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आलू-टमाटर का MSP 4 और प्याज-गोभी का 5 रु. किलो, कम मिले तो सरकार करेगी भरपाई

प्रदेश में शनिवार से भावांतर भरपाई योजना की शुरुआत हो गई।

Bhaskar news | Last Modified - Dec 31, 2017, 05:11 AM IST

आलू-टमाटर का MSP 4 और प्याज-गोभी का 5 रु. किलो, कम मिले तो सरकार करेगी भरपाई

करनाल. प्रदेश में शनिवार से भावांतर भरपाई योजना की शुरुआत हो गई। इसके तहत राज्य सरकार ने पहले चरण में आलू-टमाटर के लिए 400 रु. प्रति क्विंटल (4 रु. किलो), फूलगोभी-प्याज के लिए 500 रु. प्रति क्विंटल (5 रु. किलो) न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया है। अगर किसान की फसल तय एमएसपी से कम दाम पर बिकती है तो उसकी भरपाई राज्य सरकार करेगी। इसके लिए अलग से फंड तैयार किया जाएगा। करनाल के गांव गांगर में सीएम मनोहर लाल ने भावांतर भरपाई ई-पोस्टल लॉन्च किया। सीएम ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान को प्रति एकड़ सालाना एक लाख रुपए तक आय हो। सरकार इस ओर आगे बढ़ रही है। कांग्रेस ने 4-5 रु. किलो के रेट नाकाफी बताए।


पंजीकरण होने पर कर सकेंगे अपील
आलू की फसल के लिए के लिए 15 जनवरी तक, प्याज की फसल के लिए 25 मार्च तक, टमाटर की फसल के लिए 25 मार्च और फूलगोभी की फसल के लिए 25 जनवरी तक अपील की जा सकेगी।


किसान को फसल जे-फार्म के जरिए बेचनी होगी। बिक्री का विवरण बीबीवाई पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसकी सुविधा सभी मार्केटिंग कमेटी में होगी। बिक्री के तय समय में किसान को तय रेट से कम भाव मिलता है तो वह भरपाई के लिए पात्र होगा। भरपाई की राशि किसान के खाते में 15 दिन में जमा कर दी जाएगी। औसत दैनिक थोक मूल्य मंडी बोर्ड की ओर से निर्धारित मंडियों के दैनिक भाव के आधार पर तय किया जाएगा। किसान को यदि भाव एमएसपी से अधिक भी मिलता है तो भी मंडी के अधिकारी से जे-फार्म चढ़वाना होगा, अन्यथा किसान को अगले वर्ष पंजीकृत नहीं किया जाएगा।

किसान को योजना का लाभ लेने के लिए बिजाई के समय ही मार्केटिंग बोर्ड की वेबसाइट पर बागवानी भावांतर योजना पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कराना होगा। उद्यान विभाग का अधिकारी किसान का क्षेत्र देखेंगे। हर जिले में डीसी के नेतृत्व में गठित कमेटी किसान की फसल का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद किसान के पास एसएमएस भेजा जाएगा। पंजीकरण निशुल्क होगा। पंजीकरण किए जाने की शिकायत किसान कर सकेगा।

योजना का उद्देश्य मंडी में सब्जी फल की कम कीमत के दौरान निर्धारित सरंक्षित मूल्य द्वारा जोखिम को कम करना है। किसान को फसल का इतना भाव तो मिलना ही चाहिए, जितना खर्च आया है। इन चार फसलों के 400 से 500 रुपए जो भाव तय किए हैं, उसके अनुसार किसान को प्रति एकड़ 48 से 56 हजार रुपए मिल जाएंगे। -डॉ.बीएस सहरावत, मिशन डायरेक्टर, बागवानी विभाग

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