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गोरड़ गांव में खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण, सरपंच के मकान का किया घेराव

गोरड़ गांव के ग्रामीणों को करीब 12 साल पहले लाखों रुपए की राशि खर्च कर डिग्गी की सुविधा उपलब्ध करवाई गई थी, जसराणा...

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2018, 02:25 AM IST
गोरड़ गांव में खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण, सरपंच के मकान का किया घेराव
गोरड़ गांव के ग्रामीणों को करीब 12 साल पहले लाखों रुपए की राशि खर्च कर डिग्गी की सुविधा उपलब्ध करवाई गई थी, जसराणा माइनर से 4 इंची पेयजल कनेक्शन की अनुमति मिली। ताकि गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो सके। लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण लाखों रुपए की राशि खर्च करने के बाद भी शुद्ध पेयजल आपूर्ति नहीं की जा रही।

अनदेखी का शिकायत हुई डिग्गी डैड होने के कगार पर पहुंच गई है। जिस व्यवस्था के अनुसार जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को काम करना चाहिए। उस विधि से काम नहीं किया जा रहा। ऐसे में ग्रामीणों को गांव में पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है। पेयजल सप्लाई विधिवत न होने से खफा गांव की महिलाओं ने सोमवार को सरपंच सतीश के मकान का घेराव कर गांव में पेयजल आपूर्ति की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लाखों रुपए की लागत से डिग्गी व तालाब बने हुए हैं लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग की अदूरदर्शिता व अनदेखी के कारण गांव में पेयजल आपूर्ति नहीं की जा रही। जिसके कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

खरखौदा . गोरड़ गांव में सरपंच के मकान का घेराव कर पेयजल की मांग करती महिलाएं।

पेयजल आपूर्ति के लिए यह होनी चाहिए व्यवस्था

गांव सरपंच सतीश कुमार का कहना है कि गांव में जो डिग्गी व तालाब बने हुए हैं, उनके लिए जसराना माइनर से 4 इंची मौघे से पेयजल तालाब तक पहुंचता है। जन स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि इस पेयजल को शुद्धीकरण करके गांव में बनी हुई टंकी में चढ़ाना चाहिए। ताकि गांव में बगैर बिजली के भी सप्लाई किया जा सके। लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। जन स्वास्थ्य कर्मियों ने दिन के समय ही पेयजल की व्यवस्था की तरफ ध्यान देते हैं व बिजली न होने का बहाना बनाते हैं। यही नहीं गांव की मांग के मुताबिक जसराणा माइनर में 4 इंची मोघे की जगह 6 इंची मौघे के माध्यम से पानी डिग्गी में पहुंचाया जाना चाहिए। ताकि गांव में पेयजल आपर्ति कराई जा सके।

पहले 5-5, अब दिए 9-9 हजार रुपए प्रति मकान मालिक

गांव निवासी पूर्व सरपंच जिले सिंह, सेवानिवृत्त दयानंद मास्टर का कहना है कि अधिकारियों की अनदेखी के कारण गांव में डिग्गी से पेयजल सप्लाई न के बराबर है। गांव में बिधराम पान्ना के लोगों ने पहले 5-5 हजार प्रति मकान मालिक एकत्रित करके ट्यूबवेल लगाया था और मासिक बिल देकर पेयजल की व्यवस्था की थी। अब ट्यूबवेल खराब होने के बाद 9-9 हजार प्रति मकान मालिक एकत्रित करके फिर से ट्यूबवेल की व्यवस्था कर मीठे पानी का इंतजाम किया गया है। ताकि मासिक बिल देकर पेयजल नसीब हो सके। लेकिन सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मी जानबूझकर ग्रामीणों की पेयजल व्यवस्था ठीक नहीं कर रहे हैं।

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