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जड़ गलन की बीमारी की रोकथाम के उपाय बताए

Dainik Bhaskar

May 25, 2018, 03:35 AM IST

Nijampur News - ग्वार की फसल में जड़ गलन की बीमारी की रोकथाम के लिए गुरुवार निजामपुर खंड के गांव छिलरो व रोपड़ सराय में किसान...

जड़ गलन की बीमारी की रोकथाम के उपाय बताए
ग्वार की फसल में जड़ गलन की बीमारी की रोकथाम के लिए गुरुवार निजामपुर खंड के गांव छिलरो व रोपड़ सराय में किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें नांगल चौधरी कृषि विकास अधिकारी डॉ. सतीश यादव ने किसानों बीज उपचार तथा ग्वार की पैदावार बढ़ाने की तकनीक के बारे में प्रेरित करते हुए सलाह दी कि बिजाई से पहले किसान अपने खेतों की मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं। डॉ सतीश ने किसान बीमा योजना के प्रति जागरूक तथा इसके फायदे के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को यह सलाह भी दी कि अपने खेतों में गोबर की तैयार खाद अवश्य डालें। इससे खेत की उर्वरक शक्ति भी बनी रहेगी।

ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने कहा कि नांगल चौधरी क्षेत्र में उखेड़ा बीमारी हर साल बढ़ती जा रही है। उन्होंने किसानों को बताया कि जडग़लन रोग के फंगस जमीन में पनपती है जिसके प्रकोप से जड़ें काली पड़ जाती हैं, जिससे पौधे आवश्यक पोषक तत्व नहीं ले पाते तथा पौधे पीले होकर और मुरझाकर मरने लगते हैं। इस बीमारी के शुरूआती लक्षण पत्तों पर पीलापन दिखाई देना तथा पौधों का मुरझाना। ऐसे पौधों को जब उखाड़कर देखते हैं तो उनकी जड़ें काली मिलती है। इस बीमारी का बीज उपचार ही एक मात्र इलाज है। ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को बताया कि उखेड़ा बीमारी के लिए कोई भी स्प्रे न करें। इस बीमारी की रोकथाम के लिए 3 ग्राम कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत सूखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करें। बीज उपचार से पहले सूखे बीज पर कोई भी पानी का छींटा न मारे। इससे इस दवाई का असर कम हो जाता है। इस बीमारी के लिए मात्र 15 रुपए बीज उपचार पर प्रति एकड़ खर्चा आता है। बीज उपचार करने से 80 से 95 प्रतिशत तक उखेड़ा बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। इससे पैदावार में करीबन एक क्विंटल प्रति एकड़ बढ़ोतरी होती है।

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