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ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी भी ग्रुप-ए की नौकरी के लिए पात्र

अब ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी भी ग्रुप-ए की सरकारी नौकरियों के लिए पात्र होंगे।

गिरिराज अग्रवाल | Last Modified - Dec 30, 2017, 06:28 AM IST

  • ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी भी ग्रुप-ए की नौकरी के लिए पात्र
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    चंडीगढ़/ पानीपत।हरियाणा में अब ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी भी ग्रुप-ए की सरकारी नौकरियों के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, अन्य अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के साथ-साथ अब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी और एशियन-कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के मेडल विजेता खिलाड़ी भी इन नौकरियों के लिए पात्र होंगे। राज्य सरकार ने खेल पॉलिसी के तहत खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों में तीन प्रतिशत कोटा निर्धारित किया है। साथ ही एलिजिबिलिटी (पात्रता) क्राइटेरिया तय कर दिया है। इसके तहत खिलाड़ियों को अब लिखित परीक्षा व मेरिट के दौर से गुजरना होगा। हालांकि, डिस्ट्रिक्ट टूर्नामेंट विजेता खिलाड़ियों को कोटा पॉलिसी में शामिल नहीं किया गया है। नए नियमों में अब सभी तरह के खेलों को 13 कैटेगरी में बांटा है। खेल एवं युवा मामले विभाग ने ‘पदक लाओ, पद पाओ’ पॉलिसी के तहत मेडल के मुताबिक नौकरी देने के लिए पात्रता संबंधी नियम तैयार कर मुख्य सचिव डीएस ढेसी को भेजे हैं। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इन्हें हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन, हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन समेत सभी विभागों को भेजा जाएगा।

    प्रदेश से खेलना या मूल निवासी होना जरूरी

    नए नियमों के मुताबिक नौकरियों में खेल कोटे का लाभ उन्हीं खिलाड़ियों को मिलेगा, जो राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा के लिए खेले हों या प्रदेश के मूल निवासी हों। यानी खिलाड़ी ने राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा के अलावा किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व नहीं किया हो। वहीं, अगर दूसरे किसी राज्य के खिलाड़ी ने हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया है तो वह भी नौकरी के लिए दावा कर सकता है। इसमें किसी तरह के भ्रम की स्थिति न रहे, इसलिए खिलाड़ी के मेडल व ग्रेडेशन के आधार पर खेल विभाग सर्टिफिकेट भी जारी कर सकेगा। जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित होगा कि खिलाड़ी किस ग्रुप की नौकरी के लिए पात्र है। उल्लेखनीय है कि पिछली सरकार में खेल कोटे की नौकरियों को लेकर भेदभाव के आरोप लगे थे।

    ग्रुप-4 की नौकरियों में बढ़ सकता है कोटा

    नए नियमों में छूट दी गई है कि ग्रुप-4 की नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए कोटा तीन प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक भी किया जा सकता है। ताकि प्रदेश के खिलाड़ियों को नौकरियों में समुचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

    ट्रॉफी विजेता क्रिकेटर को क्लास-2 की नौकरी

    सरकारी नौकरी के लिए पात्रता संबंधी नियमों में क्रिकेट को कम महत्व दिया गया है। प्रदेश का कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर के वनडे या टेस्ट मैच में ट्रॉफी लाता है तो भी वह क्लास वन की नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। उसे क्लास-2 की नौकरी के लिए ही योग्य माना जाएगा। राज्य की खेल पॉलिसी के मुताबिक क्रिकेट ओलिंपिक खेलों में नहीं है।

    ग्रुप-डी : ओलिंपिक, 4 वर्षीय वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन-कॉमनवेल्थ गेम्स, अन्य इंटरनेशनल चैंपियनशिप, वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स, अन्य एशियन, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, साउथ एशियन गेम्स, इंटरनेशनल और नेशनल क्रिकेट टेस्ट, वन-डे, इनमें नॉन ओलिंपिक खेलों और ओलिंपिक से संबंधित नेशनल गेम्स, नेशनल चैंपियनशिप के खिलाड़ियों के अलावा नेशनल स्कूल गेम्स, ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी गेम्स, ऑल इंडिया वुमन स्पोर्ट्स, ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज, ऑल इंडिया पुलिस, ऑल इंडिया रूरल गेम्स, स्टेट गेम्स, स्टेट वुमन स्पोर्ट्स, स्टेट स्कूल, स्टेट रूरल एंड पंचायत और स्टेट इंटर यूनिवर्सिटी गेम्स के मेडल विजेता।

    आउट ऑफ टर्न नौकरी के लिए भी नियम जल्द तय होंगे : अनिल विज

    मेडल विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नौकरी देने के लिए आउट स्टैंडिंग खिलाड़ी की परिभाषा जल्द तय की जाएगी। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को दूसरे प्रदेशों व केंद्र सरकार की पॉलिसी एवं प्रावधानों की स्टडी करने को कहा गया है। ताकि किसी खिलाड़ी के साथ नौकरियों में अन्याय न हो। सरकारी नौकरियों में 3 प्रतिशत कोटे का भी उनके लिए एक विकल्प है। इससे वे अपनी शैक्षणिक और अन्य योग्यताओं के आधार पर और भी बेहतर नौकरी पा सकते हैं। -अनिल विज, मंत्री खेल एवं युवा मामले विभाग

    पॉलिसी में शामिल ये ओलिंपिक खेल

    आॅर्चरी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बाॅस्केटबॉल, बॉक्सिंग, केनोइंग, साइक्लिंग, इक्वेस्ट्रियन, फेंसिंग, फुटबॉल, गोल्फ, जिम्नास्टिक, हैंडबॉल, हॉकी, जूडो, ट्राइथलॉन, रोइंग, स्विमिंग, सेलिंग, शूटिंग, टेबल-टेनिस, ताइक्वांडो, टेनिस, वॉलीबॉल, वेटलिफ्टिंग और रेसलिंग।

    ये नॉन ओलिंपिक खेल

    बेसबॉल, बिलिय‌र्ड्स, चेस, क्रिकेट, कबड्डी (हरियाणा स्टाइल), कबड्डी (नेशनल स्टाइल), कराटे, खो-खो,
    कॉर्फ बॉल, नेटबॉल, स्केटिंग, स्नूकर, सॉफ्टबॉल, स्क्वॉश , थ्रो-बॉल और योगा।

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