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बच्चा मोबाइल का शौकीन तो नहीं बनेंगे न्यूरॉन, ब्रेन पर असर

संदीप कौशिक | पंचकूला sandeep.kaushik@dhrsl.com आपका बच्चा छोटा है या प्ले-वे स्कूल में जा रहा है तो ध्यान रखें कि उसे मोबाइल या...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:15 AM IST

संदीप कौशिक | पंचकूला sandeep.kaushik@dhrsl.com

आपका बच्चा छोटा है या प्ले-वे स्कूल में जा रहा है तो ध्यान रखें कि उसे मोबाइल या टैबलेट से दूर ही रखें। आप ऐसा नहीं कर रहे और उसके रोने पर मोबाइल पकड़ा रहे हैं तो उसके ब्रेन की डेवलपमेंट को रोक रहे हैं। छोटी उम्र में अगर बच्चा मोबाइल, टैबलेट जैसे गैजेट्स का शौकीन हो जाता है तो उसके ब्रेन में डेली बनने वाले न्यूरॉन नहीं बन पाते। इससे उसके ब्रेन की डेवलपमेंट रुक जाती है। छोटे बच्चों के ब्रेन की डेवलपमेंट तभी होती है जब वह छोटी उम्र से ही अलग-अलग एक्सपीरियंस हासिल करता है। इससे उसके ब्रेन में डेली नए न्यूरॉन बनते हैं और पुराने खत्म होते हैं। ब्रेन की डेवलपमेंट तेज होती है। ये सभी बातें एक प्राइवेट हॉस्पिटल में हुई वर्कशॉप में बताई गई। इसमें बच्चों के अलावा स्टूडेंट्स में बढ़ रहे में स्ट्रेस पर भी बात हुई।

गाइडेंस वर्कशॉप

बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से रखें दूर, स्कूल लेवल पर ही काउंसिलिंग सेल बनाना चाहिए

सोशल मीडिया से बनाएं दूरी... साइकोलॉजिस्ट ने बताया कि स्कूल लेवल पर ही मैनेजमेंट को काउंसिलिंग सेल बनाना चाहिए। इसमें बच्चों की काउंसिलिंग की जाए और बच्चों को पेरेंट्स के टच में रहने के लिए भी अवेयर किया जाए। इसके बाद स्टूडेंट्स को कॉलेज लेवल पर करियर गाइडेंस दी जानी चाहिए। पेरेंट्स अपने बच्चों को इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स से दूर रखें। बच्चों के साथ फ्रेंडली रहें और उन्हें कभी भी अकेला मत छोड़ें।

अवसर ज्यादा, गाइडेंस कम, क्लेरिटी ही नहीं करें क्या... साइकोलॉजिस्ट ने बताया कि 80 स्टूडेंट्स और लेक्चरर्स के ग्रुप में डिसकशन की गई थी। इसमें पता चला कि स्टूडेंट्स में स्ट्रेस का कारण है कि उनके सामने अवसर ज्यादा हैं आैर उन्हें गाइड करने वाला कोई नहीं है। स्टूडेंट्स को सही से यही नहीं पता कि कॉलेज के बाद करें क्या। करियर को लेकर क्लेयरिटी भी नहीं होती। इस वजह से डिप्रेशन ज्यादा है।

8वीं-10वीं क्लास के स्टूडेंट के पास भी पर्सनल गैजेट्स, पेरेंट्स की इन्वॉल्वमेंट कम

साइकोलॉजिस्ट ने बताया कि उनकी स्टडी में सामने आया है कि आज 8वीं और 10वीं के स्टूडेंट भी अपना पर्सनल गैजेट्स लेकर घूमते हैंै। पहले ऐसा नहीं था और उनमें भी अपने करियर को लेकर कोई प्लानिंग नहीं होती। इससे वह अपने पेरेंट्स से भी कोई बात डिस्कस नहीं करते और जो प्रॉब्लम सॉल्व होने वाली होती है उन्हें भी वह अपने पेरेंट्स से छुपाकर रहते हैं और बाद में डिप्रेशन होने से ब्रेन प्रॉब्लम के शिकार बन जाते हैंै।

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