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पति की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरा करने मैदान में उतरी महिलाएं / पति की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरा करने मैदान में उतरी महिलाएं

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 03:15 AM IST

Karnal News - नगर निगम चुनाव में मेयर का पद महिला आरक्षित होने से महिला शक्ति को राजनीति में उतरने का मौका मिला है। यह मौका भले ही...

Karnal News - women in the field to fulfill their political ambitions
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नगर निगम चुनाव में मेयर का पद महिला आरक्षित होने से महिला शक्ति को राजनीति में उतरने का मौका मिला है। यह मौका भले ही उन्हें संविधान ने दिया है, लेकिन ज्यादातर महिलाओं ने खास तौर पर इस चांस को अपने पति की इच्छा और राजनीतिक महत्वाकांक्षा का सम्मान करते हुए स्वीकारा है। मेयर पद की अधिकतर प्रत्याशियों का चुनावी मैदान में आ डटने का कारण जनसेवा के साथ पति व परिवार की इच्छाओं का सम्मान सर्वोपरी है। पूर्व मेयर को छोड़ें तो अन्य मेयर प्रत्याशियों का खुद का राजनीतिक अनुभव नहीं रहा है, लेकिन अब सभी प्रत्याशी जैसे कि राजनीतिक रंग में रंग गई हैं। उनका वोट मांगने का तरीका और लोगों से संपर्क साधने की कार्यशैली उन्हें राजनीतिक पहचान देने के अनुकूल बन रही है। खास बात यह है कि महिला प्रत्याशियों के साथ अन्य बहुत सी महिलाओं को घर में चूल्हा-चौका छोड़कर एक नया अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला है। संविधान द्वारा प्रदत इस अधिकार से कहीं न कहीं महिला सशक्तिकरण की तरफ भी कदम बढ़ रहा है। महिलाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास हो रहा है। मेयर के चुनाव मैदान में उतरी कई प्रत्याशियों में इतना आत्मविश्वास जगा है कि अब वे खुद ही अन्य महिला साथियों के साथ डोर-टू डोर प्रचार में जुटी हुई हैं।

मेयर का पद आरक्षित होने से महिला शक्ति को राजनीति में उतरने का मौका मिला

मेरी प्रेरणा स्रोत मेरे पति, परिवार का फुल सपोर्ट

भाजपा से मेयर प्रत्याशी रेणू बाला गुप्ता के अनुसार उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे चुनाव लड़ेंगी। हालांकि उनके परिवार का राजनीति से पुराना नाता रहा है। नगर निगम का गठन हुआ तो उनके पतिदेव बृज गुप्ता चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, लेकिन उनका वार्ड-12 महिला के लिए आरक्षित हो गया। इसलिए मेरे पति ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया। परिवारजनों का भी फुल सपोर्ट है।

पति नहीं चाहते थे पार्षद का चुनाव लड़ना

पूर्व डिप्टी मेयर मनोज वधवा की प|ी आशा वधवा आजाद प्रत्याशी के तौर पर मेयर पद की केंडिडेट हैं। आशा वधवा का कहना है कि उनके पति एमएलए का चुनाव लड़ चुके हैं। इसलिए वे दोबारा से निगम में पार्षद का चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। इसलिए परिवार की सहमति से मुझे एमसी का चुनाव लड़वाने की बात कही थी। उनके चुनाव लड़ने के पीछे पति के कार्यों में हाथ बंटाने से राजनीतिक जागरूकता व उनकी प्रेरणा है।

आरक्षित सीट न होती तो नहीं लड़ती चुनाव

सांसद राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी से समर्थन प्राप्त आजाद प्रत्याशी कोमल चंदेल का कहना है कि मैं और मेरे पति सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं। वे अपने समय व सामर्थ्य के अनुसार कई तरह की सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। अगर मेयर का पद महिला आरक्षित नहीं होता तो उनके पति को ही चुनाव लड़ने को प्राथमिकता दी जाती है।

पति की इच्छा व जनता की भावनाओं का सम्मान

वार्ड-2 से पूर्व पार्षद बलविंद्र सिंह की प|ी बेअंत कौर आजाद मेयर का चुनाव लड़ने के लिए मैदान में हैं, जबकि खुद बलविंद्र सिंह भी अपने वार्ड-2 से पार्षद का चुनाव लड़ रहे हैं। बेअंत कौर का पहले से राजनीति में कोई अनुभव नहीं है, लेकिन प्रचार में अनुभवी प्रत्याशी की तरह वोट मांग रही हैं। उनका कहना है कि अगर मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित नहीं होता तो उनके पति ही यह चुनाव लड़ते।

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