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बेटी से खफा होकर राजा ने एक कंगाल लकड़हारे के साथ कर दी उसकी शादी...

शहर के छपडेश्वर मंदिर में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में दस दिवसीय सांग का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें पंडित...

Bhaskar News Network| Last Modified - Jul 20, 2018, 04:50 AM IST

बेटी से खफा होकर राजा ने एक कंगाल लकड़हारे के साथ कर दी उसकी शादी...
बेटी से खफा होकर राजा ने एक कंगाल लकड़हारे के साथ कर दी उसकी शादी...
शहर के छपडेश्वर मंदिर में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में दस दिवसीय सांग का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें पंडित लख्मीचंद के पौत्र पंडित विष्णुदत्त ने कई किस्से सुनाते हुए दर्शकों का मनोरंजन किया। उन्होंने दर्शकों को शाही लकड़हारे का किस्सा सुनाते हुए बताया कि राजस्थान में राजा राय सिंह की दो पुत्रियां बेला और बीना थी। राजा ने अपने बगीचे के बाहर बोर्ड पर लिख दिया था कि जीवन में जो बेफिक्र होता है वह खुशनसीब होता है, लेकिन जब बीना ने अपने पिता का लिखा हुआ बोर्ड पढ़ा तो बीना ने उसके नीचे लिखा कि बेफिकरी से तो पशु भी पेट भर लेते हैं पर वे खुश नसीबी प्राप्त नहीं कर सकते। नीचे ये भी लिखा ही शुभ कर्मों से ही खुशनसीबी प्राप्त होती है।

अगले दिन जब राजा ने बोर्ड को पढ़़ा तो राजा ने पूछा कि ये किसने लिखा है? तो राजा की पुत्री बीना ने अपने पिता से कहा कि इसे मैने लिखा है। राजा ने अपनी पुत्री से कहा कि जो मैंने लिखा है वह सही है, लेकिन बीना अपने लिखे हुए को सही बता रही थी। इस बात से खफा होकर राजा राय सिंह ने अपनी पुत्री बीना से कहा कि मैं तुम्हारी खुशनसीबी देखना चाहता हूं,यही नहीं खफा राजा ने एक कंगाल लकड़हारे के साथ बीना की शादी कर दी। बदकिस्मती से वह लकड़हारा भी राजा जोधानाथ का पुत्र था। क्योंकि राजा जोधानाथ ने अपनी प|ी रुपाणी को एक शर्त के अनुसार आश्रम में रहते हुए कुछ समय के पश्चात एक पुत्र हुआ जिसका नाम शाही लकड़हारा रखा गया। जब शाही लकड़हारा 6 वर्ष का हुआ तो उसकी माता रानी रुपानी की भी मृत्यु हो गई। बाद में जब शाही लकड़हारा बड़ा हुआ तो वह राजस्थान के माधवपुर में लकड़ी बेचकर गुजारा करने लगा।

बाद में राजा राय सिंह ने अपनी पुत्री बीना की शादी इसी शाही लकड़हारे के साथ कर दी। बीना के पास सोने का एक छन्न कंगन था जिसे पति को बेचकर सामान खरीदने के लिए दे दिया। बीना अपने पति के स्टब गंगा जी मेले पहुंचने के बाद वहां डाकुओं ने शाही लकड़हारे को उठाकर अपने साथ ले गए। इसी मेले में राजा जोधानाथ भी गंगा स्नान के लिए पहुंचे हुए थे, उन्होंने जब एक रोती हुई महिला बीना को देखा तो रोने का कारण पूछ लिया। जब बीना ने बताया कि वह एक राजा जोधानाथ व रानी रुपाणी के पुत्र शाही लकड़हारे की प|ी है और उसके पति शाही लकड़हारे को डाकू उठाकर अपने साथ ले गए। ये सुनकर राजा जोधानाथ बीना को अपने साथ अपने महल ले आए और उन्होंने सभा बुलाकर घोषणा करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति शाही लकड़हारे की जीवनी के बारे में बताएगा उसे मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा। कई लोग अपनी झूठ-मूठ की कहानी लेकर राजा के समक्ष पहुंचे, लेकिन उन कहानियों में सच्चाई नहीं मिली। जब शाही लकड़हारा महल में पहुंचा तो उसने अपने जीवन की कहानी राजा को सुनाई।

खरखौदा. छपड़ेश्वर मंदिर में सांग के दौरान पंडित विष्णुदत्त शाही लकड़हारे के किस्से का वृतांत करते हुए।

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