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ई-वे बिल से अभी राहत, कारोबारियों के 30 लाख नुकसान का क्या होगा

ई-वे बिल की वजह से पूरे जिले में 500 से ज्यादा इंडस्ट्रियलिस्ट्स का 30 लाख से ज्यादा का हुआ नुकसान हुआ है। उद्यमियों व...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:05 AM IST

ई-वे बिल की वजह से पूरे जिले में 500 से ज्यादा इंडस्ट्रियलिस्ट्स का 30 लाख से ज्यादा का हुआ नुकसान हुआ है। उद्यमियों व व्यापारियों ने वीरवार को ई-वे बिल निकालना शुरू किया तो वेबसाइट ठप हो गई। न रजिस्ट्रेशन हुआ और न ई-वे बिल निकला। आम बजट देखने के बजाय कारोबारी पूरा दिन ई-वे बिल निकालने में ही माथा पच्ची करते रहे। हालांकि इंडस्ट्रियलिस्ट्स ने रात को तब राहत की सांस ली, ट्रायल की समय-सीमा और बढ़ा दी। कारोबारियों का कहना है कि जो नुकसान हुआ, उसका क्या होगा। व्यापारियों व कारोबारियों की मानें तो जीएसटी काउंसिल के इस सिस्टम की वजह से एक दिन में 30 लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ। इसमें पूरे दिन लेबर कॉस्ट, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट, मैनपावर कॉस्ट सहित अन्य लॉस शामिल हैं। वहीं, कई जगह पर कारोबारियों व व्यापारियों द्वारा बिल तैयार नहीं होने की वजह से उन्होंने अपना कस्टमर खोया है।

सुबह 6 बजे ही आई थी दिक्कत: वीरवार को पूरा दिन जिले में 100 से ज्यादा लोडेड ट्रक कंपनियों व दुकानों के सामने खड़े रहे, जिन्हें शुक्रवार की सुबह सामान डिलीवरी के लिए भेजा गया। जीएसटी काउंसिल ने वीरवार एक फरवरी से शुरू किए गए ई-वे बिल सिस्टम शुरू किया था। सुबह 10 बजे करीब दो घंटे तक ई-वे बिल तो जेनरेट हुआ, लेकिन उसके बाद से लेकर शाम तक ई-वे बिल की साइट क्रैश हो गई। इसके वजह से बिल जेनरेट नहीं हो पाया और बिना बिलिंग के लोडेट ट्रकों को व्यापारी व कारोबारी एक जगह से दूसरी जगह नहीं भेज पाए।

शिकायत भी दी थी: कारोबारियों व व्यापारियों ने अपनी परेशानी को लेकर शिकायत दी थी। ईटीओ सेल्स दलबीर मलिक ने बताया कि जिले के विभिन्न ट्रैडर्स की ओर से काफी शिकायतें आई थीं कि ई-वे बिल पोर्टल नहीं चल रहा है। बिल नहीं तैयार होने की वजह से उनका सामान वीरवार को डिलीवर नहीं हो पाया। ट्रेडर्स की शिकायत की जानकारी लिखित तौर पर विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजी गई।

ई-वे बिल सिस्टम के पहले दिन की शुरुआत में ही ऑनलाइन साइट पूरे दिन क्रैश रही

सरकार की ओर से ई-वे बिल की शुरुआत गलत बिलिंग जेनरेट करने व टैक्स की चोरी को रोकने के लिए की गई थी। इसके तहत 50 हजार रुपए से ज्यादा लेन-देन पर ई-वे बिल के माध्यम से ऑनलाइन बिलिंग करनी थी। इसके लिए जीएसटी काउंसिल की ओर से अलग से पोर्ट बनाया गया था। पंचकूला व्यापार प्रकोष्ठ के प्रधान रोहित सेन ने बताया कि पोर्टल को शुरू करने से पहले जीएसटी काउंसिल की ओर से सेमिनार आयोजित किया गया था, जिसमें जीएसटी काउंसिल के मेंबर्स ने इस पोर्टल की वजह से किसी तरह की परेशानी नहीं होने का दावा किया गया था। लेकिन ई-वे बिल सिस्टम के पहले दिन की शुरुआत में ही ऑनलाइन साइट पूरे दिन क्रैश रही और व्यापारी-कारोबारियों को लाखों रुपए का घाटा हुआ।

बिलिंग में हुई परेशानी

पंचकूला व्यापार प्रकोष्ठ के प्रधान रोहित सेन ने बताया कि जिस तरह जीएसटी के पहले दिन से ही रिटर्न फाइल करने में परेशानी हुई थी, ठीक उसी तरह ई-वे-बिल सिस्टम के तहत बिलिंग में परेशानी हुई। अच्छी बात ये रही कि पहले ही दिन देर रात सरकार की ओर से विद ड्रॉ कर लिया गया नहीं तो दूसरे दिन पंचकूला क्या पूरे देशभर में कारोबारियों और व्यापारियों का करोड़ों का नुकसान होना था।

कई को ट्रक अनलोड करने पड़े

इंडस्ट्रियलिस्ट श्रवण गर्ग ने बताया कि हमने सेल्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों से भी इस मामले में बात की लेकिन उनकी ओर से भी कोई संतुष्टजनक जवाब नहीं मिल पा रहा था। कई कारोबारियों व व्यापारियों को लोडेड ट्रक को अनलोड करना पड़ा। सरकार को चाहिए कि इस सिस्टम को अगर भविष्य में शुरू करे तो उसे इस तरह डिजाइन करे कि व्यापारी व कारोबारी उसकी वजह से परेशान न हों।

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