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मुगलाें के खिलाफ खांडा में बनी थी सेना, अब 3 को सीएम करेंगे आर्म्ड प्रीपेटरी इंस्टीट्यूट का शिलान्यास

3 वर्ष पहले
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मुगल साम्राज्य की खिलाफत करते हुए मुगलाें के खिलाफ खांडा गांव में फाैज तैयार की गई। यह पहला आर्मी हेडक्वार्टर था। अब इस गांव में देश का पहला आर्म्ड प्रीपेटरी इंस्टीट्यूट खोलकर यहां पर फौज के जवान व अफसर तैयार किए जाएंगे। 3 नवंबर काे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर इस आर्म्ड इंस्टीट्यूट की आधारशिला रखेंगे। 50 एकड़ में बनेगा इंस्टीट्यूट। दिल्ली से 60 और सोनीपत से 20 किलोमीटर दूर स्थित खरखौदा तहसील के खांडा गांव से ही मुगलों के विरोध युद्ध का बिगुल बाबा वीर बंदा बहादुर बैरागी द्वारा बजाया गया था।

1709 में उन्होंने मुगलों से छिपकर खांडा गांव में बाबा महंत किशोरदास के बैरागी ठाकुरद्वारे पर रहे और एक विशाल सेना बनाई। उस समय पाकिस्तान व हिंदुस्तान एक थे, उनकी सेना में लाहौर से लेकर भारत के विभिन्न हिस्सों से युवकों ने हिस्सा लिया। रोहतक व सोनीपत के लोगों ने सेना में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया था। वीर बंदा बहादुर ने फरवरी 1709 में आकर खांडा गांव के बाबा महंत बाबा किशोरदास के यहां आकर डेरा डाला और नवंबर 1709 तक सेना को दक्ष बनाया। 3 नवंबर 1709 में उन्होंने सोनीपत में कब्जा जमाए बैठे मुगलों पर हमला बोलकर सोनीपत फतह किया। भारी भरकम खजाना इस दौरान मिला उस खजाने को अपने सैनिकों में बांट दिया। मात्र 9 माह की अवधि में एक विशाल सेना गठित करके यमुना और सतलुज नदियों के बीच का इलाका जीत लिया था। 17 अप्रैल से 7 दिसंबर 1715 तक पंजाब के गुरदासपुर के निकट नंगल में मुगलों से लंबी लड़ाई चली। जिसमें लंबे संघर्ष के बाद मुगल फौज द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और जून 1716 में कुतुब मीनार के निकट दिल्ली में करीब 800 सैनिकों सहित बंदा वीर बहादुर बैरागी शहीद हो गए थे।

वीर बंदा बहादुर बैरागी ने मुगलों से लड़ने के लिए यहां बनाया था आर्मी हेड क्वार्टर
खरखौदा.खांडा में सीएम मनोहर लाल के आगमन को लेकर तैयारियों का जायजा लेते डॉ. राज सिंह। खांडा गांव में वर्षों पुराना आश्रम।

खांडव वन से पड़ा खांडा गांव का नाम
महाभारतकालीन खांडव वन से खांडा गांव नाम पड़ा है। कहावत है कि इन वनों से महाभारतकालीन समय में पांडव यहां से गुजरे थे और कुछ दिनों के लिए यहां विश्राम भी किया था। जहां पर घने जंगल थे, जो धीरे-धीरे कम हो गए और आबादी बढ़ती गई। यह गांव झरोठ, चौलका, छोटा खांडा गांव का जनक भी बताया जाता है।

सीएम खट्टर के पूर्वज भी हुए थे सेना में शामिल
भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी डाॅ. राज सिंह ने बताया कि मुगलों के खिलाफ जब 1709 में बंदा वीर बहादुर बैरागी ने बिगुल बजाया तो हजारों की संख्या में उनकी फौज के सैनिक बने थे। मौजूदा प्रदेश के सीएम मनोहर लाल खट्टर व उनके पूर्वज भी इस फौज में शामिल हुए थे। उनके परिवारों से मुगलों के खिलाफ लड़ा‍इयों में शहीद हुए हैं।

बानिया ने बनाया लड़कियों के लिए स्कूल
खांडा गांव के लीलावती नाम के एक बनिया ने गांव के सभी ब्राह्मणों को उस समय एक लाल पोटली में लड्डू व गिल्ट का रपिया हर घर को दान था और गांव में अपनी करीब पांच एकड़ जमीन में लड़कियों के लिए स्कूल बनाया था। जिसे बाद में सरकार ने अपने अधीन कर लिया। जहां आज भी लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रही है।

यहां पुरानी प्रतिमाएं और मूर्तियां हैं
बाबा किशोर दास की विशाल वैष्णव पीठ थी जहां पर महंत आकर तपस्या करते थे। इस आश्रम में 410 वर्षों से अधिक पुरानी प्रतिमाएं व मूर्तियां भी रखी हुई है। मान्यता है कि यहां पर जो भी सच्चे दिल से मन्नते मांगता है उसकी पूरी होती है।

सांग रचयिता दादा दीप चंद भी इसी गांव से
देश में सांग अपने समय में बहुत प्रसिद्ध हुए, आज भी सांग के हजारों की संख्या में प्रदेश में फॉलोअर हैं। बताया जाता है कि सांग रचयिता दादा दीप चंद भी इसी खांडा गांव में जन्मे थे। बुजुर्ग तो उन्हें पंडित लख्मी चंद का गुरु भी बताते हैं।

408 वर्ष पुराना नागावाला सरोवर है यहां
वर्ष 1608 में निरमोही अखाड़े से नागा बैरागी महंत सुदन दास व महंत किशोरदास ने सरोवर भी बनाया था। जो निंबार्क संप्रदाय से संबंधित थे। जो राधा कृष्ण की उपासना करते थे। लंबे समय तक यहां पर राधा-कृष्ण की उपसना की गई। जन्माष्टमी पर यहां श्रद्धालु आते हैं और इस सरोवर में स्नान करके जाते हैं। सरोवर के साथ स्थित कुएं के पास बंदा वीर बहादुर बैरागी की प्रतिमा भी लगाई जाएगी।

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