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सद्भावना के अग्रणी संत रविदास के विचार आज भी प्रासंगिक

संत शिरोमणि गुरु रविदास की 641वीं जयंती बुधवार को जिले भर में हर्षोल्लासपूर्वक मनाई गई। इस मौके पर विभिन्न संगठनों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:40 AM IST

संत शिरोमणि गुरु रविदास की 641वीं जयंती बुधवार को जिले भर में हर्षोल्लासपूर्वक मनाई गई। इस मौके पर विभिन्न संगठनों एवं स्कूलों में अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन कर संत रविदास के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

इस अवसर पर शहर के मोहल्ला चौधरीयान स्थित हरियाणा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विद्यालय चेयरमैन हितेन्द्र शर्मा व निदेशिका संगीता शर्मा ने संत शिरोमणि गुरू रविदास के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस मौके पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संत रविदास भक्ति काल के महान संत , समाज सुधारक, महान दर्शनशास्त्री, महान कवि, ईश्वर भक्त, सामाजिक सद्भावना के अग्रदूत थे। उनके द्वारा प्रस्तुत दोहे आज भी लोगों के मार्गदर्शन का कार्य कर रहे हैं। ये कबीर के समकालीन थे। संत रविदास की ख्याति से प्रभावित होकर सिकन्दर लोदी ने इन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा। संत रविदास को मूर्ति पूजा, तीर्थयात्रा जैसे दिखावों में बिल्कुल विश्वास नहीं था। वह व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं व आपसी भाईचारे को ही सच्चा धर्म मानते थे, इसलिए उन्होंने लोगों को आजीवन इन दिखावे से दूर रहकर आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। मुस्कान गर्ग, गुनगुन और तमन्ना ने छात्र-छात्राओं के बीच गुरू रविदास की जीवनी पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर प्राचार्य संजय कुमार ने भी बताया कि हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ माह की पूर्णिमा के दिन गुरू रविदास जयंती मनाई जाती है। गुरू रविदास ने शां‍ति और भाईचारे का संदेश दिया। इस मौके पर रामनिवास डीपीई, अशोक यादव, अवनीश कुमार, अशोक कुमार, रजत यादव, राहुल सोनी, विशाल कुमार, लक्ष्मी चौहान, वंदना सैनी, शिखा, नेहा सोनी, निर्मला आदि समस्त अध्यापकगण व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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