशन के सहारे ही बच्चों के जीवन में नया सवेरा लाने का प्रयास किया जाता है। डॉ. सुजाता ने कहा कि एक महिला होने के नाते उसने भी अपने जीवन में बहुत सारे संघर्ष को झेला है। उनका मानना है कि अगर महिलाओं को तेजी से सशक्त बनाना है तो परिवार में जो फैसले लिए जाते हैं उनमें महिलाओं की भी राय लेनी चाहिए, क्योंकि महिलाएं आज कहीं भी पीछे नहीं हैं।

डॉ. सुजाता ने कहा कि प्राचीन समय से ही घर व समाज को बनाने वाली महिलाएं ही हैं। इसलिए महिलाओं में आत्मविश्वास जगाना जरूरी है। समाज व सरकार को मिलकर महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना होगा। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि अगर महिलाएं सक्षम नहीं हैं तो समाज तरक्की नहीं कर सकता। नीलोखेड़ी शहर में खोले गए तपन पुनर्वास केंद्र अब न केवल दिव्यांग बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी भरता है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए भी कार्य किया जा रहा है। केंद्र 170 बच्चों को शिक्षा देने के अलावा महिलाओं को सिलाई, ब्यूटीशियन व कंप्यूटर कोर्स में कुशल बनाने का काम किया जाता है।

समाज में महिलाओं को आजादी मिलने पर ही असल में महिलाएं समाज में बराबरी का दर्जा पा सकेंगी, लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि आज बहुत सी महिलाएं आजादी पाकर गलत दिशा में जा रही हैं। जबकि महिलाओं को खुद इस पर विचार करना चाहिए और अपनी आजादी को समाज की प्रगति के लिए ही प्रयोग करें।

प्राचीन समय से ही घर व समाज को बनाने वाली महिलाएं ही हैं : डॉ. सुजाता

करनाल. तपन पुनार्वास केंद्र में दिव्यांग बच्चों के साथ डॉ. सुजाता।

इन कार्यों से दिया एक सशक्त महिला का परिचय सरकार ने दिया वुमन आॅफ करनाल का खिताब
डॉ. सुजाता ने एक मनोवैज्ञानिक के तौर पर अपने जीवन को दिव्यांग बच्चों के जीवन को संवारने के लिए तो समर्पित कर ही दिया, साथ में उन्होंने समाज को नई दिशा देने के कार्यों से एक सशक्त महिला होने का परिचय दिया। वे तपन पुनर्वास केंद्र में बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ आर्ट ऑफ लिविंग से लोगों को प्रसन्नचित्त रहने के गुर भी सिखाने का काम कर रहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने समाज को दिशा देने के लिए पुनर्जन्म, आध्यात्म और देशभक्ति जैसे विषयों पर काफी कुछ लिखा है। अब उनको डिस्ट्रिक लीगल अथॉरिटी और सरकार ने दो साल के लिए वुमन आॅफ करनाल बनाया है। अब वे महिलाओं से संबंधित समस्याओं के निवारण व सहायता के लिए भी कार्य करेंगी।

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