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श्रद्धासुमन अर्पित कर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

न्यू कालोनी क्षेत्र में शहीदेआजम भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव का बलिदान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नगर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 24, 2018, 02:05 AM IST

न्यू कालोनी क्षेत्र में शहीदेआजम भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव का बलिदान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नगर निगम के पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर यशपाल बतरा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर बतरा ने कहा कि इन शहीदों ने युवावस्था में ही देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। युवाओं को इन शहीदों से प्रेरणा लेनी चाहिए। निस्वार्थ भाव से देश सेवा करनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि इन शहीदों की शहादत के 87 साल बाद भी देश की हालत पहले जैसी ही है। देश को गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार ने जकड़ा हुआ है। इनको जड़ से मिटाना होगा। इस आयोजन में क्षेत्र के रामलाल ग्रोवर, इंद्रजीत अबरोल, सतपाल अदलखा, सुभाष खत्री, अनिल जैन, सुभाष गांधी सहित गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए।

शहीदी दिवस पर तावडू में निकाला गया मशाल जुलूस

तावडू| ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन व छात्र संगठन ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन की तावडू इकाई के नेतृत्व में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के 87वें शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर मशाल जुलूस निकाला गया। युवाओं में भारी उत्साह देखने को मिला। जिलाध्यक्ष बृज मोहन ने जुलूस से पूर्व कहा कि शहीद भगत सिंह व उनके संगठन ने शोषण विहीन समाज बनाने का जो सपना देखा था। इसलिए इन क्रांतिकारियों के विचारों को जन-जन तक ले जाने की जरूरत है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारी भगत सिंह उनके साथियों राजगुरु व सुखदेव को आज ही के दिन 1931 में फांसी दी गई थी। 18 सितंबर 1907 में जन्मे भगत सिंह मात्र 12 साल के थे। जब जलियावाला बाग कांड हुआ, जिसने उनके मन में अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा भर दिया।

दो मिनट मौन रखकर शहीदों को याद किया

फिरोजपुर झिरका| शुक्रवार के दिन को लोगों ने शहीदी दिवस के रूप में मनाया। लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। नगीना के कवि मोहम्मद इलयास प्रधान ने कहा कि आज लोग शहीदी दिवस को भूल गए हैं और तो और युवाओं को शहीदी दिवस का मतलब तक पता नहीं है। हमारे वीर सपूतों ने अंग्रेजों से खूब लोहा लिया और हंसते हंसते सूली पर चढ़ गए। मेवात के भी हजारों शहीदों ने अपनी कुर्बानी दी है, जिनमें हसन खां मेवाती, शमसुद्दीन, अनिया, करीमखां, सदरूदीन, बदरूदीन, सहित मांडीखेडा में 109 लोगों ने अपनी कुर्बानी दी थी, जिनको आज याद किया जाता है। आज के दिन हरियाणा सरकार का राजकीय अवकाश भी घोषित है। उन्होंने बताया कि जिन शहीदों ने अपनी जान की कुर्बानी देकर हमें आजादी दिलाई है, उनको आज याद कर हमें श्रद्धांजलि देने की जरूरत है।

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