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चोटी पर चढ़ते समय समय भले ही लगे लेकिन गिरते देर नहीं लगती ः शास्त्री

कथा सत्संग से धर्म को बल मिलता है। जिन्हें गुरु के वचनों पर विश्वास नहीं होता उन्हें सपने में भी सुख नसीब नहीं...

Danik Bhaskar | Jun 15, 2018, 02:25 AM IST
कथा सत्संग से धर्म को बल मिलता है। जिन्हें गुरु के वचनों पर विश्वास नहीं होता उन्हें सपने में भी सुख नसीब नहीं होता। उक्त प्रवचन बिजेंद्र शास्त्री ने बहादुरपुर के यमुना मंदिर में श्रीराम कथा में कहे। शास्त्री ने कहा कि जीवन में गुरु का होना आवश्यक है। गुरु गुणवान हो। गुरु वही है जो अपने शिष्य को परमात्मा से मिला दे।

मन बड़ा चंचल होता है। इंसान को ईश्वर भक्ति से भटकाए रखता है। विषयों, भोग वासनाओं में उलझाए रखता है। माया महा ठगनी होती है। माया से मायापति ही बचा सकते हैं। बिजेंद्र शास्त्री ने कहा कि चोटी पर चढ़ते समय देर भले ही लगे, लेकिन गिरते देर नहीं लगती। दिन फिरते देर लगे लेकिन दिल फिरते देर नहीं लगती है। राजा हो या निर्धन माया सबको भटकाती है। जीवन में किसी भी वस्तु का अहंकार न करें। अहंकार के कारण ही मनुष्य अच्छे कार्य का श्रेय अपने को देता है और काम बिगड़ जाने पर दोष दूसरों को देता है।

इस अवसर पर स्वामी सुबोधानंद, विश्व हिन्दू परिषद के जगाधरी प्रखंड के प्रमुख जयकरण गुर्जर, राधे लाल गुप्ता, राज कुमार, संदीप गुप्ता,नरेंद्र कुमार, कंवर पाल, संजय कालस, राम कुमार, देवी दास, भगत सिंह, नरेश बटार, सूरज भान, नरेश कुमार गुर्जर, शिवम, हर्ष कुमार, राजबीर सिंह, अशोक गर्ग, नरेश सिंगला उपस्थित थे।

खिजराबाद | कथा में प्रवचन सुनते श्रद्धालु।