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पांच बार दी जा चुकी जमीन, फिर भी खरखौदा को नसीब नहीं हुआ स्टेडियम

लंबे अरसे से खरखौदा में खेल स्टेडियम के लिए जमीन तो तय होती रही, लेकिन स्टेडियम नहीं बन पाया। कभी जमीन दान दी गई तो...

Dainik Bhaskar

Apr 29, 2018, 03:30 AM IST
पांच बार दी जा चुकी जमीन, फिर भी खरखौदा को नसीब नहीं हुआ स्टेडियम
लंबे अरसे से खरखौदा में खेल स्टेडियम के लिए जमीन तो तय होती रही, लेकिन स्टेडियम नहीं बन पाया। कभी जमीन दान दी गई तो कभी पालिका ने तय की। जमीन पर कब्जे ही होते रहे या फिर प्लान बदल दिए गए। पंचायत व नगरपालिका ने ही नहीं खरखौदा की एक दानी महिला ने अपने साढ़े पांच एकड़ जमीन भी दान दी थी, लेकिन जिस उद्देश्य से जमीन दी गई, वह उद्देश्य सरकार पूरा नहीं करा पाई। जिसका खामियाजा खरखौदा की जनता को भुगतना पड़ रहा है। अब मुख्यमंत्री की मनोहरलाल की घोषणा भी स्टेडियम बनाने के लिए है, नगर पालिका अभी जमीन तय नहीं कर पाया है।

केस 1 : खरखौदा की एक दानवीर पंडित महिला घुगड़ी देवी उर्फ गोंदड़ी देवी ने वर्ष 1917 में साढ़े पांच एकड़ जमीन स्कूल को दान में दी थी। थाना कलां रोड व सोनीपत रोड पर टू साइड है। उस समय अंग्रेजों की गुलामी में भारत जकड़ा हुआ था। ये स्कूल भी प्राइमरी शिक्षा तक ही सीमित था। जो डिस्ट्रिक बोर्ड के अधीन स्कूल होते थे। प्रदेश के सभी स्कूल पंचायती जमीन में थे और कब्जा स्कूलों का होता है। इसी तरह से खरखौदा में मलकियत घुगड़ी देवी की थी और कब्जा स्कूल का रहा। संबंधित जमीन में नहरी पानी भी लगता था तो उगाही स्कूल ने चुकता नहीं की। जिसके बाद उक्त जमीन की उगाही पंचायत ने दे दी और जमीन पर अपना कब्जा जमा लिया। अब ब्लाॅक समिति का उक्त जमीन पर कब्जा है। इसी जमीन पर स्कूल को 2008 में अपग्रेड कराया है।

केस 2 : वर्ष 1983 में हिंद केसरी संजय पहलवान कुश्ती में वर्ल्ड चैंपियन बना था, तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल का दौरा खरखौदा में था। खेलों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने खरखौदा में दिल्ली रोड पर खेल स्टेडियम की घोषणा की। नगरपालिका ने इसके लिए करीब 4 एकड़ जमीन भी दी, लेकिन इस जमीन पर बाद में कब्जा हो गया। बताया जाता है कि नगरपालिका ने यह जमीन शर्तों पर किसी को बेच दी, जिससे इस जमीन का व्यवसायीकरण हो गया। शहरवासियों की इस तरह से खेल स्टेडियम के नाम पर जमीन खुर्द-बुर्द हो गई। खेल स्टेडियम नसीब नहीं हुआ।

केस 3 : वर्ष 1994 में मटिंडू मार्ग पर नगरपालिका की करीब 12 कनाल 8 मरले जमीन में खेल पार्क बनाने की दिशा में कदम उठाए और जमीन खेल के लिए नगरपालिका ने उपलब्ध करवाई। तत्कालीन मंत्री हुक्म सिंह ने खरखौदा मटिंडू मार्ग पर इसका शिलान्यास भी किया, लेकिन इस जमीन को एक तरफ किसानों से कब्जा लिया, दूसरी तरफ अवैध कब्जाधारियों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया। जिसके कारण यहां पर भी बच्चों को खेल मैदान नसीब नहीं हो सका।

केस 4 : वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दौरे के दौरान खरखौदा में खेल स्टेडियम बनाने की दृष्टि से नगरपालिका ने मटिंडू मार्ग पर करीब पांच एकड़ जमीन में खेल मैदान बनाने के लिए प्रस्ताव पास किया। यही नहीं सीएम घोषणा के तहत खेल स्टेडियम के लिए करीब दो करोड़ रुपए की राशि भी मंजूर की, लेकिन यहां पर लोगों को रिहायशी कब्जों के कारण मामला न्यायालय में चला गया। इससे प्रशासन को स्टेडियम बनाने का काम अधर में लटक गया।

केस 5 : वर्ष 2017 में सीएम घोषणा के तहत जब मटिंडू मार्ग पर खेल स्टेडियम बनाने की कार्रवाई सिरे नहीं चढ़ पाई तो नगरपालिका ने प्रशासन को आईटीआई के पीछे वीराने में खेल स्टेडियम बनाने के लिए आगामी कार्रवाई शुरू कर दी। जो बाईपास से बाहर वीराने में हैं। अब खेल स्टेडियम बनाने की कार्रवाई ठप पड़ी हुई है।

खरखौदा . सिविल अस्पताल के पास वह स्थान जो स्टेडियम के लिए निर्धारित कर रखा है।

खरखौदा . सिविल अस्पताल के पास वह स्थान जो स्टेडियम के लिए निर्धारित कर रखा है।

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