पानीपत

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कहीं फायर फाइटिंग सिस्टम फेल, तो कहीं कम्युनिकेशन सिस्टम में आई दिक्कत

भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा वास्तव में आने से पहले मॉक ड्रिल में गुरुवार को कई खामियां सामने आईं।

Danik Bhaskar

Dec 22, 2017, 06:53 AM IST

चंडीगढ़/ पानीपत। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा वास्तव में आने से पहले मॉक ड्रिल में गुरुवार को कई खामियां सामने आईं। कहीं फायर फाइटिंग सिस्टम ने काम नहीं किया तो कहीं एंबुलेंस अटक गई। कहीं कम्युनिकेशन सिस्टम की वजह से भी दिक्कतें आईं। वह भी तब जबकि इस मॉक ड्रिल के लिए कई दिन से तैयारियां चल रही थीं। हालांकि सरकार ने इन कमी-खामियों से सीख लेते हुए आगे के लिए सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने और जिलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाने का भरोसा दिलाया है। सरकार का कहना है कि भूकंप जैसी आपदाओं से निबटने के लिए तैयारियों को जांचने के उद्देश्य से हरियाणा ने पहली बार सभी 22 जिलों में एक साथ इतनी बड़ी मेगा मॉक ड्रिल की है। करीब 122 स्थानों पर की गई इस ड्रिल में 136 टीमें और 1500 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।


राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि इस रिहर्सल में गुड़गांव से 25 किलोमीटर दूर पश्चिम की ओर जयपुर डिप्रेशन और सोहना फाल्ट लाइन पर भूकंप का केंद्र मानकर यह ड्रिल की गई। इसमें भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.8 और जमीन में 10 किलोमीटर गहराई पर केंद्र मानते हुए पूरे प्रदेशभर में इसका असर माना गया। इस ड्रिल में रिस्पांस टाइम के आधार पर यह करीब 1717 व्यक्तियों के घायल होने और 257 लोगों की मृत्यु होने का अनुमान लगाया गया। उन्होंने कहा कि हरियाणा सिविल सेक्रेटेरिएट को सूचना मिलने के बाद केवल 11 मिनट में खाली करवा लिया गया। जबकि इसमें रिस्पांस टाइम 20 मिनट होना चाहिए। इसी तरह सेक्टर 17 स्थित नव सचिवालय और अन्य जिलों में भी रिस्पांस टाइम बेहतर रहा।

यह मिली सीख
वित्तमंत्री ने बताया कि एक्सरसाइज के बाद जिला उपायुक्तों से डी ब्रीफिंग में कुछ नई चीजें सीखने को मिली हैं। जैसे कि वायरलैस कम्युनिकेशन के साथ वैकल्पिक व्यवस्था, अलग से एच एफ फ्रीक्वेंसी के साथ कम्युनिकेशन, सैटेलाइट फोनों का इस्तेमाल, ड्रोन और हवाई सर्वे के माध्यम से स्थिति का आकलन, कहीं-कहीं खोजी कुत्ते तैनात करने एवं अस्पतालों में शवों की पहचान के लिए अतिरिक्त मोर्चरी की व्यवस्था करना आदि। इसमें सरकारी संसाधनों के अलावा प्राइवेट संसाधनों का भी उपयोग किया गया। इन सभी चीजों को डिजास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा।

सभी जिलों से मांगी रिपोर्ट
सभी जिलों में सैटेलाइट फोन जल्दी ही उपलब्ध कराए जाएंगे। जिला उपायुक्तों को इस एक्सरसाइज पर 10 दिन तक फालोअप करने के निर्देश दिए हैं। सभी से रिपोर्ट भी भेजने को कहा है।

कै. अभिमन्यु के स्वागत में एसीएस को लगी चोट राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा गुरुवार को विभागीय मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का स्वागत करने के चक्कर में पैर में चोट लगा बैठीं। दरअसल हुआ यह कि मॉक ड्रिल की ब्रीफिंग के लिए विभागीय मंत्री सेक्टर -17 स्थित नए सचिवालय पहुंचे थे। जैसे ही अतिरिक्त मुख्य सचिव उनके स्वागत के लिए कार्यालय के बाहर सीढ़ियां उतरने लगीं तो उन्हें ध्यान ही नहीं रहा और एक साथ दो सीढ़ियां लांघ गईं। इससे उनके पैर में चोट आई। बाद में उन्हें व्हील चेयर पर ले जाया गया।

पानीपत

19 घायलों के लिए मिले चार ही स्ट्रेचर

पानीपत में पांच जगहों पर मॉक ड्रिल की गई। सिविल अस्पताल में मरीजों के लिए सिर्फ 4 ही स्ट्रैचर थे, जबकि घायलों की संख्या 19 थी। मॉक ड्रिल का समय पूरा होने से पहले ही ड्रिल में शामिल मरीज बेड से उठते रहे। जबकि स्टाफ नर्स व डॉक्टर घायलों को रोकने का प्रयास करते रहे। इस पूरी ड्रिल के दौरान घायल मजाक के मूड में रहे। वहीं, डॉक्टर व स्टाफ नर्स भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

जींद

मृतकों की शिनाख्त काे नहीं मिली मशीन

जींंद में 5 जगह हुई मॉकड्रिल में विभागों के बीच आपसी तालमेल ही नहीं दिखा। ऐसे में आधे-अधूरे संसाधनों के बीच प्रशासन ने महज खानापूर्ति कर मॉकड्रिल करा दी। भूकंप आपदा से पांच लोगों की मौत, 12 घायल की सूचना के बाद 27 मिनट देरी से एंबुलेंस पहुंची। अस्पताल में मृतकों की शिनाख्त के लिए बायोमैट्रिक मशीन की सुविधा नहीं मिली।

सिरसा

सिरसा में भी 5 जगह हुई मॉक ड्रिल में अव्यवस्था और कमियां मिलीं। स्कूल की दूसरी मंजिल पर 26 बच्चों के घायल होने की सूचना थी। इस दौरान बचाव टीमों ने स्कूल से घायल बच्चों को निकाल एंबुलेंस तक पहुंचाया, लेकिन दोनों एंबुलेंस में सिर्फ 14 बच्चे ही आ पाए। उसके बाद बचाव टीमें बच्चों को कंधों पर लेकर दोनों एंबुलेंस के आसपास दौड़ती रहीं।

कैथल

शौचालय में डिलीवरी, नहीं पहुंचा डॉक्टर

कैथल में मॉक ड्रिल के दौरान डाक्टर के न मिलने से एक महिला ने शौचालय में बच्चे को जन्म दिया। ओपीडी में डाॅक्टर नहीं मिले और मरीजों को एंबुलेंस के लिए भी घंटों का इंतजार करना पड़ा। मॉक ड्रिल के दौरान कर्मचारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिस कारण पूरा अभ्यास मजाक सा लग रहा था। शहर में मॉक ड्रिल के लिए पांच पॉइंट बनाए गए थे।

घरौंडा

रेलवे फाटक बंद, 35 मिनट फंसी एंबुलेंस

करनाल में 6 जगहों पर हुई मॉक ड्रिल में पुलिस के पास वायरलेस और वाकीटॉकी की कमी नजर आई। वहीं, घरौंडा के इंडेन बॉटलिंग प्लांट में मॉक ड्रिल शुरू हुई। इस दौरान कोहंड ट्रेन क्रॉसिंग के कारण फाटक खुल नहीं पाया। सूचना के बाद पुलिस और एंबुलेंस घटनास्थल पर 35 मिनट देरी से पहुंची। ऐसे में आपातकालीन सेवाओं के रिस्पोंस टाइम में देरी हुई है।

फतेहाबाद में एंबुलेंस ही नहीं हुई स्टार्ट, ट्राॅमा सेंटर में न डॉक्टर मिले और न ही बेड पूरे थे

फतेहाबाद में 5 जगहों पर हुई मॉक ड्रील में कई खामियां नजर आईं। एक जगह सूचना मिलने पर पहुंची एंबुलेंस स्टार्ट ही नहीं हुई। कर्मी धक्का लगाते नजर आए। ताऊ देवी लाल मार्केट में घटनाक्रम के 13 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची। डीएसपी जगदीश काजला 8 मिनट देरी से पहुंचे। तब तक घायलों को घटनास्थल पर ही रखा गया। ट्रामा सेंटर तो बनाया, लेकिन मरीजों के लिए न बेड थे और डॉक्टर थे। कई जगह एंबुलैंस स्टार्ट ही नहीं हुई तो कर्मी धक्का लगाते नजर आए।

करनाल में दम ताेड़ गए सुरक्षा में लगे वाहन

करनाल में मॉकड्रिल होने के बाद सभी कर्मियों और अफसरों को सेक्टर-12 में बुलाया गया। बैठक के बाद जब सभी जाने लगे तो मॉकड्रिल में शामिल किया गया एक वाहन स्टार्ट नहीं हुआ। एेसे में होमगार्ड के जवानों को पुलिस के वाहन को धक्का लगाना पड़ा। ऐसे हालात देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरक्षा अमले में शािमल कई वाहन दम तोड़ चुके हैं।

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