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रजिस्ट्री राइटिंग के दस्तावेज अधूरे मिले तो लाइसेंस होगा सस्पेंड

डीसी विनय सिंह ने जिले में जमीन खरीद-बेचने के दौरान जो दस्तावेज या रजिस्ट्री वसीका पंजीकरण लिपिक द्वारा लिखी जाती...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 06, 2018, 03:30 AM IST

डीसी विनय सिंह ने जिले में जमीन खरीद-बेचने के दौरान जो दस्तावेज या रजिस्ट्री वसीका पंजीकरण लिपिक द्वारा लिखी जाती है, उस दस्तावेज के लिखने से तहसील में पंजीकरण होने तक कहीं भी अगर कोई कमी या त्रुटि सामने आती है तो उसे उस समय रोकने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही जिस स्तर पर वह गलती या कमी सामने आई है संबंधित वसीका पंजीकरण लिपिक, आपरेटर व रजिस्ट्री क्लर्क पर कार्रवाई की जाए, लेकिन किसी भी सूरत में आधा अधूरा व बगैर मूल दस्तावेजों के जमीन खरीद-बेचने का दस्तावेज पंजीकृत न हों।

गुरुवार को तहसीलदार ने रजिस्टर पंजीकरण करने वाले ऑपरेटरों, वसीका पंजीकरण लिपिकों की एक बैठक ली। उन्होंने कहा कि सबसे पहले जमीन खरीद-बेच करने वाले वसीका पंजीकरण लिपिक के पास पहुंचते हैं। उनको स्पष्ट हिदायत देते हुए कहा कि दस्तावेज राइटिंग के दौरान जमीन का मूल स्टेटस, व्यावसायिक, कृषि भूमि है या सेक्टर में है या फिर किस काॅलोनी में है? कौन से मार्ग से नेशनल हाई-वे से, स्टेट हाईवे से, या अन्य सामान्य मार्ग से या फिर मुख्य गली या फिरनी से कितनी गहराई पर या दूरी पर स्थित है? इस तरह से पूरी तरह स्पष्ट स्थिति रजिस्ट्री दस्तावेज टाइप करते समय दर्शानी होगी। यही नहीं जमीन प्लाट के रूप में है या फिर जमीन पर कुछ बना हुआ है ये या कितना बना हुआ है? ये सभी विवरण दर्ज करना होगा। नक्शा व एनओसी मूल रूप से साथ लगानी होगी। तहसीलदार प्रदीप कुमार ने सभी वसीका पंजीकरण लिपिकों को हिदायतें दी है कि वे दस्तावेज टाइप करते समय किसी भी तथ्यों को न छिपाया। रजिस्ट्री लिपिक व ऑपरेटरों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी कमी मिली है तो दस्तावेज पंजीयन होने से पहले प्रोसेस पर रोक लगाकर रिजेक्ट कैटेगरी में डाले। तहसीलदार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर दस्तावेज अधूरे मिलते हैं तो वसीका पंजीकरण लिपिक का लाइसेंस रद्द करे के लिए भी कार्रवाई की जाएगी।

ऑडिट में निकल रही खामियां, हो रहे सैकड़ों केस

रजिस्ट्री राइटिंग के दौरान जो दस्तावेज तैयार होते हैं दरअसल उसमें जमीन की किस्म एवं लोकेशन व खाली या भवन संबंधित विवरण स्पष्ट न होने के कारण ऑडिट में रजिस्ट्रियों में स्टांप फीस संबंधित कमियां सामने आ रही है। जिसके कारण बाद में उपायुक्त अदालत में बकाया स्टांप फीस संबंधी कोर्ट केस बढ़ रहे हैं। जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस नुकसान को रोकने के लिए यह प्लानिंग तैयार की गई है।

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