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7 राज्यों के 36 विद्वानों ने एकमत में कहा- विज्ञान आधारित नागरी लिपि भारत की सर्वोच्च उपलब्धि

नागरी विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है- यह निष्कर्ष मनुमुक्त मानव भवन में सोमवार दोपहर आयोजित अंतरराष्ट्रीय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:35 AM IST

7 राज्यों के 36 विद्वानों ने एकमत में कहा- विज्ञान आधारित नागरी लिपि भारत की सर्वोच्च उपलब्धि
नागरी विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है- यह निष्कर्ष मनुमुक्त मानव भवन में सोमवार दोपहर आयोजित अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि सम्मेलन में निकाला गया। इसमें हिन्दी के अनेक विद्वानों ने अपने विचार रखे। नागरी लिपि परिषद नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. परमानंद पांचाल की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में सिंघानिया विश्वविद्यालय पचेरी बड़ी के कुलपति डॉ. उमाशंकर यादव के मुख्य अतिथि थे।

इस सम्मेलन में बांग्लादेश के एक, नेपाल के 3 विद्वानों के अतिरिक्त भारत के 7 राज्यों के 3 दर्जन विद्वानों ने सहभागिता की। ढाका बांग्लादेश से आए डॉ. योगेश वशिष्ठ ने नागरी लिपि को भारत की सर्वोच्च उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसकी वैज्ञानिकता अक्षरों की बनावट तथा सार्थकता सभी को अभिभूत कर लेती है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चमोला ने कहा कि देवनागरी का मूल स्रोत ब्राह्मी लिपि है तथा यह बहुत समृद्ध लिपि है। कंचनपुर नेपाल से पधारे लक्ष्मीदत्त भट्ट ने नागरी को अंतरराष्ट्रीय लिपि बताते हुए बताया कि नेपाल की राजभाषा नेपाली और द्वितीय भाषा राजभाषा मैथिली दोनों की लिपि देवनागरी है। खटीमा उत्तराखंड के सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त डॉ. राज किशोर सक्सेना ने नागरिक को विश्व की सर्वाधिक संपन्न और शास्त्रीय लिपि बताया, वही भीलवाड़ा राजस्थान से पधारे बाल वाटिका पत्रिका के संपादक भैरूलाल गर्ग ने कहा कि टंकण, मुद्रण और लेखन तीनों ही दृष्टियों से देवनागरी की वैज्ञानिकता इसकी लोकप्रियता और सर्व स्वीकार्यता का मूल आधार है। कलाडी केरल के डॉ एच बालासुब्रमण्यम ने कहा कि भाषाई सामंजस्य और राष्ट्रीय एकता के लिए लिपि की एकरूपता अत्यंत आवश्यक है। आरआरबीएम यूनिवर्सिटी अलवर के रजिस्ट्रार डॉ. अनूप सिंह ने कहा कि देवनागरी विश्व की एकमात्र ऐसी लिपि है, जिसके लिखित और उच्चारित रूप में कोई अंतर नहीं है।

मनुमुक्त भवन में सोमवार दोपहर को आयोजित किया गया अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि सम्मेलन, कई दिग्गजों ने लिया भाग

नारनौल. मनमुक्त मानव भवन में आयोजित संगोष्ठी में भाग लेते अतिथि।

लिपि के सभी दोषों से मुक्त है देवनागरी: यादव

मुख्य अतिथि डॉ. उमाशंकर यादव ने कहा कि देवनागरी लिपि के सभी दोषों से मुक्त है। डॉ. परमानंद पांचाल देवनागरी को राष्ट्रीय एकता का सूत्र बताते हुए इसकी मजबूती पर बल दिया तथा कहा कि भारत की लिपि विभिन्न भाषाओं और बोलियों के लिए देवनागरी सर्वोत्तम लिपि सिद्ध हो सकती है। नागरी लिपि परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल ने कहा कि देश की राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दृष्टि से हिंदी को संपर्क भाषा तथा देवनागरी को संपर्क लिपि बनाना आवश्यक है। सम्मेलन को चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव के अतिरिक्त भीमदत्त नेपाल के गोविंद सिंह बिष्ट, महेंद्र नगर के रामचंद्र नेपाल, नोएडा उत्तर प्रदेश के संतोष कुमार शर्मा, खेतड़ी राजस्थान के डॉ. आनंद, रायपुर छत्तीसगढ़ के डॉ. सत्यनारायण सत्य, जयपुर राजस्थान के हरिश्चंद्र, कोसली की डॉ. लाज कौशल आदि विद्वानों ने भी संबोधित किया। अलवर के संजय पाठक बाबा कानपुरी ने काव्य पाठ भी किया।

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