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‘मनुष्य को कभी देहाभिमान नहीं करना चाहिए’

रोहतक मार्ग पर सैनी चौपाल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा को सुनाते हुए कथावाचक रवि कांत शास्त्री( वृंदावन) ने प्रवचन...

Dainik Bhaskar

Jun 09, 2018, 03:20 AM IST
‘मनुष्य को कभी देहाभिमान नहीं करना चाहिए’
रोहतक मार्ग पर सैनी चौपाल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा को सुनाते हुए कथावाचक रवि कांत शास्त्री( वृंदावन) ने प्रवचन में कहा कि भगवान श्री कृष्ण का जब जन्म हुआ था तो जन्म के समय से ही उन्होंने अनेक लीलाएं दिखानी शुरू कर दी थी। बाल लीलाओं के द्वारा माखन चोरी, राक्षसों का उद्धार व अन्य लीलाएं दिखाकर ब्रजवासियों का मन मोह लिया था।

उन्होंने बृज में रहकर पूतना, शकटासुर, तृणावर्त, अघासुर व बकासुर आदि राक्षसों का उद्धार करके लोगों में शांति स्थापित की थी। बृज की माटी खाकर ब्रज रज का महत्व बढ़ाया। भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों का चीर हरण करके उनका देह अभिमान दूर किया था। इंद्र की पूजा बंद करवा कर ब्रजवासियों द्वारा गोवर्धन पूजा प्रारंभ कराई गई क्योंकि गोवर्धन महाराज कलयुग के प्रत्यक्ष देवता हैं , जो भी भक्त श्री गिरिराज भगवान की मन व श्रद्धा से उपासना करते हैं तो श्री गोवर्धन नाथ उनकी सभी कामनाओं को पूर्ण करते हैं। इसलिए मनुष्य को अपनी देह का कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। मन व श्रद्धा से उपासना करके लोक कल्याण का कर्म करते रहना चाहिए ।इस मौके पर जितेंद्र महाराज, आचार्य रूपकिशोर वशिष्ठ ,सोनू सैनी, आदर्श शर्मा ,लाला जगमोहन, मनवीर सैनी, सुनीता व अन्य महिला श्रद्धालु मौजूद रहे।

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