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सरकारी स्कूलाें में बच्चाें से पूछ रहे जाति, स्कूल में जाति व रिहायशी प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश

खंड शिक्षा अधिकारी आदर्श सांगवान के निर्देशों के मुताबिक अब सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई करने वाले...

Danik Bhaskar | May 25, 2018, 03:25 AM IST
खंड शिक्षा अधिकारी आदर्श सांगवान के निर्देशों के मुताबिक अब सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के जाति एवं रिहायशी प्रमाण पत्र कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से स्कूलों में ही बनवाना तय किया गया है। ताकि स्कूली छात्र-छात्राओं को तहसील कार्यालय में चक्कर न काटने पड़े। इसके चलते सरकारी व प्राइवेट स्कूलों के कक्षा में बच्चों की जातियां पूछी जा रही है। जाति काे लेकर बच्चे अब घर अाकर सवाल पूछ रहे हैं अाैर उन्हें इंसानियत का पाठ पढ़ाने वाले अभिभावक परेशान हैं। आम तौर पर नंबरदार एवं पटवारी प्रार्थी की जाति तस्दीक करता है, जिसे विश्वसनीय मानते हुए तहसीलदार जाति एवं रिहायशी प्रमाण पत्र जारी करता है। अब स्कूलों में बनने वाले प्रमाण पत्रों की जाति तसदीक प्रिंसिपल ही करेंगे और उसी तस्दीक के आधार पर जाति एवं रिहायशी प्रमाण पत्र जारी होंगे। क्लास में बच्चोंं को उठाकर उसकी जाति पूछने से आपस में बच्चों में इसकी चर्चा हो रही है।

फीस भी लग रही अधिक : प्रमाण पत्र बनाने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित फीस 30 रुपए प्रति छात्र प्रति प्रमाण पत्र रखी गई है। लेकिन कॉमन सर्विस सेंटर संचालक जो स्कूलों में जाकर बच्चों के जाति एवं रिहायशी प्रमाण पत्रों की फाइलों को अपलोड कर हैं। वे 30 रुपए की बजाय 80 रुपए प्रति छात्र वसूल रहे हैं। जबकि फार्म की 40 रुपए फीस अलग। ऐसे में कुल 70 की बजाय 120 रुपए देने पड़ रहे हैं। केवल गोहाना व खरखौदा में ही इस तरह की प्लानिंग से प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं।

कक्षा में जाति का जिक्र बच्चों में द्वेश पैदा कर सकता है


बच्चों को एक सुलभ तरीके से प्रमाण पत्र देने के प्रयास


प्रिंसिपल की तस्दीक पर बनेंगे प्रमाण पत्र