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राष्ट्रपति के निजी सचिव रहे पिता के मकान पर बहू-बेटे का कब्जा

रवीश कुमार झा | पंचकूला raveesh.jha@dbcorp.in 40 साल की नौकरी कर बेटे को काबिल बनाया और रिटायरमेंट के बाद जब घर की जरूरत पड़ी तो...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:20 AM IST
रवीश कुमार झा | पंचकूला raveesh.jha@dbcorp.in

40 साल की नौकरी कर बेटे को काबिल बनाया और रिटायरमेंट के बाद जब घर की जरूरत पड़ी तो बेटे-बहू ने घर में रहने देने से मना कर दिया। सीनियर सिटीजन और हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी पंचकूला प्रशासन बुजुर्ग को उनके बहू-बेटे से उनके मकान का कब्जा नहीं दिला पाया।

अप्रैल 2016 में सतबीर सिंह राष्ट्रपति के पूर्व निजी सचिव के पद से रिटायर हुए। उनका छोटा बेटा एयर इंडिया में और छोटी बहू टीचर हैं। बड़ा बेटा सुमित विधानसभा में क्लर्क है, उनकी प|ी हाउस वाइफ हैं और उन्हें एक 8 साल का बेटा है। सतबीर सिंह का कहना है कि 7 साल पहले पंचकूला सेक्टर-24 की हरियाणा विधानसभा ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में मकान बनाया था, ताकि रिटायरमेंट के बाद आराम से रह सकें। रिटायरमेंट के बाद बड़े बेटे और बहू ने मकान पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया। सतबीर सिंह और उनकी प|ी को मजबूरन दिल्ली में ही किराए के मकान में रहना पड़ रहा है। सतबीर सिंह ने बताया कि वह कुछ दिन पहले पंचकूला प्रशासन के अफसरों से मिले थे तो जनवरी में ही मकान खाली करवाने की बात कही थी। 31 जनवरी बीतने को है, लेकिन अभी भी उनके मकान पर बेटे और बहू का कब्जा है।

सीनियर सिटीजन कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जिला प्रशासन नहीं दिला पाया राष्ट्रपति के पूर्व निजी सचिव को उनके ही मकान का कब्जा



1. सतबीर सिंह ने 2015 में ही पंचकूला के डीसीपी को शिकायत दी थी कि मकान में एक बेटे को यह कहकर दिया था कि जब कहूं तक खाली करना होगा। बाकी दो कमरों में कोई कब्जा नहीं करे इसका भी शिकायत में जिक्र किया था।


सतबीर सिंह ने बताया-बड़े बेटे की शादी 10 साल पहले की थी। शादी के कुछ दिन बाद से ही बड़ी बहू-बेटे ने झगड़ा करना शुरू कर दिया। कई बार मैं राष्ट्रपति के साथ टुअर पर होते थे तो बड़ी बहू पीछे से मेरी प|ी के साथ हाथापाई करती थी। 17 मई 2015 में बहू ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि रात 9.30 बजे मुझे अपनी प|ी के साथ घर छोड़कर दोस्त के घर पर जाकर रहना पड़ा। करीब 5 महीने तक दोस्त के घर पर रहा, लेकिन बड़े बेटे व बहू ने एक बार भी खोज खबर लेने की कोशिश तक नहीं की।

2. सीनियर सिटीजन कोर्ट ने सतबीर सिंह के हक में फैसला दिया गया। फैसले में 30 दिन में मकान खाली करवाकर सतबीर सिंह को कब्जा दिलवाने को कहा गया।

3. बेटे ने सीनियर सिटीजन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। लेकिन हाईकोर्ट ने सीनियर सिटीजन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।


सीनियर सिटीजन कोर्ट के फैसले के बाद तहसीलदार को घर खाली करवाने की जिम्मेदारी दी गई है। तहसीलदार वीरेंद्र गिल ने बताया कि मंगलवार को डीसी से ताला लगे हुए घर पर कब्जा लेने को परमिशन मिली है। अब एक हफ्ते का नोटिस दिया जाएगा घर खाली करने के लिए। अगर फिर भी घर खाली नहीं करते तो पुलिस की मदद से ताला तोड़कर घर पर कब्जा लिया जाएगा।


सुमित का कहना है कि पिताजी के नाम पर 4 और मकान हैं और उनके बेटे के हैसियत से क्या मैं इस मकान में नहीं रह सकता हूं। मेरे बच्चे कहां जाएंगे। फिर भी पिता जी चाहते हैं तो तहसीलदार जब कहेंगे मेरे पिताजी आ जाएं मैं उन्हें घर की चाभी थमा दूंगा।

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