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मन के हाथों मजबूर होकर मनुष्य को उद्देश्य से भटकने से रोकता है गुरु ज्ञान: कंवर साहेब

कंवर साहेब महाराज ने कहा कि गुरु को सच्चे मन से अपना लिया तो आपका कल्याण निश्चित है। भक्ति के लिए गुरु ज्ञान विवेक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 26, 2018, 02:55 AM IST

मन के हाथों मजबूर होकर मनुष्य को उद्देश्य से भटकने से रोकता है गुरु ज्ञान: कंवर साहेब
कंवर साहेब महाराज ने कहा कि गुरु को सच्चे मन से अपना लिया तो आपका कल्याण निश्चित है। भक्ति के लिए गुरु ज्ञान विवेक जरूरी है कंवर महाराज रविवार को दिनोद आश्रम में साध संगत को प्रवचन कर रहे थे। महाराज ने कहा कि सत्संग का हर वचन जीव के लिए हितकारी है लेकिन भक्ति और सत्संग की ओर चलने वाले जीव को मन विचलित करता है। मन अलग-अलग तरीके से भटकाव पैदा करता है और ये भटकाव हमें अपने उद्देश्य से दूर कर देता है।

मनुष्य को अपने सत्य के रास्ते अडिग रहना है और भटकाव पैदा करने वालों के बहकावे में नहीं आना है। संत का एक वचन आपके जीवन को पलट सकता है। गुरु महाराज ने फरमाया कि जिस जीव के कर्म अच्छे होते हैं उन के लिए संत मिलन का बहाना भी अपने आप बन जाता है, लेकिन जीव एहसान फरामोश होता है। जब तक गरज मर्ज है तब तक सामने वाला सही है और जब मतलब निकल जाता है तो लोग मुंह फेर लेते हैं। परमात्मा प्रेम से मिलता है। वो हमारे सांस सांस में है। हमारी सोच में है। अगर सोच गलत है तो परमात्मा भी कहीं नही है। परमात्मा को पाने के लिए ना कही पर जाना है और ना कहीं से आना है। वो निर्विकार तो सब के बीच समाया है। गुरु महाराज ने कहा कि सबसे पहले इंसान को स्वयं के सुधार की जरूरत है। मन मे पाप बुराई विषय विकार भरे हैं तो सत्संग में क्या मुंह लेकर जाते हो।भक्ति के मूल हैं दया धर्म और उपकार।यदि ये आपके अंदर नही हैं तो भक्ति नही कमा सकते। आज हम देखते हैं कि घरों व मन में शांति नही है। लालच में भाई-भाई को मार रहा है। बच्चे संस्कारहीन हो गए हैं। इसलिए सत्संग आवश्यक हो गया है। जिस व्यक्ति का ये जगत अच्छा होगा उसी का अगत भी अच्छा होगा।

सत्संग आपके जगत को बनाता है व वक्त के हिसाब से हर चीज को बदलना पड़ता है, बदलाव हितकारी है तो कर लेना चाहिए। महाराज ने कहा कि हैरानी की बात है कि सब रोगों की एक दवाई है नाम फिर भी लोग उसकी तरफ नही चलते। रोगों का रोना रोते रहते है लेकिन उनसे छुटकारा पाने की दवाई नही लेते। भक्ति करनी की चीज है। नाम का सुमिरन करो, जितना करोगे उतना पाओगे।

राधा स्वामी सत्संग भवन में श्रद्धालुओं को प्रवचन देते संत हुजूर कंवर साहेब महाराज।

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