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जमीन दान में देने के बाद भी नहीं मिला सरकारी कॉलेज

इस साल खरखौदा व आसपास के विभिन्न 50 गांवों की लड़कियों को खरखौदा में सरकारी कन्या महाविद्यालय की सुविधा मिल सकती है।...

Danik Bhaskar | Mar 26, 2018, 02:45 AM IST
इस साल खरखौदा व आसपास के विभिन्न 50 गांवों की लड़कियों को खरखौदा में सरकारी कन्या महाविद्यालय की सुविधा मिल सकती है। जिससे वे मुफ्त में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं। क्योंकि प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश सरकार ने कॉलेज को सरकारी करने की दिशा में कदम उठाते हुए कन्या महाविद्यालय का संपूर्ण डाटा निदेशालय भिजवाने के निर्देश कर दिए हैं। क्षेत्र के 50 से अधिक गांव के प्रतिनिधियों, खरखौदा नगरपालिका व कन्या महाविद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा कन्या महाविद्यालय खरखौदा को पूर्ण रूप से सरकारी करने की मांग निरंतर की जा रही है। कन्या महाविद्यालय चेयरमैन वेदप्रकाश दहिया ने तो इस मामले में दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मानव संसाधन मंत्री को लिखित मांग भेजी थी। ताकि क्षेत्र के विभिन्न गांवों की बेटियों को मुफ्त शिक्षा प्राप्त हो सके। आखिरकार क्षेत्रवासियों की इस सामूहिक मांग पर प्रदेश सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जिसके चलते खरखौदा कन्या महाविद्यालय से संबंधित संपूर्ण डाटा हायर एजुकेशन विभाग निदेशालय ने तलब कर लिया है

यह है पूरा मामला

बनिया ठोला, सैनी ठोला व ब्राह्मण ठोले सहित विभिन्न प्रतिनिधियों की जनवरी 2017 में एक पंचायत महात्मा ज्योतिबा फूले स्मारक प्रांगण में आयोजित की गई थी । जिसमें शहर के विभिन्न प्रतिनिधियों ने मांग की थी कि कन्या महाविद्यालय के लिए जब जमीन दी गई थी तो उस समय जमीन सरकारी कन्या महाविद्यालय के लिए दी गई थी लेकिन उनके द्वारा दी गई जमीन में सरकारी कॉलेज नहीं बनाया गया बल्कि एडिड कॉलेज बनाया गया। जिसके कारण सरकारी कॉलेज का लाभ् क्षेत्र वासियों को नहीं मिला है। आज भी क्षेत्र में गरीब परिवारों की बेटियों को इस कॉलेज की बजाय सोनीपत या रोहतक सरकारी कॉलेजों में जाना पड़ता है। बहुत से अभिभावक अपने बेटियों को सोनीपत व रोहतक भेजने से कतराते हैं और यहां पर प्राईवेट कॉलेज की तरह फीस ली जाती है जो गरीब परिवार देने में सक्षम नहीं है। ऐसे में करोड़ों रुपए की जमीन दान में देने के बाद भी बेटियों को शिक्षा नहीं मिल रही है। प्रधान मंत्री नरेंद्र सिंह मोदी व सीएम मनोहर लाल खट्टर को 49 पेज की जो शिकायत भेजी गई थी, उसमें दो पेज में अपनी मांग भेजी गई है, करीब 40 पेजों पर आस पास के 60 गांवों के मौजिज लोगों के हस्ताक्षर फोन नंबर व पतों सहित भेजे गए हैं

प्रधानमंत्री को लिखा है पत्र