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अर्धसैनिक बलों की 70 साल पुरानी मांग पूरी नारनौल और झज्जर में खुलेगी सरकारी कैंटीन

सेना की तर्ज पर अब अर्ध सैनिक बलों को भी सरकारी कैंटीन की सुविधा मिल सकेगी। गृह मंत्रालय भारत सरकार ने देशभर में 10...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:40 AM IST

अर्धसैनिक बलों की 70 साल पुरानी मांग पूरी नारनौल और झज्जर में खुलेगी सरकारी कैंटीन
सेना की तर्ज पर अब अर्ध सैनिक बलों को भी सरकारी कैंटीन की सुविधा मिल सकेगी। गृह मंत्रालय भारत सरकार ने देशभर में 10 सीपीएस (केंद्रीय पुलिस कैंटीन) खोलने का निर्णय लिया है। इनमें से हरियाणा प्रदेश को 2 कैंटीन मिली हैं। एक महेंद्रगढ़ व दूसरी झज्जर जिले को दी गई है।

महेंद्रगढ़ जिले में यह कैंटीन जिला मुख्यालय नारनौल में खुलेगी। विशेष बात यह है कि जिले के अर्ध सैनिकों को कैंटीन की व्यवस्था, स्थान आदि के चयन में होने वाली देरी की वजह से लंबा इंतजार भी करना है। क्योंकि सीपीसी कैंटीन 2 अप्रैल से सिंघाना पर वहीं शुरू की जा रही है जहां एसोसिएशन बेस पर पहले से कैंटीन चल रही है। सीपीसी कैंटीन चालू होने से जिले के 40 हजार अर्ध सैनिक बलों व उनके परिवारों को सस्ते दामों पर सामान मिलेगा। अर्धसैनिक बलों में बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ व असम राइफल के जवान शामिल हैं। खास बात यह है कि इस सीपीसी कैंटीन का अर्ध सैनिक सेवारत व सेवानिवृत्त जवानों के साथ साथ राज्य पुलिस जवानों को भी इसका लाभ मिलेगा।

अच्छी खबर

पैरामिलिट्री फोर्सेज के 40 हजार जवानों के साथ राज्य पुलिस जवान भी उठा सकेंगे लाभ

स्मार्ट कार्ड बनेंगे

अर्धसैनिक बलों के लिए शुरू होने वाली कैंटीन में समुचित सुविधाएं आर्मी की सीएसडी कैंटीन की तर्ज पर ही होंगी। सभी रजिस्टर्ड अर्ध सैनिक व पूर्व सैनिकों के स्मार्ट कार्ड बनाए जाएंगे। कार्ड बनाने का कार्य 2 अप्रैल से ही आरंभ कर दिया जाएगा। कार्ड बनवाने के लिए भूतपूर्व अर्ध सैनिकों को अपने पीपीओ लैटर व 2 फोटो तथा सेवारत जवानों को अपना आई कार्ड व 2 फोटो लाने होंगे। आरंभ में सामान के लिए कार्ड बनाए जाएंगे। कैंटीन में सभी प्रकार के सस्ते सामान के साथ साथ वाइन भी इश्यू होगी। वाइन के कार्ड बाद में बनाए जाएंगे।

कोई भी ले सकता है सामान

सीपीसी कैंटीन से जिले के अलावा प्रदेश का कोई भी अर्ध सैनिक व राज्य पुलिस का जवान सामान ले सकता है। इसके लिए उनको अपना पहचान पत्र दिखाना होगा। अगर नियमित रूप से सामान लेना हो तो उनको भी स्मार्ट कार्ड बनवाना होगा।

2 अप्रैल को सुबह 9 बजे शुभारंभ

नारनौल कैंटीन इंचार्ज डॉ. कर्ण सिंह का कहना है कि सीपीसी कैंटीन की मांग 70 साल पुरानी है। देश की 10 सीपीसी कैंटीन में से 1 नारनौल को मिलना बहुत बड़ी बात है। अर्ध सैनिकों की सुविधा के लिए पूर्व में सिंघाना रोड पर संचालित कैंटीन को ही सरकारी का दर्जा दिया गया है। 2 अप्रैल को सुबह 9 बजे इसका शुभारंभ होगा।

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