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पाॅल्यूशन फैलाने वाली 300 इंडस्ट्रीज में कोयले का विकल्प बनेगी पीएनजी

गुड़गांव में बढ़ते पॉल्यूशन को कम करने के लिए अब इंडस्ट्रीज में जलने वाले कोयले को बंद कर पीएनजी (पाइप नेचुरल गैस) को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 05, 2018, 02:05 AM IST

पाॅल्यूशन फैलाने वाली 300 इंडस्ट्रीज में कोयले का विकल्प बनेगी पीएनजी
गुड़गांव में बढ़ते पॉल्यूशन को कम करने के लिए अब इंडस्ट्रीज में जलने वाले कोयले को बंद कर पीएनजी (पाइप नेचुरल गैस) को इस्तेमाल करने का नोटिस पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने दिया है। एयर पॉल्यूशन फैलाने वाली 300 कंपनियों को चिह्नित किया गया है। बोर्ड ने इन कंपनियों के बॉयलर, भट्ठी व हीटर चलाने के लिए पीएनजी इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। साइबर सिटी में पॉल्यूशन का स्तर फिलहाल खतरनाक स्तर पर है, अक्टूबर से दिसंबर के बीच पीएम 2.5 का स्तर बढ़कर 500 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाता है। हालांकि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार पॉल्यूशन का सबसे बड़ा कारण डीजल से चलने वाहन हैं, दूसरा कारण भारी इंडस्ट्री में जलने वाला कोयला व बॉयलर व भट्टियां भी हैं। ऐसे में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जयभगवान ने बताया कि गुड़गांव में 300 इंडस्ट्री ऐसी हैं, जिनमें कोयला ईंधन के रूप में इस्तेमाल होता है, जिससे बड़ी मात्रा में धुआं निकलता है। इन कंपनियों को कोयले की जगह ग्रीन फ्यूल पीएनजी इस्तेमाल करने के लिए नोटिस दिए गए हैं। पीएनजी से इंडस्ट्रीज से निकलने वाला धुआं कम हो सकेगा।

नोटिस के बाद भी नहीं लगा डिवाइस, अब कार्रवाई

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के गुड़गांव क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा पॉल्यूशन फैलाने वाली गुड़गांव व मेवात की 802 कंपनियों का चयन कर अलग-अलग कैटेगरी बनाई थी। इनमें सबसे अधिक पॉल्यूशन फैलाने वाली आठ कंपनियों को नोटिस देकर उन्हें ऑनलाइन पॉल्यूशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के आदेश दिए थे। इन कंपनियों में गुड़गांव की 239 कंपनियों को रेड, 361 कंपनियों को ऑरेंज, 20 को ग्रीन व 10 को वाइट कैटेगरी में रखा है। बोर्ड के अधिकारी जयभगवान ने बताया कि रेड कैटेगरी में 8 कंपनियां ऐसी थीं, जो सबसे अधिक पॉल्यूशन फैला रही थीं। इन्हें डिवाइस लगाने के लिए आदेश दिए थे, लेकिन एक महीने के नोटिस के बाद भी डिवाइस नहीं लगाए गए हैं। इन कंपनियों पर नॉर्म्स के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन कंपनियों को बंद भी किया जा सकता है।

300 छोटी बड़ी कंपनियों में सप्लाई हो रही है पीएनजी

हरियाणा सिटी गैस के एमडी राहुल चोपड़ा ने बताया कि गुड़गांव में 300 छोटी-बड़ी कंपनियों में पीएनजी की सप्लाई दी जा रही है। गुड़गांव में रोजाना 50 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (सीएमसी) की खपत है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर अन्य कंपनियों को भी सप्लाई की जा सकती है।

जिन कंपनियों की चिमनियों में पॉल्यूशन मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं, वें बंद होगीं : बोर्ड अफसर

गुड़गांव. सेक्टर 34 स्थित अौद्योगिक क्षेत्र में स्थित इंडस्ट्री।

जरूरत के मुताबिक पीएनजी सप्लाई हो: यादव

एनसीआर चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष एचपी यादव ने बताया कि पीएनजी नॉन पॉल्यूशन ईंधन है। पीएनजी का गुजरात के गांधीनगर की कुछ इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल किया जा रहा है। सबसे पहले इंडस्ट्रीज तक पीएनजी की सप्लाई पहुंचनी चाहिए। दूसरे पीएनजी की उपलब्धता होनी जरूरी है। गुड़गांव में पीएनजी की उपलब्धता पहले ही कम है, ऐसे में इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार पीएनजी मुहैया कराना जरूरी है।

ये है पॉल्यूशन लेवल:गुड़गांव में वर्तमान में पीएम 2.5 का स्तर अधिकतम 213 एमजीसीएम, जबकि न्यूनतम 153 एमजीसीएम दर्ज किया गया है। जो दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर है। जबकि फरीदाबाद में पीएम 2.5 का स्तर अधिकतम 208 एमजीसीएम दर्ज किया गया।

गुड़गांव में पॉल्यूशन का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण डीजल ऑटो हैं, जबकि दूसरा कारण इंडस्ट्री हैं। एयर पॉल्यूशन फैलाने वाली कंपनियां, जिनमें चलने वाले बायलर, भट्टी व हीटर से पॉल्यूशन काफी बढ़ जाता है। ऐसी इंडस्ट्रीज को कोयले की जगह पीएनजी अपनाने को नोटिस दिया है। वहीं जिन कंपनियों की चिमनियों में ऑनलाइन पॉल्यूशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के लिए नोटिस जारी किए गए थे, अब उन कंपनियों को बंद कराया जाएगा। -जयभगवान, रीजनल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ऑफिसर, गुड़गांव।

आंखों और स्किन में एलर्जी:सिविल अस्पताल के डॉ. संजय नरुला ने बताया कि एयर पॉल्यूशन से शरीर को कई तरह की बीमारियां लगती हैं। इससे सांस व दमे की बीमारी के अलावा आंखों व स्किन की एलर्जी भी होती है। फेफड़ों में कार्बन जमने लगता है जो आगे चलकर बेहद नुकसान पहुंचाता है। पॉल्यूशन से इनफर्टिलिटी भी बढ़ रही है।

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