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प्रदेश में 7300 निजी अस्पतालाें के 19 हजार डॉक्टर रहे हड़ताल पर, मरीज हुए परेशान

हरियाणा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में राज्य के 3700 एलोपैथिक प्राइवेट अस्पताल व 3500 डेंटल अस्पताल हड़ताल में

Bhaskar News | Last Modified - Dec 16, 2017, 06:55 AM IST

प्रदेश में 7300 निजी अस्पतालाें के 19 हजार डॉक्टर रहे हड़ताल पर, मरीज हुए परेशान

पानीपत.हरियाणा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में राज्य के 3700 एलोपैथिक प्राइवेट अस्पताल व 3500 डेंटल अस्पताल हड़ताल में शामिल हुए। 10 हजार एलोपैथिक डॉक्टर व 9 हजार डेंटल डॉक्टरों ने अपने-अपने जिलों में डीसी के माध्यम से सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। इसके चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बढ़ गई, जहां दिनभर भीड़ लगी रही। डॉक्टरों ने एक्ट को रद्द करने की मांग की है। हिसार में आईएमए, नीमा व डेंटल एसोसिएशन की ओर से क्रांतिमान पार्क में एकत्रित होकर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के खिलाफ बैठक कर विरोध जताया गया।


एक्ट के खिलाफ चिकित्सकों ने डीसी को सीएम के नाम ज्ञापन दिया। हालांकि सिविल अस्पतालों में हड़ताल से निपटने के लिए इमरजेंसी में तीन शिफ्टों में 2-2 अतिरिक्त डॉक्टरों की व्यवस्था की थी। वहीं, रोहतक पीजीआई और सिविल अस्पताल में मरीज उमड़ पड़े। सामान्य दिनाें की अपेक्षा यहां करीब डेढ़ से दो गुना तक ओपीडी रही। अम्बाला, रेवाड़ी समेत प्रदेश भर में मरीज भटकते हुए नजर आए।

यमुनानगर में हार्ट अटैक में मरीज को नहीं मिला इलाज, तोड़ दिया दम

आईएमए की हड़ताल के दौरान भाटिया नगर निवासी पवन भाटिया की प्राइवेट अस्पतालों में समय पर इलाज न मिलने से मौत हो गई। मृतक के रिश्तेदार अभिषेक ने बताया कि सुबह नहाते समय पवन को अटैक आया था। वे उन्हें गंभीर हालत में जेपी अस्पताल में ले गए। वहां पर हड़ताल के कारण डॉक्टर नहीं मिल पाया। फिर उन्होंने हार्ट केयर में डॉक्टर का पता किया, लेकिन वहां से भी जवाब मिला कि हड़ताल के कारण डॉक्टर अस्पताल में नहीं हैं। इसके बाद वे उन्हें स्वामी विवेकानंद अस्पताल में ले गए तो वहां पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उधर, जेपी अस्पताल के डॉक्टर अमित गोयल का कहना है कि उन्होंने मरीज का चेकअप किया गया था। वह पहले ही डेड था। इमरजेंसी मरीजों को इलाज देने से मना नहीं किया गया।

नए नियम से मरीजों को कई लाभ

डॉक्टरों ने अभी क्लीनिक को ही अस्पताल बना रखा है, और कमाई कर रहे हैं। नए नियम के तहत अस्पताल को पूरी सुविधाएं देनी होंगी, मरीज के प्रति जवाबदेही तय होगी।

नियम : 24 घंटे सेवाएं देनी होगी : अस्पताल है तो 24 घंटे सेवाएं देनी होगी, इसके लिए तीन शिफ्टों में कम से कम 3 मेडिकल ऑफिसर रखने होंगे। इससे मरीजों को 24 घंटे बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी।

डॉक्टरों के तर्क

तीन डॉक्टरों पर 3 लाख का खर्चा बढ़ेगा, जिसका बोझ मरीज पर पड़ेगा।

2. आईसीयू : अस्पताल है तो आईसीयू की व्यवस्था करनी होगी। इससे भी मरीज को किसी भी अस्पताल में त्वरित इलाज मिलेगा।
डॉक्टर : यहां भी खर्च बढ़ेगा।
3. सर्जरी : सभी अस्पतालों में सर्जरी की फीस एक समान होगी। मरीजों के लिए बहुत उपयोगी।
डॉक्टर : डॉक्टरों को सबसे बड़ी आपत्ति इसी पर है, क्योंकि अब मनमाने रेट ले रहे हैं।
5. पार्किंग : अस्पताल के पास अपनी पार्किंग होनी चाहिए। इससे सबको फायदा है।
विरोध क्योंकि, सड़क को कब्जा करके अस्पताल की बिल्डिंग खड़ी कर ली। पार्किंग सड़क पर कर रहे हैं।

6. हर मरीज को अटेंड करना होगा : अस्पताल और डॉक्टर कोई भी क्यों न हो, हर तरह के मरीज को अटेंड करना होगा। इमरजेंसी केस है तो उसे स्टेबल करना होगा।
डॉक्टर : आंख का एक डॉक्टर भला हार्ट मरीज को कैसे देख सकता है। विशेषज्ञता के अनुसार ही डॉक्टर मरीज का इलाज भी करना चाहते हैं।
7. पति के नाम से रजिस्ट्रेशन है तो मौत के बाद पत्नी के नाम करना होगा।
डॉक्टर : ऐसी परिस्थिति में कई माह तक अस्पताल बंद रखने होंगे, क्योंकि दूसरे के नाम से रजिस्ट्रेशन बदलने में वक्त लगेगा। इसलिए पति की मौत की स्थिति में पत्नी के नाम से ही रजिस्टर्ड मान लिया जाए।

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Web Title: pradesh mein 7300 niji aspatalaaen ke 19 hazaar doktr rahe hड़taal par, mrij hue pareshaan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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