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मंत्रियों ने 125 करोड़ की स्वैच्छिक ग्रांट ली, 72.61 करोड़ अपने जिलों में खर्च किए

हरियाणा के मंत्रियों की स्वैच्छिक ग्रांट बढ़ाकर भले ही पांच से 7 करोड़ करने के फैसले पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है।

गिरिराज अग्रवाल/मनोज कुमार | Last Modified - Dec 18, 2017, 06:27 AM IST

मंत्रियों ने 125 करोड़ की स्वैच्छिक ग्रांट ली, 72.61 करोड़ अपने जिलों में खर्च किए

चंडीगढ़/पानीपत.हरियाणा के मंत्रियों की स्वैच्छिक ग्रांट बढ़ाकर भले ही पांच से 7 करोड़ करने के फैसले पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है, लेकिन इसे केवल उन्हीं जिलों को फायदा होगा, जहां के विधानसभा क्षेत्र से हमारे मंत्री जीतकर आए हैं। इस ग्रांट से पानी, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी लोगों को ज्यादा मिलने वाली नहीं है। यह खुद सरकार की रिपोर्ट बयां कर रही है। जो जानकारी मिली है, वह चौंकाने वाली है।

मंत्री अपने वोट बैंक को ध्यान में रखकर स्वैच्छिक ग्रांट से पैसा दे रहे हैं। इसमें विकास और आम लोगों की सुविधाएं पीछे छूट गई हैं। प्रदेश के मंत्रियों को 2014-15 से 2016-2017 तक के वित्तीय वर्ष में 125 करोड़ रुपए बतौर स्वैच्छिक ग्रांट मिले, लेकिन इनमें 72.61 करोड़ इन्होंने केवल अपने गृह जिले में ही खर्च किए।


वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने तो पहले वित्त वर्ष 2014-15 की पहली 2.5 करोड़ की ग्रांट में एक पैसा भी दूसरे जिले को नहीं दिया। उन्होंने हिसार जिले में हांसी, नारनौंद में ही 19 कामों के लिए यह ग्रांट जारी कर दी। जबकि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने 2 लाख पंचकूला के लिए दिए। बाकी 2.48 करोड़ रुपए अंबाला में ही जारी कर दिए। मुख्यमंत्री को भी इस अवधि में 100 करोड़ की स्वैच्छिक ग्रांट मिली, जिसमें उन्होंने करीब 20 फीसदी यानी 19.22 करोड़ रुपए करनाल जिले में खर्च किए हैं।

मुख्यमंत्री खट्टर ने भी पहली 20 करोड़ रुपए की ग्रांट में 9.83 करोड़ रुपए करनाल जिले में ही दिए। सरकार में मंत्री रह चुके बिक्रम सिंह ठेकेदार और घनश्याम सर्राफ का रिपोर्ट कार्ड भी बाकी मंत्रियों से अलग नहीं है। यही हाल प्रदेश में रहे चार सीपीएस का भी है, जिन्होंने 50 फीसदी से ज्यादा ग्रांट अपने जिलों में खर्च की है। खास बात यह है कि मंत्रियों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व सीपीएस ने पानी, बिजली और सड़क पर बहुत ही कम राशि खर्च की है, इनका ज्यादा जोर निजी स्कूल, निजी संस्थाएं, मकान मरम्मत के लिए व्यक्तिगत मदद, गौशालाएं, डेरे या आश्रम पर रहा है।

सीएम ने दूसरे प्रदेश में बांटा पैसा

मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने अपने जिलों के अलावा बाकी हरियाणा से ज्यादा चिंता दूसरे प्रदेशों की संस्थाओं की भी रखी है। मुख्यमंत्री खट्‌टर ने अपने पहले वित्त वर्ष में सात घोषणाओं में 6 घोषणाएं पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़ और उत्तराखंड के लिए की। हालांकि बाद के वर्षों में उन्होंने पैसा प्रदेश के बाकी जिलों में बांटना शुरू कर दिया। इसके अलावा सीएम और कुछ मंत्रियों की ओर से आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को भी ग्रांट दी है। उन्होंने करनाल जिले की कुछ ग्राम पंचायतों को एक-एक करोड़ रुपए भी दिए हैं।

यह भी जानिए

2014 में भाजपा सरकार का गठन होने पर सीएम समेत 10 मंत्री थे। 2015 में मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। कृष्ण लाल पंवार, नायब सिंह सैनी और घनश्याम सर्राफ को जगह दी गई। लेकिन 2016 में घनश्याम सर्राफ और बिक्रम सिंह ठेकेदार की छुट्‌टी कर दी गई। जबकि विपुल गोयल, डॉ बनवारी लाल और मनीष ग्रोवर को मंत्रीमंडल में शामिल किया गया। 2015-16 में चार सीपीएस बनाए गए, जिन्हें कुछ समय पहले कोर्ट के आदेश पर हटा दिया गया।

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