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फाइनेंस कंपनियों ने बीमा कराया, इसलिए नहीं रखतीं गार्ड, बैंकों में सिर्फ दिन में गार्ड

प्रदेश के 40 फीसदी बैंक और गोल्ड लोन पर फाइनेंस देने वाली कंपनियों में ही दिन में सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था है।

Danik Bhaskar | Jan 30, 2018, 02:03 AM IST

चंडीगढ़/पानीपत। प्रदेश के 40 फीसदी बैंक और गोल्ड लोन पर फाइनेंस देने वाली कंपनियों में ही दिन में सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था है। लोगों का लॉकर में पड़ा कीमती सामान भी सेफ नहीं है। सुरक्षा के लिहाज से सिर्फ चंद बड़े बैंकों में ही रात के समय गार्ड रखे गए हैं, जो रात के समय शटर बंद कर बैंक के अंदर ही सो जाते हैं। प्रदेश में गोल्ड पर फाइनेंस करने वाली कई कंपनियां हैं। भास्कर टीम ने जब प्रदेश में इनका रियलिटी चैक किया तो पाया कि यहां पर सुरक्षा के मानदंड ही पूरे ही नहीं हो रहे।

पुलिस ने भी कभी इनकी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेना भी उचित नहीं समझा। पानीपत में गोल्ड पर फाइनेंस देने वाली एक कंपनी से 3.90 करोड़ की गोल्ड की लूट के बाद अब लोग भी पसोपेश में हैं कि उनका सोना व कीमती सामान बैंकों और इन फाइनेंस कंपनियों में कितना सुरक्षित है।


पानीपत शहर में गोल्ड लोन पर फाइनेंस की 7 निजी कंपनियां काम कर रही हैं। चूंकि इन पर बैंकों का कोई कायदा-कानून लागू नहीं होता, इसलिए ये लोग अपने हिसाब से गोल्ड के बदले ब्याज पर कैश देते हैं। किसी भी फाइनेंस कंपनी में सुरक्षा का कोई मानक पूरा नहीं होता। चूंकि, इन कंपनि यों ने बीमा करा रखा है। इसलिए सुरक्षा गार्ड पर खर्च ही नहीं करना चाहती। हालांकि, नियम भी नहीं है। कंपनी की ओर से 35 किलो से अधिक गोल्ड डिपॉजिट वाली ब्रांच में ही राइफलधारी गार्ड लगाया जाता है।

यहां तो करीब 16 किलोग्राम गहने ही थे। लीड बैंक के मुख्य प्रबंधक राकेश वर्मा ने कहा कि ये प्राइवेट होते हैं, इसलिए इनका बैंक से कोई लेनादेना भी नहीं होता और अपने हिसाब से कंपनी चलाते हैं। आईआईएफएल कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा कि ज्वैलरी की जितनी कीमत होती है, उसमें 30 फीसदी कमी कर कंपनी मामूली ब्याज पर पैसे देती है। कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा कि किसी ने अगर 2 लाख के गहने जमा कर 1.20 लाख रुपए उठा रखे हैं, तो नियमों के तहत उनके शेष गहने की कीमत लौटा दी जाएगी। इस तरह से लोगों के गहने सुरक्षित हैं।


रेवाड़ी में केवल लीड बैंक में ही सुरक्षा : रेवाड़ी शहर में 32 बैंक और उनकी 186 शाखाएं हैं। जहां दिन के समय सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहते हैं, लेकिन रात में कोई नहीं होता। रात में लीड बैंक जहां सभी बैंकों का कैश जमा होता है, वहां बैंक के साथ पुलिस भी तैनात रहती है। शहर में लगभग 6 निजी गोल्ड लोन फाइनेंस कंपनियां हैं। नारनौल व महेंद्रगढ़ में गोल्ड फाइनेंस की ऐसी कोई कंपनी काम नहीं कर रही है। 7 अक्टूबर 2015 को खेडा आलमपुर गांव के पीएनबी बैंक में तीन लाख तीन हजार रुपए की लूट हुई थी। इस मामले में तीसरा आरोपी अब पकड़ा गया है।

रोहतक में फाइनेंस कंपनियों के अपने गार्ड
रोहतक शहर में गोल्ड फाइनेंस की दो कंपनियां मुथूट फाइनेंस व मुथूट फिन कार्प है, जिसकी शहर में लगभग 10 शाखाएं हैं। बैंक की तरह यहां भी लॉकर हैं। सुरक्षा की पूरी व्यवस्था है। इन कंपनियों के अपने सुरक्षा गार्ड हैं। पुलिस प्रशासन समय-समय पर सिक्योरिटी सिस्टम चेक करता है।

हिसार जिले में 31 बैंक, 301 शाखाएं, 201 एटीएम

बैंकों के आसपास पुलिस की पीसीआर गश्त करती रहती हैं। बैंक परिसर में पुलिस का कोई गार्ड तैनात नहीं है। प्रत्येक बैंक में दिन में सुरक्षा गार्ड रहता है, रात को अधिकांश बैंकों पर गार्ड नहीं हैं। पुलिस अधिकारी समय-समय पर बैंकों मंह सीसीटीवी लगाने और गार्ड रखने की मीटिंग कर हिदायत देते हैं। संबंधित थाना प्रबंधक एवं डीएसपी अपने-अपने इलाके में आने वाली बैंकों की सरप्राइज विजिट करते हैं। एटीएम की सुरक्षा में दिन में दो गार्ड हैं, लेकिन रात में कुछ ही बैंकों के एटीएम पर गार्ड रहते हैं।

यमुनानगर में पियून भरोसे सुरक्षा, अम्बाला में नहीं लगे सीसीटीवी

कैथल सिटी में अम्बाला रोड पर गोल्ड लोन बैंक हैं, जिसमें गन के साथ एक सिक्योरिटी गार्ड तैनात है। हर तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। रुटीन में कोई खास चैकिंग नहीं होती। यमुनानगर में भास्कर टीम ने 12 बैंकों और गोल्ड लोन व फाइनेंस कंपनियों के ऑफिस का दौरा किया तो यहां पर सुरक्षा इंतजाम कुछ खास नहीं मिले। ज्यादातर कंपनियों में सुरक्षा के नाम पर पियून तैनात किया था। वहां पर सुरक्षा के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात ही नहीं मिला। हालांकि सभी बैंक और फाइनांस कंपनियों के ऑफिस पर सीसीटीवी जरूर लगे मिले। ज्यादातर एटीएम भी बिना गार्ड के थे। अम्बाला में फाइनेंस कंपनियों ने खुद के सिक्योरिटी गार्ड लगाए हैं।