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निजी में बताया छाती में कैंसर, एलएनजेपी में गांठ का ऑपरेशन

एलएनजेपी के सर्जन के काम करने का तरीका अब दूसरे जिलों में भी सराहा जाने लगा है। इसकी बदौलत दूसरे जिलों से मरीज इलाज...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:30 AM IST

निजी में बताया छाती में कैंसर, एलएनजेपी में गांठ का ऑपरेशन
एलएनजेपी के सर्जन के काम करने का तरीका अब दूसरे जिलों में भी सराहा जाने लगा है। इसकी बदौलत दूसरे जिलों से मरीज इलाज के लिए एलएनजेपी आने लगे हैं। सर्जन बच्चादानी के मुंह की रसोली व ब्रेस्ट कैंसर की रसोली के सफल ऑपरेशन कर चुके हैं। सर्जन डॉ. जगबीर संधू की सूझबूझ एक महिला के लिए वरदान बन गई। गांव खमूरी पखड़ा जिला संगरूर पंजाब वासी रीना को एक निजी अस्पताल ने छाती में कैंसर बताया था।

रीना किसी परिचित के कहने पर जिला अस्पताल में सर्जन को दिखाने के लिए आई। सर्जन को महिला की स्थिति देखकर संदेह हुआ। उसके बाद महिला पर सर्जन ने रिसर्च की। महिला की दोबारा से सभी जांच की गई। टेस्टों की सभी रिपोर्ट नॉर्मल आई। उसके बाद सर्जन ने महिला के ब्रेस्ट की गांठ की सर्जरी की। चिकित्सक ने महिला की पूरी छाती की सर्जरी होने से बच गई। इससे पहले ब्रेस्ट कैंसर के ऑपरेशन को कराने के लिए महिलाओं को पीजीआई जाना पड़ता है। बता दें कि सर्जन डॉ. जगबीर संधू सात ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी कर चुके हैं। मरीज रीना ने कहा कि जिला अस्पताल में चिकित्सक द्वारा उनकी हर संभव सहायता की गई।

डॉ. संधू के अनुसार लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं अपने जीवनकाल में रसोली का शिकार होती हैं। ये अक्सर 30 से 50 वर्ष के बीच की महिलाओं में अधिक देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि ये मोटापा से ग्रस्त महिलाओं में अधिक होती है क्यों कि उनमें एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर अधिक होता है। महिलाओं में रसोली 16 से 50 वर्ष तक कभी-भी उभर सकती हैं।

चार हजार सर्जरी : सर्जन ने चार साल पहले अक्टूबर 2013 में ज्वाइन किया था। अभी तक सर्जन विशेष सर्जरी के साथ करीब चार हजार सर्जरी कर मरीजों की सेवा कर चुके है।

सहूलियत

30 से 50 साल की 40 % महिलाएं होती हैं रसोली का शिकार, साढ़े तीन साल में कर चुके 4 हजार सर्जरी

मरीजों को न हो परेशानी, हर संभव सहायता दी जाती है : संधू

सर्जन डॉ. जगबीर संधू ने कहा कि जिला अस्पताल में मरीजों को हर संभव सहायता दी जा रही है। अस्पताल में मरीजों की विशेष सर्जरी की जा रही है। संधू ने कहा कि हाल ही में पंजाब वासी एक महिला को निजी अस्पताल द्वारा छाती में कैंसर बताया गया था। जिसकी जिला अस्पताल में जांच की गई। महिला की एक ब्रेस्ट की गांठ में ही कुछ समस्या दिखाई दी। जांच के बाद महिला की पूरी छाती का ऑपरेशन करने की जरूरत नहीं पड़ी। संधू ने कहा कि वह इससे पहले सात ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी कर चुके हैं जोकि सभी कामयाब रही। वहीं बच्चेदानी के मुंह की रसौली का ऑपरेशन भी जिला अस्पताल में कामयाब रहा।

अस्पताल की मोर्चरी में चार शवों को रखने के लिए लगेगा फ्रिजर

कुरुक्षेत्र | जिला अस्पताल की मोर्चरी में अब जल्द ही शवों को रखने के लिए बेहतर व्यवस्था की जाएगी। अभी तक जिला अस्पताल की मोर्चरी में केवल एक फ्रिजर की व्यवस्था है। अस्पताल की मोर्चरी में दो शवों को रखने के लिए एक ही फ्रिजर से काम चलाया जा रहा है। वह भी अधिकतर समय खराब ही रहता है। जिसके चलते मोर्चरी में शवों को चूहे कुतर जाते हैं। ऐसी कई घटनाएं जिला अस्पताल की मोर्चरी में हो चुकी हैं। मोर्चरी में कई बार एक समय में दो से तीन शव आ जाते हैं। ऐसे में शव को मोर्चरी के अंदर स्ट्रेचर पर ही रखना पड़ता है। अब एक समय में मोर्चरी में छह शवों को एक साथ रखने के लिए व्यवस्था बनाई जा रही है। एमएस डॉ. मनजीत सिंह ने कहा कि मोर्चरी में शवों को रखने के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही थी। गर्मी के सीजन में शव को फ्रिजर के बिना नहीं रख सकते। चार शवों को रखने के लिए एक फ्रिजर की डिमांड भेजी हुई है।

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