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पिता ने दी जान देने की धमकी, तब मिला रेप विक्टिम बच्ची को मिला इलाज

3 साल की बच्ची करीब 84 दिन से दर्द से तड़प रही है। प्रशासन ने भी उसका ठीक से उपचार नहीं कराया।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 05:21 AM IST

पानीपत. इलाज के बिना गैंगरेप पीड़ित 3 साल की बच्ची करीब 84 दिन से दर्द से तड़प रही है। प्रशासन ने भी उसका ठीक से उपचार नहीं कराया। पहले ऑपरेशन के बाद से ही ब्लडिंग के साथ मवाद रिस रहा है। अब शौच के लिए पेट में बनाए रास्ते से मांस बाहर निकल आया। पिता का कहना है कि 3 दिन में काफी खून बह गया और बच्ची 24 घंटे दर्द के कारण रो रही है। किसी अधिकारी ने कोई मदद नहीं की तो पिता ने शनिवार रात नारी तू नारायणी उत्थान समिति की अध्यक्ष सविता आर्य को फोन कर पीड़ा सुनाई।


पिता ने कहा कि बच्ची को मरते देख उनका जीना भी मुश्किल हो गया है। हो सके तो समाधान करा दो, नहीं तो वह आत्महत्या कर लेगा। आर्य ने रविवार सुबह बच्ची को सिविल अस्पताल ले गई। जहां ऑपरेशन बताया तो निजी अस्पताल में ले गई। सूचना पर डीएसपी विद्यावती और किला थाना प्रभारी सुरेश पाल भी पहुंचे। आर्य ने बताया कि डॉक्टर ने सर्जरी कर दी है। इसके बाद बच्ची को खानपुर रेफर कर दिया। सेक्टर 29 चौकी प्रभारी महाबीर व महिला पुलिसकर्मी बच्ची को खानपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराकर आए हैं। सोमवार को उसका दूसरा ऑपरेशन होगा।
पिता ने फोन नहीं उठाया तो घर पहुंची सविता आर्य
सविता आर्य ने बताया कि रात को पिता के फोन आने के बाद उन्होंने रात को दवा खिलाकर बच्ची को सुलाने और सुबह अस्पताल में दिखाने की बात कही। सुबह पिता को करीब 5 बार फोन किया तो उन्होंने उठाया नहीं। पिता ने आत्महत्या करने की बात कही थी, इसलिए वे डर गई और उसके घर की तलाश में नूरवाला पहुंची। लोगों से घर के बारे में पता किया, लेकिन नहीं मिला। थोड़ी देर बाद फोन किया तो पिता ने उठा लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी।
किसी ने कोई मदद नहीं की
पिता का कहना है कि रेप के बाद मदद तो दूर कोई अधिकारी बच्ची को देखने तक नहीं आया। बाल कल्याण समिति ने भी कोई मदद नहीं की। कभी एफआईआर की कॉपी तो कभी बयान की कॉपी की बात कहकर ऑफिस के चक्कर कटवाते रहे। वह ऑटो चलाकर परिवार का पालन पोषण करता है। बेटी के गंभीर होने के कारण ऑटो भी नहीं चला पा रहा है। 25 हजार रुपए का कर्जा भी ले चुका है। गरीब होने के कारण वह बेटी का उपचार नहीं करा पा रहा है। समिति की सदस्य किरण मलिक ने कहा कि पिता को कई बार कागजात लेकर आने के लिए कहा, लेकिन वे ही नहीं आए। समिति पूरी मदद करने को तैयार है।