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प्रसन्नता तनाव से मुक्त होने का बेहतर साधन : प्रीतमपाल

लाडवा| पूर्व लोकायुक्त व रिटायर्ड जस्टिस प्रीतमपाल ने कहा कि प्रसन्न रहना ही सबसे बड़ी कला है। जिससे मनुष्य हर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 02, 2018, 02:50 AM IST

लाडवा| पूर्व लोकायुक्त व रिटायर्ड जस्टिस प्रीतमपाल ने कहा कि प्रसन्न रहना ही सबसे बड़ी कला है। जिससे मनुष्य हर प्रकार के तनावों से मुक्त हो जाता है। जस्टिस प्रीतपाल लाडवा इंद्री मार्ग स्थित बड़ौंदा यज्ञशाला में 76वें चरित्र निर्माण शिविर में मुख्यातिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता में डूबा रहता है और इस चिंता के चलते अपनी प्रसन्नता को बिल्कुल ही भूल बैठा है। प्रसन्न रहने से मनुष्य तनाव मुक्त हो जाता है और कई जटिल बीमारियों की चपेट में आने से बच जाता है। शिविर में आए आर्य समाज के प्रतिनिधियों ने भी प्रवचनों व भजनों से लोगों को निहाल किया। इससे पहले विश्व कल्याण के लिए यज्ञशाला में यज्ञ हुआ। जस्टिस प्रीतमपाल व यज्ञशाला की संचालिका माया देवी ने यज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में आहुति डाली। इस मौके पर महिंद्र सिंह, सुभाष मेहता, नरेंद्र नांदल, राजेंद्र, हाकम सिंह सहित अनेक व्यक्ति उपस्थित थे।

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