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हरियाणा में फर्जी पीएचडी, एमएससी और एमफिल डिग्री का कारोबार, प्रोफेसर्स ने एक साथ लीं 3 डिग्रियां,

दक्षिण हरियाणा के रेवाड़ी, महेंद्रगढ और गुड़गांव जिले से फर्जी डिग्रियों का बड़ा कारोबार संचालित हो रहा है।

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 06:50 AM IST

रेवाड़ी. दक्षिण हरियाणा के रेवाड़ी, महेंद्रगढ और गुड़गांव जिले से फर्जी डिग्रियों का बड़ा कारोबार संचालित हो रहा है। दक्षिण भारत, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के विश्वविद्यालयोें के नाम से यह डिग्रियां बनाई जा रही हैं। इनकी कीमत 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक अदा की जा रही है। बड़ी बात यह है कि इन फर्जी डिग्रियों से लोग प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, क्लर्क आदि पदों पर नौकरी तक कर रहे हैं। बड़ी बात यह है कि ऐसी डिग्रियों से नौकरी करने वाले कई प्रोफेसर्स ने एक ही समय में तीन-तीन डिग्रियां हासिल की हैं।

महिला प्रोफेसर ने अपनी डिलीवरी के अवकाश के दौरान एनसीसी का सर्टिफिकेट पूरा किया। महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिले के कॉलेजों में ही 50 से ज्यादा प्राध्यापक, सहायक प्रोफेसर एवं प्रोफेसर फर्जी डिग्रियांें से नौकरी कर रहे हैँ। इसके अलावा हिसार, गुड़गांव और जीटी बेल्ट के कई कॉलेजों में ऐसे प्रोफेसर और अध्यापक हैं, जिन्होेंने ऐसी डिग्री से नौकरी पाई है। दरअसल, इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा रेवाड़ी के अहीर कॉलेज से निकलकर सामने आया है। यहां इतिहास के एक प्राध्यापक पर पीएचडी कराने के नाम पर लाखों रुपए वसूले जाने का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद इस कॉलेज के 5 से ज्यादा प्राध्यापकों ने पीएचडी के नाम पर वसूली का आरोप लगाया। जिस पर कॉलेज प्रबंधक समिति के तत्कालीन चेयरमैन यादवेंद्र सिंह ने प्राध्यापक डॉ. गजेंद्र के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया।

अब इस मामले में जमानत पर आ चुके प्राध्यापक गजेंद्र ने कई और खुलासे किए हैं। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जानकारी जुटाकर खुलासा किया है कि महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और हिसार जिले में 50 से ज्यादा प्राध्यापक, सहायक प्रोफेसर ऐसे हैं जिनके पास एमफिल एवं पीएचडी की फर्जी डिग्रियां है और वह लंबे समय से नौकरी कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें तो सिर्फ बलि का बकरा बनाया गया है। अब सीएम विंडो, हरियाणा विजिलेंस के पास सबूतों के साथ ऐसे मामलों की शिकायत की गई है। वहीं, एक अन्य महिला पीएचडी स्क्ॉलर का आरोप है कि यहां द्रविड़ यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी डिग्री दी जा रही है। उन्होंने तो बाकायदा इसके लिए एक लाख रुपए का पेमेंट भी किया है। अब इसकी शिकायत पुलिस से भी की गई है।

प्रोफेसर, स्पोर्ट्स टीचर व क्लर्क तक की पाई नौकरी

> एक प्राध्यापक ने 2011 में एमएससी की डिग्री मिली और 2012 में उसे सीएमजे यूनिवर्सिटी से पीएचडी डिग्री दिला दी गई। प्रोफेसर बनने के लिए लिए गए इंटरव्यू में दूसरी पोजीशन पर भी रहता है।
> राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक ने 2014 में किसी निजी स्कूल से क्लर्क का फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनवा रखा है। क्लेरिकल वर्क के नंबर भी प्रोफेसर पद के इंटरव्यू में जुड़ते हैं। कागजों में वे दो स्थानों पर एक ही समय में ड्यूटी कैसे कर सकते हैं।
> एक महिला प्राध्यापिका मातृत्व अवकाश के चलते छुट्टी पर थीं। उस समय का उनका एनसीसी प्रमाण पत्र बनाया गया है। कागजों के अनुसार डिलीवरी के समय में भी उनकी एनसीसी में उपस्थित दिखाई गई है।
> हिसार के एक कॉलेज के विद्यार्थियों को भी एनसीसी के प्रमाण पत्र बांटे गए। रोहतक के एक कॉलेज में कार्यरत कोच का भी यहां से प्रमाण पत्र बना दिया गया। इस पत्र से बोनस के तौर पर एक अंक मिलते हैं।
एमए- पीएचडी की डिग्रियों के फर्जीवाड़े को ऐसे समझिए
2009 में आंध्रप्रदेश की सरकारी द्रविड यूनिवर्सिटी कुप्पम का महेंद्रगढ़ में जननायक नाम से स्टडी सेंटर खुला था। रिकाॅर्ड के अनुसार अहीर कॉलेज में कार्यरत प्राध्यापक गजेंद्र यादव इस सेंटर के अप्रत्यक्ष तौर से काेआर्डिनेटर थे। जिले के इस कॉलेज के चार प्राध्यापक संदीप शर्मा, धीरज सांगवान, गजराज सिंह व सीमा यादव व एक अन्य आशीष सांगवान समेत अन्य जिलों के प्राध्यापकों ने अपने अपने विषयों में पीएचडी के लिए गजेंद्र यादव से संपर्क किया। बकायदा इस यूनिवर्सिटी में उक्त सभी प्राध्यापकों का रजिस्ट्रेशन हो गया। इसके बाद इस यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वालों की संख्या हजारों में पहुंच गई और मामला हैदराबाद हाईकोर्ट में चला गया। वहां की सरकार ने कोर्ट के आदेश पर तुरंत प्रभाव से यूनिवर्सिटी में पीएचडी पर रोक लगा दी।
पीएचडी के नाम पर लाखों ठगे, पुलिस में शिकायत
महेंद्रगढ़ के गांव दुलाना की हेमलता यादव ने बताया कि उसने 2011 में कमला विद्या निकेतन के माध्यम से द्रविड़ यूनिवर्सिटी श्रीनिवासवनम आंध्रप्रदेश से एजुकेशन में पीएचडी के लिए आवेदन किया। यह सेंटर खुद को यूनिवर्सिटी का स्टडी सेंटर बता रहा था। एक लाख रुपए जमा करने के बाद यूनिवर्सिटी का आईकार्ड एवं अन्य सामग्री भी उपलब्ध करा दी। 6 साल तक कुछ नहीं हुआ तो यूनिवर्सिटी में आरटीआई लगाई । पता लगा कि ऐसा कोई सेंटर ही नहीं है। यूनिवर्सिटी में उनका रजिस्ट्रेशन तक नहीं था। अब सेंटर संचालक के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
एक ही समय में
पीएचडी की 3 डिग्रियां
रेवाड़ी के अहीर कॉलेज में एक शिक्षक के पास एक ही समय में की गई पीएचडी की तीन डिग्रियां हैं। पहली डिग्री 28 सितंबर 2012 को सीएमजे यूनिवर्सिटी से, 17 नवंबर 2012 और 17 अक्टूबर 2012 को इसी यूनिवर्सिटी से दूसरी व तीसरी डिग्री है। एक ही यूनिवर्सिटी से हासिल इन डिग्रियों का फॉरमेट अलग अलग है। इसी शिक्षक ने अगस्त 2011 में निम्स यूनिवर्सिटी जयपुर से एमएससी भी कर ली। एक साथ तीन डिग्रियां हासिल करना हैरान करने वाली बात है।
दो पीएचडी की डिग्री
दादरी जिला के एक राजकीय महाविद्यालय में कार्यरत एक प्राध्यापक ने 23 अक्टूबर 2012 को सीएमजे यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री ली। यहीं से 8 दिन बाद फिर एक और डिग्री हासिल कर ली। उसने खुद को निम्स यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी विभाग का शोधार्थी भी बताया है। इसी दौरान इसी शिक्षक ने 2013 में छत्रपति साहू जी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर से भी पीएचडी की डिग्री तैयार करवा ली। इसी पीरियड में उन्होंने अहीर कॉलेज में एनसीसी का प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया।
रेगुलर रह कर पीएचडी
1984 से अहीर कॉलेज में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर ने 1989 में आगरा यूनिवर्सिटी आगरा से पीएचडी की डिग्री हासिल की। 2012 में प्राचार्य पद के लिए आवेदन किया जिसमें खुद को 28 साल से लगातार कॉलेज में कार्यरत बताया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस दौरान 1989 में बिना अवकाश लिए डयूटी करते हुए रसायन शास्त्र में पीएचडी की डिग्री कैसे प्राप्त कर ली गई।
कैसे दी जा रहीं डिग्रियां
उ त्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और मेघालय के विश्वविद्यालयों के नाम से रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और गुड़गांव में फर्जी स्टडी सेंटर खोले गए हैं। यहां से एमफिल, पीएचडी, एमएससी और अन्य किसी भी तरह का सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।
किन विवि की डिग्रियां
सी एमजे यूनिवर्सिटी शिलांग, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर, द्रवaिड़ यूनिवर्सिटी श्रीनिवासवनम, आंध्रप्रदेश आदि विश्वविद्यालयों के नाम से फर्जी डिग्रियां बनाई जा रही हैं।
अंग्रेजी प्रवक्ता सस्पेंड
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने गांव बधराना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत अंग्रेजी प्रवक्ता सतेंद्र सिंह को शिक्षा विभाग से धोखाधड़ी के मामले में सस्पेंड कर दिया। यह प्रवक्ता 2003 में भी एमए की फर्जी डिग्री मामले में सस्पेंड हो चुके हैं। इसके बाद यह मामला शिक्षा निदेशालय चला गया। 29 नवंबर को ओमप्रकाश यादव की शिकायत पर जांच कर निदेशालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव केके खंडेलवाल ने सतेंद्र सिंह को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए।