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बेटी को साले के साथ दवा लेने भेजना था दिल्ली इसलिए क्लास की बजाय स्टेनो रूम में था राजेश

भास्कर न्यूज | सोनीपत/खरखौदा सेक्टर-23 के पार्क के सामने स्थित मकान नंबर 1478 में रहने वाले पिपली कॉलेज में अंग्रेजी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 14, 2018, 03:00 AM IST

बेटी को साले के साथ दवा लेने भेजना था दिल्ली इसलिए क्लास की बजाय स्टेनो रूम में था राजेश
भास्कर न्यूज | सोनीपत/खरखौदा

सेक्टर-23 के पार्क के सामने स्थित मकान नंबर 1478 में रहने वाले पिपली कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर राजेश मलिक की उसकी 14 वर्षीय बेटी लक्षिका के सामने गोली मारकर उस समय हत्या की जब वह अपने मामा के साथ दिल्ली अस्पताल में जाने के लिए कॉलेज के स्टेनों रूम बैठी थी।

राजेश तीन बहनों में इकलौता था। राजेश लाॅ के बाद पिपली कॉलेज में तीन साल से एक्सटेंशन अंग्रेजी प्रोफेसर था। इससे पहले भी वह शहर के एक निजी स्कूल में अध्यापक रहा है। खबर सुनते ही बुजुर्ग पिता की जुबां से मेरे बेटे राजेश तुम बिन कैसे जी पाऊंगा की चीख निकली। पुलिस ने देर शाम मामले में सहयोग देने वाले छात्र अमित, आकाश और आरोपी जगमेल के चाचा रोहणा निवासी दिनेश को गिरफ्तार कर लिया। जिस पिस्तौल से गोली चली वह रोहणा निवासी दिनेश की लाइसेंसी पिस्तौल थी।

खरखौदा . प्रो. राजेश की गोली मारकर की गई हत्या की खबर सुनकर पिता हुआ बेहोश व विलाप करती बहनें।

छात्रों का नाम काटकर जोड़ने में चर्चा में रहा है कॉलेज

केएमपी के पास स्थित शहीद दलबीर सिंह राजकीय कॉलेज छात्रों की लंबी अबसेंट के कारण नाम काटने व शपथपत्र लेकर फिर से नाम जोड़ने में चर्चा में रहा है। कॉलेज में 440 के करीब विद्यार्थी हैं। इनमें 200 के करीब नाम काटे जा चुके हैं और जोड़े गए हैं। इससे कई छात्रों ने पहले भी स्टाफ के साथ तू-तड़ाक की हुई है। लेकिन मामला हमेशा आपसी सहयोग से सुलझ गया है।

स्टाफ पहले तो बुलेट बाइक के पटाखे समझे

मिलनसार था राजेश : स्टाफ

प्राचार्य रवि प्रकाश आर्य व प्रोफेसर किरण ने बताया कि मृतक राजेश मलिक बेहतर निष्ठावान प्राध्यापक थे। जो बच्चों को पढ़ाने में अच्छी रूचि लेते थे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पूरा सहयोग देते थी। किसी भी तरह का कॉलेज में कार्यक्रम होता था तो वे खुशी-खुशी अपना पूरा सहयोग देते थे। कॉलेज के विभिन्न कार्य भी वे कहने के बाद जिम्मेवारी से निभाते थे।

सुबह करीब 9 बजे बच्चे व प्रोफेसर अपनी कक्षाओं में जा चुके थे, स्टाफ के अन्य सदस्य भी कॉलेज की दिनचर्या संभाल रहे थे। प्राचार्य अभी कॉलेज में नहीं पहुंचे थे। आरोपी छात्र धड़ाधड़ प्रोफेसर राजेश मलिक पर गोली दाग रहा था, उसी दौरान गोली की आवाज को साथी प्रोफेसर एवं क्लेरिकल स्टाफ बुलेट मोटरसाइकिल के पटाखे समझ बैठे। जैसे ही बच्ची लक्षिका के जोर जोर से रोते हुए पापा-पापा चिल्लाने की आवाजें सुनी तो स्टाफ सदस्य बच्ची की आवाज की तरफ दौड़े, लेकिन उस समय आरोपी भाग चुका था।

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