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पहले फ्री में लगते थे होर्डिंग्स, 1994 में करनाल नप ने पहली बार टैंडर कराया, फिर पूरे प्रदेश में होने लगे

Karnal News - पूर्व विधायक व पार्षद सुमिता सिंह मैंने अपनी राजनीति की शुरूआत पार्षद का चुनाव जीतकर की थी। नगर परिषद की...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:15 AM IST
Karnal News - the first hoardings were hoardings karnal naap made the first tandar in 1994 then started in the entire state
पूर्व विधायक व पार्षद सुमिता सिंह

मैंने अपनी राजनीति की शुरूआत पार्षद का चुनाव जीतकर की थी। नगर परिषद की चेयरमैन भी रही। शहर को अच्छी तरह समझती हूं। पिछले 24-25 साल से राजनीति में हूं। 1994 में नगर परिषद के वार्ड- 31 से पार्षद का चुनाव जीता और नगर परिषद की चेयरमैन बनी। तब नगर परिषद में आमदनी का कोई खास सोर्स नहीं था। नगर परिषद का बजट भी बहुत कम होता था। शहर का विकास तो दूर कर्मचारियों को वेतन देने को पैसा भी नहीं था, लेकिन ईमानदारी से काम किया और नगर परिषद की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया। शहर में होर्डिंग्स लोग फ्री में लगाते थे। करनाल नगर परिषद ने पहली बार इसका टैंडर कराया। इसके बाद पूरे प्रदेश में शहरों में होर्डिंग्स के टैंडर लगाए गए। इससे नगर परिषद की आमदन बढ़ना शुरू हो गई। चुंगी से भी आमदन बढ़ाई।

मैंने 1994 में पहला चुनाव लड़ा। उस समय ज्यादा प्रचार नहीं करना पड़ता था। डोर-टू डोर जाकर प्रचार करते थे। इससे सबसे मिलना भी हो जाता था। एक दो रिक्शे पर लाउड स्पीकर लगाकर प्रचार करते थे। उसे लोग ध्यान से सुनते थे। नगर परिषद चुनाव में कोई जाम नहीं लगता था। अब प्रत्याशियों ने एक-एक वार्ड में कई रिक्शे लगा दिए हैं। इससे आम जनता की शांति भंग होती है। सड़कों पर जाम लगा रहता है। मेयर की जबावदेही अब पहले से ज्यादा बढ़ गई है। पहले मेयर को पार्षदों को खुश रखना पड़ता था, लेकिन अब जनता के प्रति ज्यादा जबावदेही बढ़ गई है। लोग अच्छे व्यक्ति को वोट दें, ताकि शहर का विकास ज्यादा हो।

जैसा कि 1994 में नप चुनाव में वार्ड-31 से पार्षद बनी सुमिता सिंह ने बताया

जब मैं चेयरमैन बनी उस समय नगर परिषद की हालत खराब थी, कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल था, मैंने 1994 में पहला चुनाव लड़ा, तब ज्यादा प्रचार नहीं होता था

तब पार्षदों की खरीद-परोख्त नहीं होती थी

जब में चेयरपर्सन बनी, उस समय पार्षदों की खरीद-परोख्त नहीं होती थी। लोगों की सेवा करने लिए लोग पार्षद बनते थे। लोगों की सेवा भी करते थे। बाद में एक समय ऐसा आया पार्षदों की खरीद परोख्त कर चेयरमैन बनने लगे। इससे भ्रष्टाचार बढ़ना शुरू हो गया। जो व्यक्ति पार्षद खरीदकर चेयरमैन बनेगा वह भ्रष्टाचार भी करेगा। पिछले मेयर के चुनाव में क्या हुआ यह सब जानते हैं।

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