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‘ऊपर’ से आया फोन तो दोषी डॉक्टरों को बचाने में जुटी छापामार टीम, विरोध कर अमले से हटीं डॉ. शालिन

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को मतलौडा में अमर अस्पताल पर छापेमारी कर लिंग जांच करते दो डॉक्टरों को पकड़ लिया।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 14, 2017, 06:05 AM IST

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    मतलौडा.स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को मतलौडा में अमर अस्पताल पर छापेमारी कर लिंग जांच करते दो डॉक्टरों को पकड़ लिया। मगर “ऊपर’ से आए एक फोन कॉल ने पूरी कार्रवाई का एंगल ही बदल दिया। इसके बाद छापामार टीम दोषी डॉक्टरों को बचाने में जुट गई, लेकिन टीम में शामिल डॉक्टर डॉ. शालिनी मेहता ने विरोध कर दिया। उन्होंने बयान रिपोर्ट से अपने साइन काटकर टीम से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि गलत काम में मैं भागीदार नहीं बनूंगी। कार्रवाई पूरी करने के लिए मौके पर मतलौडा पीएचसी के इंचार्ज डॉ. जितेंद्र राठी को बुला डॉ. शालिनी की जगह बयान रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कराए। तीन साल में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब 30 छापेमारी की हैं।

    यह पहली बार हुआ है कि कार्रवाई के बाद एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अल्ट्रासाउंड की दो मशीनें सील कर कार्रवाई पूरी की। स्वास्थ्य विभाग की टीम के प्रभारी व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुधीर बत्तरा ने कहा कि अस्पताल की डॉक्टर सुमन गहलावत के पास अल्ट्रासाउंड करने का लाइसेंस नहीं है।

    सिविल सर्जन को लिंग जांच की मिल रही थी शिकायत

    सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा को अमर अस्पताल में लिंग जांच होने व डॉक्टरों के पास अल्ट्रासाउंड करने का लाइसेंस ना होने की शिकायत मिल रही थी। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुधीर बत्तरा के नेतृत्व में टीम का गठन किया था, जिसमें डॉक्टर डॉ.शालिनी मेहता भी थी। इसके लिए डयूटी मजिस्ट्रेट के रूप में मतलौडा के नायब तहसीलदार जयसिंह को नियुक्त किया गया। मतलौडा पुलिस को भी सूचना दी गई। छापेमारी की फर्जी ग्राहक अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अस्पताल पहुंची। अस्पताल के मालिक डॉ. वीरेंद्र गहलावत ने महिला को अल्ट्रासाउंड के लिए अंदर भेज दिया। अंदर डॉ. सुमन गहलावत व डॉ. नरेंद्र गर्ग ने महिला का अल्ट्रासाउंड किया। तभी रेड कर उन्हें पकड़ लिया। उन्हें डॉक्यूमेंट चेक किए गए। इस दौरान डॉ. सुमन गहलावत के पास अल्ट्रासाउंड करने का लाइसेंस नहीं मिला।

    सियासी दबाव... डिप्टी सीएस के पास आया था फोन

    डॉ. सुमन व डॉ. नरेंद्र गर्ग ने फर्जी ग्राहक का अल्ट्रासाउंड किया था। दोनों को टीम ने पकड़ लिया। टीम ने इनके बयान दर्ज कर कार्रवाई रिपोर्ट तैयार की थी। तभी डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुधीर बतरा के पास किसी का फोन आया। फिर उन्होंने टीम से चर्चा की। आरोपी डॉक्टरों के साथियों ने टीम के कागजात फाड़ने का प्रयास किया। सियासी दबाव बढ़ने पर टीम के मुखिया आरोपी डॉक्टरों को बचाने का प्रयास कर रहे थे, तभी डॉ. शालिनी मेहता ने इसका विरोध कर दिया। उन्होंने डॉ. सुधीर बतरा से कार्रवाई की मांग की और कागजों से अपने साइन काट दिए। तब डॉ. राठी से साइन कराए गए।

    आज लेंगे फैसला, अब क्या करना है

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 3 साल में 30 छापेमारी की है। हर मामले में विभाग की टीम ने आरोपी डॉक्टर के अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन सील कर मुकदमा दर्ज कराया है, मगर यह ऐसा पहला मामला है जब दबाव में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई। गुरुवार को सिविल सर्जन मीटिंग कर अस्पताल पर कार्रवाई के लिए चर्चा करेंगे।

    नहीं किया अल्ट्रासाउंड

    मैं अल्ट्रासाउंड नहीं कर रही थी। मैं बस डॉक्टर नरेंद्र की मदद कर रही थी। उनके अस्पताल में लिंग जांच व भ्रूण हत्या जैसी कोई काम नहीं होते हैं।
    -डॉ. सुमन गहलावत, डॉक्टर अमर अस्पताल

    हम पर कोई दबाव नहीं

    डॉ. सुमन के पास अल्ट्रासाउंड करने का लाइसेंस नहीं था। डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज करानी है या नहीं यह एप्रोपिएट अथाॅरिटी की मर्जी है। कोई सियासी दबाव नहीं है।
    -डॉ. सुधीर बतरा, डिप्टी सिविल सर्जन

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