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जिले में मातृ मृत्यु दर बढ़ी, अस्पतालों में संसाधन और डॉक्टरों की कमी बन रही कारण

भले ही सरकार द्वारा जच्चा-बच्चा सुरक्षा योजना पर सालाना लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:35 AM IST

भले ही सरकार द्वारा जच्चा-बच्चा सुरक्षा योजना पर सालाना लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में सुविधाओं के अभाव में प्रसूता मृत्यु दर पर रोक नहीं लग पा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 में मातृ मृत्यु दर 80 से बढ़ कर 106 हो गई है। बता दें कि जिला मुख्यालय नारनौल तीन ओर से राजस्थान से घिरा हुआ है। इसके चलते जिला अस्पताल में जिला महेंद्रगढ़ के अलावा राजस्थान के साथ लगने गांवों की महिलाएं भी डिलिवरी के लिए जिला अस्पताल आती हैं। यही कारण हो कि जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 30 से 35 से डिलिवरी होती हैं।

लेकिन नागरिक अस्पताल में गायनी विभाग में महिला चिकित्सकों की कमी के साथ-साथ संसाधनों का अभाव भी है। गायनी में पर्याप्त चिकित्सक न होने के कारण जच्चा व बच्चा की सही दे देखभाल नहीं हो पाती। जिसकी वजह से यह दर लगातार बढ़ रही है।

जच्चा व बच्चा की देखभाल के लिए नहीं पर्याप्त स्टाफ

गायनी वार्ड में महिला चिकित्सकों के तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक पद लंबे समय से रिक्त चला आ रहा है। नागरिक अस्पताल के गायनी वार्ड में महिला चिकित्सकों की कमी के साथ-साथ संसाधनों का भी टोटा है। ऐसे में रात के समय प्रसव से पूर्व महिला को तत्काल अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ा तो उसे किसी निजी अल्ट्रासाउंड का सहारा लेना पड़ेगा, क्योंकि नागरिक अस्पताल में रात के समय यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती है। रात ही नहीं दिन में भी अगर कोई गर्भवती महिला अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आती है तो उसे 10 से 15 दिन बाद का समय दिया जाता है। इस प्रकार उस दिन आने वाली महिला को अगले 10-15 दिन बाद अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आना पड़ता हैं। यहीं कारण है कि अगर गर्भवती महिला को डिलीवरी से पूर्व या बाद में कुछ भी परेशानी आ जाती है तो उनका इलाज करने की बजाय रेफर कर दिया जाता है। इस नाजुक हालात में मातृ या शिशु अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते है।

ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं होता है सभी ग्रुप का खून

कहने को तो नागरिक अस्पताल में 24 घंटे ब्लड बैंक खुला रहता है। ताकि किसी मरीज की गंभीर अवस्था होने पर उसे खून उपलब्ध करवाया जा सके। डिलीवरी के दौरान कई बार महिलाओं का रक्त स्राव अधिक हो जाता है। ऐसे में महिला तत्काल खून की जरूरत पड़ती है, परंतु कई बार ब्लड बैंक में उस ब्लड ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं हो पाता है। ऐसे में मरीज के लिए खतरा बन जाता है। वहीं कई बार खून की कमी के चलते उसकी मौत भी हो जाती है।

ऑपरेशन की भी नहीं है सुविधा : गर्भवती महिला की नार्मल डिलीवरी न होने की स्थिति में उसकी सीजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है, लेकिन नागरिक अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी करवाने के लिए कोई भी चिकित्सक नहीं है। ऐसे में नार्मल डिलीवरी न होने की स्थित में अस्पताल चिकित्सक उस महिला को रेफर कर देते है। अगर गर्भवती महिला के परिजन अस्पताल प्रशासन से सीजेरियन डिलीवरी अस्पताल में ही करवाने की डिमांड करते है तो अस्पताल प्रशासन किसी निजी चिकित्सक को कुछ घंटे के लिए हायर कर लेते है। जिसका अस्पताल प्रशासन द्वारा चिकित्सक को भुगतान किया जाता है।

मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा

वर्ष मातृ मृत्यु दर

2013-14 116

2014-15 124

2015-16 98

2016-17 80

2017-18 106

जिला में शिशु व मातृ मृत्यु दर रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं की सही प्रकार से देखभाल की जाती है। वे स्वयं भी गायनी वार्ड का निरीक्षण करते रहते हैं। - डाॅ. इंद्रजीत धनखड़, सिविल सर्जन, नारनौल।

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Web Title: जिले में मातृ मृत्यु दर बढ़ी, अस्पतालों में संसाधन और डॉक्टरों की कमी बन रही कारण
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