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दृष्टिहीन विद्यार्थियों के लिए तैयार किया नया सॉफ्टवेयर

दृष्टिहीन छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है। नेत्रहीन छात्र कंप्यूटर पर पढ़ाई के दौरान टैक्सट मैसेज अंग्रेजी भाषा...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:35 AM IST
दृष्टिहीन छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है। नेत्रहीन छात्र कंप्यूटर पर पढ़ाई के दौरान टैक्सट मैसेज अंग्रेजी भाषा के भारतीय उच्चारण में सुन सकेंगे। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल की छात्रा ने इस पर शोध किया है और वह सफल रहा है।

इसलिए किया यह प्रयास : डीसीआरयूएसटी, मुरथल की छात्रा मुक्ता ने ये देखा कि दृष्टिहीन विद्यार्थियों को कंप्यूटर पर पढ़ाई करते समय मे बाधा आ रही है। उन्हें कंप्यूटर पर पढ़ाई के दौरान अंग्रेजी का अमेरिकन व ब्रिटिश उच्चारण सुनने को मिलता था। अमेरिकन व ब्रिटिश उच्चारण भारतीय उच्चारण की अपेक्षा तीव्र गति से होता है। कई बार विद्यार्थियों को उसका अर्थ समझ में नहीं आ पाता था। अर्थ को समझने के लिए बार बार टैक्सट को रिपीट करना पड़ता था। इसके बाद मुक्ता को नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए कार्य करने में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा। मुख्य समस्या तो यह थी कि इसको धरातल पर कैसे लाया जाए। इस विषय के भावनात्मक व थ्री डी रूपांतर पर कुछ ही पाठ्य सामग्री उपलब्ध थी। मुक्ता ने 4 वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद मेथडोलॉजी (कार्यप्रणाली)बनाई। उसके बाद अपना डाटाबेस बनाया। अंत में मुक्ता इस मुकाम पर पहुंची कि नेत्रहीन विद्यार्थी अंग्रेजी के भारतीय उच्चारण में कंप्यूटर पर पढ़ाई कर सकेंगे।

क्या कहती हैं शोधार्थी की गाइड

डीसीआरयूएसटी, मुरथल में एसोसिएट प्रोफेसर डा.अमिता मलिक ने कहा कि उनकी शोध छात्रा मुक्ता ने इस क्षेत्र में विशिष्ट शोध करके भारतीय अंग्रेजी भाषा के टैक्सट मैसेज को दृष्टिहीनों तक पहुंचाने नया काम किया है। इस शोध से हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं के टैक्सट मैसेज के शोध को ईजाद करने में बहुत मद्द मिलेगी। दृष्टिहीनों के लिए वे हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं में शोध कराने के लिए तैयार हैं। ताकि समाज के विभिन्न वर्गों नेत्रहीन, मुक विद्यार्थियों को लाभ मिल सके।

क्या कहते हैं कुलपति प्रो. अनायत : डीसीआरयूएसटी के कुलपति प्रो. अनायत कहते हैं कि विश्वविद्यालय का कार्य ज्ञान पैदा करने के साथ साथ समाज के लिए कल्याणकारी शोध करना भी होता है। आम आदमी के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का कार्य शोध के माध्यम से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास होगा कि आगे कोई विद्यार्थी इस शोध को हिंदी व क्षेत्रीय भाषा में करें ताकि गांव में बसने वाले विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।