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जन्म से पैर नहीं, 4 साल पहले 7 माह बिस्तर पर रहेे, अब बन चुके शूटिंग के चैम्पियन

शूटिंग जैकेट न होने पर प्रतियोगिता से बाहर हुए, व्हीलचेयर के कारण बस से उतार दिया

Bhaskar News | Last Modified - Feb 13, 2018, 08:06 AM IST

जन्म से पैर नहीं, 4 साल पहले 7 माह बिस्तर पर रहेे, अब बन चुके शूटिंग के चैम्पियन

पानीपत.ये कहानी है 26 साल के इशांक की। इनकी जन्म से ही दोनों पैर नहीं हैं। भले ही वह आम आदमी की तरह चल-फिर नहीं पाते हैं, पर उनके जैसा कारनामा कर पाना आम आदमी के लिए आसान नहीं है। पानीपत के खैल बाजार में रहने वाले इशांक ने दिव्यांगता के विरुद्ध शारीरिक और मानसिक लड़ाई खुद लड़ी। दोस्त से लेकर रिश्तेदार तक के तानों ने अंदर से मजबूत बनाया। चार साल पहले वे इतना बीमार हुए कि 7 माह बिस्तर पर रहना पड़ा। इसी दौरान इशांक ने दिव्यांगों के संघर्ष की कहानियां सर्च कीं। पता चला कि वह खेल ही है, जिससे दिव्यांगता को मात दी जा सकती है। 2014 से खेलना शुरू किया।

- नियमित अभ्यास और कठिन परिश्रम की बदौलत कई खेलों को साध लिया।

- 10 मीटर राइफल शूटिंग में अब तक राष्ट्रीय स्तर के 4 मेडल जीत चुके हैं। हरियाणा व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम को भी लीड कर रहे हैं। रग्बी भी खेलते हैं।

5 गेम्स में पहचान बनाना चाहते हैं इशांक

- इशांक पांच अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी बनना चाहते हैं। फिलहाल व्हीलचेयर शूटिंग, रग्बी और बॉस्केटबॉल वे खेल ही रहे हैंं।

- चौथे गेम के रूप में तैराकी सीख सीख रहे हैंं। इशखे लिए वे रोजाना कुछ समय तैराकी पर देते हैं।

- पांचवें गेम का चुनाव बाद वे तैराकी में महारथ हासिल करने के बाद करेंगे।

- इशांक का लक्ष्य पैरालिंपिक में मेडल जीतना है। इससे पहले वे सुरेंद्र मलिक शूटिंग मेमोरियल चैंपियनशिप की कड़ी तैयारी में जुटे हुए हैं।

- यहां बेहतर प्रदर्शन करने पर ही आघे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए उनका चयन मुमकिन हो पाएगा।

शूटिंग जैकेट न होने पर प्रतियोगिता से बाहर हुए, व्हीलचेयर के कारण बस से उतार दिया

- इशांक हर शनिवार को अकेले बस से दिल्ली जाते हैं। वहां मेट्रो में सफर कर कैलाश कॉलोनी में रग्बी की प्रैक्टिस करते हैं। 20 जनवरी 2018 को हरियाणा रोडवेज के कंडक्टर ने महज इसलिए बस से उतार दिया, क्योंकि उनके पास व्हीलचेयर थी।

- 2016 में शूटिंग जैकेट न होने पर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया। बास्केटबॉल टीम का कैप्टन होने के बावजूद इशांक के पास ओरिजनल व्हीलचेयर नहीं है।

- उन्होंने दिसंबर 2014 में दिल्ली में बास्केटबॉल वर्कशाॅप में भाग लिया। आज हरियाणा व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम के कप्तान हैं।

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