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जहां प्रेम नहीं वहां 56 प्रकार का भोजन भी बेस्वाद होता है: वरूणदास

स्वार्थ रहित किया गया कार्य सबसे बड़ा परोपकार होता है। जहां प्रेम नहीं वहां 56 प्रकार का भोजन भी अच्छा नहीं लगता।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 02:50 AM IST

स्वार्थ रहित किया गया कार्य सबसे बड़ा परोपकार होता है। जहां प्रेम नहीं वहां 56 प्रकार का भोजन भी अच्छा नहीं लगता। भगवान से बड़ा भगवान का नाम है। भक्ति वही जो आजीवन चले।

कलेसर के विषणु देवानंद अजात आश्रम में कथा वाचक वरूण दास ने ये प्रवचन किए। वरूण दास ने कहा कि भगवान को अनेक नामों से पुकारा जाता है। श्रीकृष्ण के सभी नाम प्रिय हैं। उन्होंने महिलाओं से आग्रह करते हुए कहा कि बच्चों का नामकरण संस्कार अवश्य करें। बच्चों के नाम सार्थक होने चाहिए।

वरूण दास ने कहा कि यशोदा वही है जो दूसरों का मान करने वाली है। उन्होंने कहा कि पूतना भेष बदल कर बालक श्रीकृष्ण को जहर पिलाना चहाती है लेकिन माता यशोदा मना नहीं करती उसे पूरा मान सम्मान देती है। दूसरी तरफ कृष्ण की भक्त मीरा स्वयं जहर पीकर भगवान से मिलना चाहती है। भगवान श्रीकृष्ण दोनों को दर्शन देते हैं। इस अवसर पर सरपंच संगीता, पूर्व सरपंच रघुबीर राणा, पूर्व सरपंच रविंद्र कुमार, विनोद तेलीपुरा, करनैल धीमान भी उपस्थित रहे।

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Web Title: जहां प्रेम नहीं वहां 56 प्रकार का भोजन भी बेस्वाद होता है: वरूणदास
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