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नैक एक्रीडेशन एवं रि-एक्रीडेशन से संस्थान के साथ शिक्षा का होता है विकास : मिश्रा

पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से एक्रीडेशन...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:45 AM IST

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    पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से एक्रीडेशन एंड रि-एक्रीडेशन रिन्यू परस्पेक्टिव विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पंचकूला, अम्बाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, अम्बाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत व सोनीपत के राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों व आईक्यूएसी के संयोजकों ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय कार्यशाला में गवर्नमेंट काॅलेज पंचकूला की प्राचार्या व स्टेट नैक, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद कॉआर्डिनेटर डा. अर्चना मिश्रा मुख्यातिथि के रूप में शिरकत करते हुए कहा कि नैक एक्रिडिटेशन एवं रि-एक्रीडेशन से संस्थान के साथ शिक्षा का विकास होता है। नैक एक्रीडेशन एवं रि-एक्रीडेशन न होने की वजह से महाविद्यालयों को कई तरह की ग्रांट नहीं मिल पाती हैं।

    नैक की करंे तैयारी : कुरुक्षेत्र के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. श्याम कुमार ने कहा कि सभी शिक्षा संस्थान के व्यक्ति को अपना पद भुलकर नैक की तैयारी करें। जिससे शिक्षा संस्था का विकास होगा। सभी महाविद्यालय आयोजित की जाने वाली सभी गतिविधियों का डाॅ. क्यूमेंटेशन जरूरी करें। साथ ही समय रहते आईक्यूएसी की वार्षिक रिपोर्ट भी नैक को भेजी जाए। उन्होंने कहा कि नैक विजिट के लिए आंकड़ों का संकलन बहुत कठिन कार्य है लेकिन बेहतर टीम वर्क से इसमें सफलता हासिल की जा सकती है।

    सेमिनार में जानकारी देतीं वक्ता।

    ‘एसएसआर का महत्वपूर्ण अंग है क्वालिटी इंडिकेटर फ्रेमवर्क’

    पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर कॉलेज में सेमिनार में जानकारी देते हुए वक्ता व अन्य लोग।

    सेल्फ स्टडी रिपोर्ट नैक एक्रीडेेशन प्रक्रिया की रीढ़

    कुरुक्षेत्र के वाणिज्य विभाग के प्रो. तेजेंद्रपाल शर्मा और एसडी कालेज अम्बाला कैंट के प्राचार्य डाॅ. राजेंद्र सिंह राणा ने सेल्फ स्टडी रिपोर्ट तैयार करने के संबंध में महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेल्फ स्टडी रिपोर्ट नैक एक्रिडिटेशन प्रक्रिया की रीढ़ है। एसएसआर का सबसे महत्वपूर्ण अंग क्वालिटी इंडिकेटर फ्रेमवर्क है। इसमें विभिन्न पैमानों पर शिक्षण संस्थान के स्तर की जांच होती है। इसके अंतर्गत करिकुलर आस्पेक्ट, टीचिंग-लर्निंग एंड इवेल्यूएशन, रिसर्च, इनोवेशन एंड एक्सटेंशन, इंफ्रास्ट्रक्चर एंड लर्निंग रिसोर्सेस, स्टूडेंट स्पोर्ट एंड प्रोग्रेशन, गवर्नेंस, लीडरशिप एंड मैनेजमेंट और इंस्टीट्यूशनल वेल्यूज एंड बेस्ट प्रेक्टिसिज शामिल है।

    आईक्यूएसी के गठन के उद‌्देश्य एवं ढांचे के बारे में चर्चा की

    महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रवीण भारद्वाज ने कहा कि नैक एक्रीडेशन विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन सरकार की ओर से करना शिक्षा के विकास की ओर बढ़ना है। जिससे प्रदेशभर कॉलेज के प्राचार्य व नैक की टीम सदस्य शिक्षा के विकास पर मंथन आसानी से कर सकते है। महाविद्यालय की आईक्यूएसी की प्रभारी एवं उपाचार्या डॉ. लोकेश त्यागी ने कार्यशाला के आयोजन को सभी शिक्षण संस्थानों के लिए उपयोगी बताया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के जियो फीजिक्स विभाग के प्रो एवं आईक्यूएसी के समन्वयक दिनेश कुमार ने कहा कि आईक्यूएसी, इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सैल शिक्षण संस्थान का दिल होती है। उन्होंने आईक्यूएसी के गठन के उद‌्देश्य एवं इसके ढांचे के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की।

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