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सतगुरु कृपा से प्रभु का अनुभव : निषाद

संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार को सत्संग आयोजित किया गया। संत निरंकारी मिशन की पत्रिका के संपादक महात्मा...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:30 AM IST
संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार को सत्संग आयोजित किया गया। संत निरंकारी मिशन की पत्रिका के संपादक महात्मा हरजीत निषाद ने कहा कि निराकार सागर है और आत्मा उसकी बूंदें हैं। जिस तरह मछली पानी में रहती है और पानी में ही खाती है और पानी में ही सोती है, पानी में ही जागती है।

इसी तरह प्रभु तो अंग संग है, वह भी पानी की तरह है। उसका अहसास भी होता है, लेकिन सतगुरु की शरण मे जाकर प्रभु की जानकारी होती है। सतगुरु की कृपा से प्रभु का अनुभव होता है। जब प्रभु दिख जाता है फिर मछली की भांति प्रभु रूपी पानी का अनुभव होता है। जिस तरह हम ट्रेन में यात्रा करते समय टिकट लेकर चढ़ते हैं ताकि डर न रहे कि चैकर हमें पकड़ न ले उसी तरह शारीरिक यात्रा में भी हमें ब्रह्मज्ञान रूपी टिकट हमारी भक्ति में सहायक होती है। इस अवसर पर संयोजक गुरचरन सिंह, बालकृष्ण मस्ताना और केवल कृष्ण अरोड़ा मौजूद थे।

संत निरकांरी भवन में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में प्रवचन सुनते श्रद्धालु।