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मजदूर के बेटे को IAS अफसर बनने में लगे 15 साल, रह चुके हैं यूनिवर्सिटी टॉपर

मनीराम शर्मा का आईएएस बनने का सपना वर्ष 1995 में शुरू हुआ, जिसे पूरा करने में 15 वर्ष का समय लग गया।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 07:31 AM IST

पलवल. पिता मजदूर, मां नेत्रहीन और स्वयं सौ प्रतिशत बहरेपन का शिकार जिला अलवर (राजस्थान) के बंदीगढ़ गांव के रहने वाले मनीराम शर्मा ने आईएएस में आने के लिए जो संघर्ष किया है उसकी मिसाल दी जा सकती है। मनीराम शर्मा का आईएएस बनने का सपना वर्ष 1995 में शुरू हुआ, जिसे पूरा करने में 15 वर्ष का समय लग गया।


- उन्होंने 2005, 2006 और 2009 में आईएएस की परीक्षा पास की। 2006 में उन्हें बताया गया कि सौ प्रतिशत बहरा (बधिर) होने के कारण उनका सलेक्शन नहीं हो सकता।

- 2009 में मनीराम शर्मा ने एक बार फिर से हौसला जुटाया और आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। कान के ऑपरेशन के लिए आठ लाख रुपए की जरूरत थी।

- यह रकम किन लोगों ने इकट्ठी की और शर्मा का ऑपरेशन कराया, यह उन्हें भी नहीं मालूम। आखिरकार मनीराम शर्मा 2009 में आईएएस अधिकारी बन गए।

- मनीराम शर्मा हरियाणा में सर्व प्रथम नूंंह जिले में उपायुक्त लगे और फिलहाल अब वे पलवल जिले के उपायुक्त है।


गांव में नहीं था स्कूल
जिला अलवर (राजस्थान) के गांव बंदीगढ़ में स्कूल नहीं था। मनीराम शर्मा पास के गांव में पांच किलोमीटर दूर पढ़ने जाते थे। लगन ऐसी थी कि दसवीं की परीक्षा में राज्य शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में पांचवां और बारहवीं की परीक्षा में सातवां स्थान हासिल किया।


मनीराम शर्मा के जीवन की खट्टी-मीठी यादें
पिता से कहा था बड़ा पास हुआ हूं, बड़ा अफसर ही बनूंगा। दसवीं क्लास में शर्मा प्रदेश मेरिट में पांचवें स्थान पर आएं। वह बताते हैं मुझे तो कुछ सुनाई नहीं देता था। दोस्त खेड़ली जाकर रिजल्ट देखकर आए, मेरे घर की तरफ हाथ हिलाकर दौड़ते आए। पिता को लगा मैं फेल हो गया, वे किसी परिचित विकास अधिकारी के पास ले गए और बोले, बेटा दसवीं में पास हुआ है चपरासी लगा दो। बीडीओ ने कहा ये तो सुन ही नहीं सकता। इसे न घंटी सुनाई देगी न ही किसी की आवाज। ये कैसे चपरासी बन सकता है। पिता की आंखों में आंसू छलक आए। खुद को घोर अपमानित महसूस किया।

मेरिट में आने से हौसला बढ़ चुका था। लौटते समय रास्ते में पिता का हाथ पकड़कर रोका और बोले मुझ पर भरोसा रखो, बड़ा पास हुआ हूं तो एक दिन बड़ा अफसर ही बनूंगा। मुझे भी कुछ समझ में नहीं आया। काफी देर बाद पता चला मैं तो मेरिट में आया हूं। पिता मेरिट के मायने समझते नहीं थे, केवल इतना समझे की मैं बड़ा वाला पास हो गया। पिता को लगा अब मैं कम से कम किसी सरकारी संस्थान में चपरासी तो बन ही जाऊंगा।

यूनिवर्सिटी में रहे टॉपर
- कॉलेज में प्रवेश के दूसरे वर्ष में ही मनीराम शर्मा ने राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा उत्तीर्ण कर क्लर्क के तौर पर नियुक्ति पाई।

- यूनिवर्सिटी में टॉप किया और नेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर लेक्चरार की नियुक्ति पाई। संघर्ष बढ़ता रहा शर्मा परीक्षाएं उत्तीर्ण कर आगे बढ़ते रहे। अंतत: उन्होंने आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की और मुकाम हासिल किया।