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भ्रष्टाचार के मामलों में 19 अधिकारी दोषी, कार्रवाई की जगह दिए बड़े पद

हरियाणा की खट्‌टर सरकार अपने ही अफसरों और कर्मचारियों पर सही कार्रवाई नहीं कर पा रही है।

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 07:28 AM IST
Khattar govt not able to take proper action on its own officers

रेवाड़ी. भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली हरियाणा की खट्‌टर सरकार अपने ही अफसरों और कर्मचारियों पर सही कार्रवाई नहीं कर पा रही है। पिछले दो साल के अंतराल में रेवाड़ी में ही अलग-अलग 1140 करोड़ के विकास कार्यों से जुड़े छह बड़े मामलों की जांच में 19 अधिकारी दोषी पाए गए। इसमें 12 को चार्जशीट भी किया गया। आगे की कार्रवाई फाइलों में उलझी है। जांच के नाम का हवाला देकर सभी अधिकारियों को मलाईदार पदों पर तैनाती दी गई है। अब इस पूरे मामले को सीएम से लेकर पीएम तक के पास भेजा गया है।


यहां सबसे दिलचस्प मामला 22 दिसंबर को कष्ट निवारण समिति की बैठक में पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर सिंह की तरफ से रजिस्ट्री के नाम पर घूस लेने के आरोप में तहसीलदार को सस्पेंड करना रहा। 14 दिन बाद भी तहसीलदार के सस्पेंड का पत्र नहीं आया है और वे रूटीन की तरह अपनी सीट पर काम कर रहे हैं। ऐसे हालात कई जिलों में ऐसी ही स्थिति है। ग्रीवांस की बैठकों में मंत्री अफसरों कर्मचारियों के निलंबन का आदेश देते हैं, पर अधिकारी उसे जांच और कागजी कार्रवाई में उलझाकर मामला चलता कर देते हैं।

नप में 20 करोड़ का गबन साबित

26 मार्च 2015 को नगर परिषद रेवाड़ी में विकास के नाम पर करोड़ों रुपए घोटाले की शिकायत पर सीटीएम भारत भूषण गोगिया ने 8 मई 2015 को जांच पूरी की। लगभग 20 करोड़ गबन साबित हुआ। 12 अक्टूबर 2015 को एसडीएम कैप्टन मनोज कुमार ने जांच की। इसमें गबन सही पाया गया। इसमें दो कार्यकारी अधिकारी, एक सचिव एवं एक लेखा अधिकारी दोषी मिले। 24 अक्टूबर 2016 को नियम 7 के तहत निदेशक शहरी स्थानीय निकाय ने उन्हें चार्जशीट किया। वर्तमान में सभी मलाईदार पदों पर है। इसी में 7 सितंबर 2015 को सीएम ने विजिलेंस जांच के आदेश जारी किए थे। स्पेशल ऑडिट की जांच भी अलग से चल रही है लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हुई है।

ई टेंडरिंग के 324 विकास कार्यों में गोलमाल

17 अगस्त 2017 को रेवाड़ी में ई टेंडरिंग के 324 विकास कार्यों में 19 करोड़ के गबन की शिकायत पर 6 नवंबर को एडीसी कैप्टन मनोज ने जांच की। जांच में गड़बड़ी होना सही पाया गया लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि काम पहले शुरू किया गया और वर्क ऑर्डर बाद में जारी किए। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर 17 नंवबर को डीसी ने एक करोड़ 90 लाख रुपए ठेकेदारों के काटकर बाकि भुगतान के आदेश जारी कर दिए। इसमें दोषी 6 अधिकारियों के खिलाफ कुछ नहीं हुआ।

85 लाख का गोलमाल आठ अधिकारी को दी चार्जशीट

24 मार्च 2015 जनस्वास्थ्य विभाग कोसली में बिना काम के 85 लाख रुपए का भुगतान की शिकायत हुईं। इस पर विभाग की विजिलेंस टीम के इंचार्ज पंकज ने विभाग के 8 अधिकारियों को दोषी मानकर चार्जशीट कर दिया। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। सभी अधिकारी वर्तमान में मलाईदार पदों पर कार्यरत है।

गुड़गांव के अफसर की जांच में दोषी पर कार्रवाई नहीं हुई

22 सितंबर 2015 को सेक्टर 6-7 में निजी बिल्डर को हुडा द्वारा अधिग्रहित जमीन पर लाइसेंस देने की शिकायत हुईं। इस पर भूमि अर्जन अधिकारी गुड़गांव ने 22 मार्च 2016 को जांच की। इसमें महानिदेशक नगर एवं ग्राम योजनाकार हरियाणा दोषी पाए गए। उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुईं।

वक्फ बोर्ड जमीन घोटाला, सीएम तक पहुंचा मामला

31 मार्च 2015 को हरियाणा सरकार की जमीन वक्फ बोर्ड के नाम किए जाने की शिकायत सही पाई गईं। 27 अप्रैल 2015 को सीटीएम एवं डीआरओ ने माना कि रिकार्ड से छेड़छाड़ की गई। इसके बाद उसे पट्टे पर कुछ प्रॉपर्टी डीलरों को दे दी गईं। अमूमन यही स्थिति हर जिले में हैं। मामला अभी विचाराधीन है।

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