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मेवात के 200 जोहड़ सूखे, 70 हजार पशुओं के लिए पीने के पानी का संकट

जिले के 200 जोहड़ों में पानी सूखने से लगभग 70 हजार पशुओं के सामने पेयजल संकट पैदा हो गया है। यह संकट निरंतर मानसून की कमी...

Danik Bhaskar | Mar 24, 2018, 02:05 AM IST
जिले के 200 जोहड़ों में पानी सूखने से लगभग 70 हजार पशुओं के सामने पेयजल संकट पैदा हो गया है। यह संकट निरंतर मानसून की कमी व सरकारी मशीनरी की लापरवाही के कारण पैदा हुआ है। अब तक तो जिले में मानवजाति के सामने पेयजल संकट खड़ा था लेकिन गर्मी की शुरुआत होते ही पशुओं के सामने पैदा हुए जलसंकट से पशुपालक संकट में फंसते जा रहे हैं।

जिले के 304 गांवों में से 200 गांवों के पशुपालक अपने पशुओं की प्यास गांव में बने जोहड़ों के पानी से बुझाते हैं। गांव के जोहड़ों में पानी बारिश या नहरी एकत्रित होता है। पिछले 2 सालों में बारिश कम हुई है और नहर विभाग ने भी गांवों में बने जोहड़ों को पानी से नहीं भरा। प्रभावित किसान अपने परिवार के लोगों की प्यास तो पानी खरीदकर बुझा लेते हैं, पशुओं के लिए पानी खरीद पाना उनके लिए काफी मुश्किल भरा है। दो साल से पशुपालक अपने गांवों के जोहड़ों को नहरी पानी से भरवाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। नगीना खंड के अकलीमपुर गांव के किसान हाजी फारुख, मरोड़ा गांव के इस्माइल, खनपुरघाटी गांव के रसीद, चौधरी इलयास, कंसाली गांव के शहीद, कंकरखेड़ी के हाजी असगर आदि ने बताया कि जमीन बारिश कमी के कारण फसल योग्य नहीं रही है। पीने के स्रोत बंद हो चुके हैं। जिले के 200 गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जाता है, जिससे लोग अपनी प्यास बुझाते हैं। गांवो में बने जोहड़ सूख चुके हैं। पशुपालकों के सामने पशुओं के पीने के पानी का प्रबंधन करने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि गांवों में लगभग 70 हजार पशुओं के लिए पीने के पानी का प्रबंध नहीं है। किसान पिछले 2 सालों से गांवों में बने जोहड़ों को नहरी पानी से भरने की गुहार अफसरों के सामने लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। नगीना, फ़िरोजपुर-झिरका खंड की नहर व नालों में 2004 से पानी नहीं आया है।

नूंह. नगीना में सूखता जोहड़।

पानी मिलेगा तो जोहड़ों को जरूर भरवाया जाएगा