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रेलवे बोर्ड के चीफ ने किया रेल फ्रेट कॉरीडोर का निरीक्षण, वर्ष 2019 तक चालू हो जाएगा कॉरीडोर

भारतीय रेलवे बोर्ड दिल्ली के चीफ शनिवार को डेडिकेटिड रेल फ्रेट कॉरीडोर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने...

Danik Bhaskar | May 27, 2018, 04:15 AM IST
भारतीय रेलवे बोर्ड दिल्ली के चीफ शनिवार को डेडिकेटिड रेल फ्रेट कॉरीडोर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कॉरिडोर की लाइनों के साथ-साथ बिजली लाइन के फाउंडेशन स्लीपर व फाउंडेशन के दूसरे कार्यों का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया तथा मातहत अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

जानकारी के अनुसार रेलवे बोर्ड के चीफ अश्वनी लोहानी शनिवार को रेलवे कार में सवार होकर दिल्ली से चलकर 9:50 बजे रेवाड़ी पहुंचे। रेवाड़ी से चलकर 10.5 बजे काठूवास पहुंचे। यहां उन्होंने रेलवे कार से उतर कर लाइनों तथा कंटेनर डिपो का निरीक्षण किया। इसके बाद वे निजामपुर होते हुए न्यू डाबला रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। यहां उन्होंने कॉरिडोर के लिए लगाए जाने वाले इलेक्ट्रिक पोल फाउंडेशन की चेकिंग की। साथ ही इस फाउंडेशन में लगने वाले स्लीपरों की भी क्वालिटी व क्वांटिटी चेक की। इसके बाद वे श्रीमाधोपुर फुलेरा स्टेशनों के लिए रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि यह रेलवे लाइन बनने के बाद भारतीय रेल फाउंडेशन को एक नया आयाम मिलेगा। 28 सौ किलोमीटर लंबा बनने वाला यह कॉरिडोर जवाहरलाल नेहरु टर्मिनल मुंबई से दादरी दिल्ली को जोड़ेगा। इस फाउंडेशन को 2006 में मंजूरी मिली थी। इसका कार्य 1 सितंबर 2017 में शुरू हुआ था। पहले चरण में दादरी से जवाहरलाल नेहरु टर्मिनल मुंबई तक फाउंडेशन बनकर तैयार है। जिसकी लंबाई 1483 किलोमीटर के लगभग है। रिवाडी से जवाहरलाल नेहरु टर्मिनल मुंबई से यह फ्रंट कॉरिडोर फ्लेक्स बोर्ड पर है। इस फ्रंट कॉरिडोर के लिए 11180 एकड़ भूमि 8 राज्यों से लेनी थी, लेकिन अभी तक 5 हजार एकड़ भूमि ही इस फ्रंट कॉरिडोर के लिए ली गई है। 6 हजार एकड़ के लगभग भूमि नोटिफिकेशन की हुई है। उन्होंने बताया कि इस कॉरीडोर के साथ साथ लुधियाना और कोलकाता कॉरीडोर का कार्य भी चल रहा है। ये दोनों कॉरीडोर भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा बनाया जा रहा है। ये दोनों कॉरिडोर को बनने बाद 2024 तक इस कॉरिडोर को इंटरनेशनल लेवल पर ओमान सऊदी अरब अमीरात देशों को भी इस फाउंडेशन से जोड़ा जाएगा। इनके बन जाने के बाद रेल यातायात में आने वाली बाधाएं दूर होंगी। इसमें समय और पैसे की बचत होगी। विदेशों से आयात निर्यात के लिए विदेशों के लिए आयात निर्यात के लिए आने वाले माल को भारतीय रेलवे अपने समय पर पूरे देश में पहुंचाने में आसानी होगी। यह फ्रंट कॉरिडोर पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगा। जिससे प्रदूषण व ध्वनि मुक्त होने के कारण इस रेलवे से किसी को परेशानी नहीं होगी। इसके लिए निश्चित जगह पर रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं। उन्हीं स्टेशनों पर इनके माल की लोडिंग अनलोडिंग होगी।

निजामपुर. डेडिकेटिड रेलफ्रंट कॉरिडोर का निरिक्षण करते रेलवे बोर्ड के चीफ।