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नैतिक शिक्षा से ही बच्चों को दिए जा सकते हैं अच्छे संस्कार

Narnaul News - हुडा सेक्टर-1 पार्ट 2 स्थित मनुमुक्त भवन में बाल साहित्य और नैतिकता विषय पर केंद्रित इंडो-नेपाल बाल साहित्य...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:35 AM IST
नैतिक शिक्षा से ही बच्चों को दिए जा सकते हैं अच्छे संस्कार
हुडा सेक्टर-1 पार्ट 2 स्थित मनुमुक्त भवन में बाल साहित्य और नैतिकता विषय पर केंद्रित इंडो-नेपाल बाल साहित्य सम्मेलन रविवार को दो सत्रों में संपन्न हुआ। हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के उपाध्यक्ष डॉ. श्रेयांश द्विवेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित बाल साहित्य विमर्श सत्र की अध्यक्षता खटीमा उत्तराखंड से पधारे पूर्व सहायक आयुक्त डॉ. राज किशोर सक्सेना ने की।

इस सत्र में उत्तराखंड संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चमोला, संगरिया राजस्थान के वरिष्ठ बाल साहित्यकार गोविंद शर्मा, रायपुर राजस्थान के डॉ. सत्यनारायण सत्य, गुड़गांव हरियाणा के घमंडी लाल अग्रवाल, पूर्व प्राचार्य डॉ शिवताज सिंह, जिला बाल कल्याण अधिकारी विपिन शर्मा, महेंद्रनगर नेपाल के रामचंद्र नेपाल, सीतापुर उत्तर प्रदेश के डॉ. शैलेन्द्र सिंह तथा कंचनपुर नेपाल के ही लक्ष्मीदत्त भट्ट आदि विद्वानों और बाल साहित्यकारों ने बाल साहित्य में नैतिकता के महत्व और नैतिक शिक्षा की आवश्यकता पर विस्तृत विचार विमर्श किया। यह निष्कर्ष बार बार उभरकर सामने आया कि नैतिक शिक्षा से ही बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जा सकते हैं। अत: नैतिक शिक्षा के बिना बाल साहित्य अधूरा और अप्रासंगिक है। भीलवाड़ा राजस्थान से प्रकाशित बाल वाटिका पत्रिका के संपादक डॉ. भैरूलाल गर्ग की अध्यक्षता तथा डॉ. श्रेयांश द्विवेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित द्वितीय सत्र में भीम दत्त नगर नेपाल के पूर्व प्राचार्य गोविंद सिंह बिष्ट, आरआर बीएम विश्वविद्यालय अलवर राजस्थान के कुलसचिव डॉ. अनूप सिंह, जिला बाल कल्याण परिषद की चेयर पर्सन मंजू कौशिक, नीति आयोग भारत सरकार की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य घमंडी लाल अग्रवाल, हरियाणा स्कूली पाठ्यक्रम समिति के सदस्य डॉ. पंकज गौड़ आदि विद्वानों ने बाल साहित्य के स्वरूप स्थिति और महत्व पर प्रकाश डालते हुए उसमें नैतिकता के महत्व को प्रतिपादित किया। निष्कर्ष रूप में संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. श्रेयांश द्विवेदी ने कहा कि अपसंस्कृति के कारण बच्चों में आ रही विकृतियां चिंताजनक है तथा इन्हें नैतिक शिक्षा द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है।

हुडा सेक्टर के इंडो-नेपाल बाल साहित्य सम्मेलन के निष्कर्ष में आया सामने, हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के उपाध्यक्ष रहे मुख्य अतिथि, बोले-

नारनौल. मनुमुक्त भवन में आयोजित सम्मेलन में बाल साहित्य में नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डालते मुख्यातिथि डाॅ. श्रेयांश द्विवेदी।

डॉटर ऑफ महेंद्रगढ़ का किया प्रदर्शन

महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा निर्मित डॉटर ऑफ महेंद्रगढ़ फि‍ल्म का प्रदर्शन भी समारोह में किया गया। इस अवसर पर हिसार के हाइड्रोलॉजिस्ट राकेश कुमार, जनता कॉलेज दादरी के पूर्व प्राचार्य डॉ. आरएन यादव, हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पूर्व उप सचिव दुलीचंद शर्मा, नर नारायण सेवा समिति के अध्यक्ष परमानंद दीवान, पूर्व प्राचार्य गजानंद कौशिक, किशन लाल शर्मा, अलवर के संजय पाठक और प्रेम प्रकाश शर्मा, सरदार बलदेव सिंह चहल, सरदार संतोख सिंह, जय प्रकाश शर्मा, नंदलाल खामपुरा, रामस्वरूप लांबा, अजीत सिंह, सतवीर चौधरी, मुन्नीलाल, रामपत चौहान, ट्रस्टी कांता भारती, अंजू निम्होरिया व सुनीता शर्मा की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

इनको किया सम्मानित; चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव के प्रेरक सानिध्य में संपन्न हुए इस सम्मेलन में बाल वाटिका पत्रिका के नए अंक का विमोचन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया तथा डॉ. भैरू लाल गर्ग, भादरा राजस्थान के प्राचार्य डॉ. भीम सिंह, राज किशोर सक्सेना, डॉ. गोविंद शर्मा, डॉ. दिनेश चमोला, डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, डॉ. छतर सिंह वर्मा, डॉ. पंकज गौड़ और घमंडीलाल अग्रवाल सहित एक दर्जन बाल साहित्यकारों का सम्मान मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा किया गया।

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