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पुराने शहर में 15 दिन से ठप थी जलापूर्ति गुस्साए लोगों का बूस्टिंग स्टेशन पर हंगामा

गर्मी शुरू होते ही पुराने शहर में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। पुराने शहर में न्यू कॉलोनी, कृष्णा कॉलोनी,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 27, 2018, 02:05 AM IST

पुराने शहर में 15 दिन से ठप थी जलापूर्ति गुस्साए लोगों का बूस्टिंग स्टेशन पर हंगामा
गर्मी शुरू होते ही पुराने शहर में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। पुराने शहर में न्यू कॉलोनी, कृष्णा कॉलोनी, ज्योतिपार्क, सेक्टर-4, सेक्टर-7, 7 एक्सटेंशन, मदनपुरी, बलदेव नगर, शिवपुरी, रतन गार्डन, दयानंद कालोनी, राम नगर कॉलोनी में बीते दो सप्ताह से पानी की किल्लत बनी हुई है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं किए जाने पर मंगलवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने गुरुवार की सुबह 10 बजे न्यू कॉलोनी बूस्टिंग स्टेशन पर पहुंचकर प्रदर्शन किया।

गुस्साए लोगों ने बूस्टिंग स्टेशन को घेर लिया और नगर निगम व जीएमडीए अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। एक साथ 200 से अधिक लोगों को देखकर निगम कर्मियों में खलबली मच गई। कर्मचारी भाग खड़े हुए। इसकी सूचना एसडीओ को दी गई। एसडीओ ने चीफ इंजीनियर को सूचित किया। स्थिति की गंभीरता को एनडी वशिष्ठ मौके पर पहुंचे। लोगों ने चीफ इंजीनियर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों ने आरोप लगाया कि गुड़गांव में जीएमडीए गठित किए जाने के बाद स्थिति और भी खराब हो गई है। शहर में जलापूर्ति की जिम्मेवारी दो विभागों में बंट गई है। दोनों विभागों में आपसी तालमेल नहीं होने का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हालत इतनी गंभीर हो गई है कि टैंकरों से भी पानी नहीं मिल रहे हैं। टैंकरों से पानी लेने के लिए बूस्टिंग स्टेशन पर सुबह छह बजे से लाइन लग रही है। लोगों ने निगम अधिकारियों पर पानी की कालाबाजारी का आरोप लगाया। मौके पर पहुंचे तिलकराज ने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत और टैंकर माफियाओं के माध्यम से पानी की कालाबाजारी हो रही है। बीते दस दिनों से लोग पानी के लिए तरस गए हैं। काफी हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे चीफ इंजीनियर एनडी वशिष्ठ ने जलापूर्ति की समस्या जल्द दूर कराने का लोगों को अश्वासन दिया। काफी समझाने-बुझाने के बाद लोग शांत हुए।

लोगों का आरोप- टैंकर से भी नहीं मिल पा रहा है पानी

गुड़गांव. न्यू कॉलोनी में बूस्टर पर पानी की समस्या को लेकर अधिकारी से ज्ञापन देते लोग।

जीएमडीए और निगम के बीच झूल रहे लोग

नई व्यवस्था के तहत बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन की जिम्मेवारी जीएमडीए ने ले ली है। जीएमडीए नगर निगम को पानी देता है, जिसके लिए नगर निगम द्वारा जीएमडीए को भुगतान किया जाता है। दूसरी तरफ, उपभोक्ताओं तक पानी पहुंचाने की जिम्मेवारी नगर निगम की है। इसके लिए नगर निगम द्वारा उपभोक्ताओं से कीमत वसूला जाता है। मगर, इस तरह से दो विभागों में बंटवारे का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। दोनों विभागों में आपसी तालमेल नहीं है। इस व्यवस्था में पानी की कालाबाजारी की संभावना बढ़ गई है।

80 गांवों में पानी सप्लाई को 263 करोड़ की योजना

वहीं दूसरी ओर नूंह जिले में पेयजल संकट को दूर करने के लिए फिरोजपुर-झिरका व नगीना खंड के 80 गांवों को 263 करोड़ रुपए खर्च कर पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश सरकार की मेवात के पेयजल संकट को स्थायी रूप से दूर करने की ये सबसे महत्वपूर्ण योजना है। नगीना और फिरोजपुर-झिरका खंड के गांवों में सबसे ज्यादा पेयजल संकट है। खंडों के गांवों में पानी मिलना किसी सौगात से कम नहीं है। योजना के तहत यमुना से 70 किलो मीटर लाइन बिछाकर पाठ खोयरी, बोलोंदा, पाटन उदयपुरी, धाडोली, फिरोजपुर शहर तथा संथावादी नांगल, गुमट, खोयरी, जेताका, अकलीमपुर, करहड़ा, उलेटा, करहड़ी, रजाका, खानपुर महू, जलालपुर आदि गांवों में पानी पहुंचाया जाएगा। जन स्वास्थ्य अधीक्षण अभियंता फैसल इब्राहिम ने बताया कि योजना पर काम शुरू करने के लिए 263 करोड़ रुपए विभाग को मिल चुके हैं। टेंडर प्रक्रिया जारी है।

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