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गेस्ट टीचर्स को एडहॉक पर रखने का नोटिफिकेशन खारिज हाईकोर्ट ने कहा; पद बचें तो ही रखे जाएं लो मेरिट और गेस्ट

इसके बाद बचे पदों पर लो मेरिट जेबीटी को रखा जाए और यदि पद बच जाएं तो ही गेस्ट शिक्षकों को एडहॉक आधार पर रखा जाए।

Dainik Bhaskar

Dec 23, 2017, 07:34 AM IST
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चंडीगढ़. हरियाणा सरकार की 7 दिसंबर की नोटिफिकेशन को खारिज करते हुए लो मेरिट और गेस्ट शिक्षकों को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि सबसे पहले 2011 और 2013 के जेबीटी वेटिंग सूची वालों की संयुक्त मेरिट सूची बनाई जाए और इनसे पदों को भरा जाए। इसके बाद बचे पदों पर लो मेरिट जेबीटी को रखा जाए और यदि पद बच जाएं तो ही गेस्ट शिक्षकों को एडहॉक आधार पर रखा जाए।


हाईकोर्ट ने कहा कि यह फैसला इस मामले में दाखिल अपील के फैसले पर निर्भर रहेगा। वर्ष 2011-2013 की जेबीटी भर्ती की वेटिंग सूची में मौजूद आवेदकों ने प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई 7 दिसंबर की नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। प्रदेश सरकार ने इसके माध्यम से लो मेरिट और गेस्ट शिक्षकों को एडहॉक आधार पर नियुक्ति देने का फैसला लिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा कि वे वेटिंग सूची में मौजूद हैं और यदि पद मौजूद हैं तो पहले नियुक्ति के लिए उनके नाम पर विचार होना चाहिए। याची ने कहा कि वे मेरिट में हाई हैं और ऐसे में लो मेरिट वाले को हाई मेरिट पर वरीयता देकर नियुक्त करना सीधे तौर पर उनके अधिकारों का हनन है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद हरियाणा सरकार की सात दिसंबर की नोटिफिकेशन को खारिज करते हुए हरियाणा सरकार को आदेश दिए हैं कि वे 2011-2013 जेबीटी वेटिंग की संयुक्त मेरिट लिस्ट जारी करें। इस मेरिट सूची से नियुक्ति के बाद जो पद बचें उन्हें लो मेरिट जेबीटी को ऑफर किया जाए और इसके बाद भी यदि कोई पद बचे तो ही गेस्ट शिक्षकों को ऑफर किया जाए।

हरियाणा में आईएएस अफसरों के प्रमोशन को हाईकोर्ट में चुनौती

हरियाणा के अफसरों को आईएएस बनाने की प्रक्रिया पर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) द्वारा लगाई गई रोक को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई है। याचिका पर जस्टिस अजय कुमार मित्तल व जस्टिस अमित रावल की खंडपीठ ने मामले से जुड़ा पुरा रिकार्ड तलब करते हुए सभी पक्षों पूछा कि क्यों न कैट के फैसले पर रोक लगा दी जाए। साथ ही कहा कि इस मामले में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा लिया गया फैसला इस मामले में याचिका के अंतिम फैसले पर निर्भर रहेगा। कैट के फैसले के खिलाफ स्वास्थ्य महानिदेशक (दंत चिकित्सा) डॉ. प्रवीण सेठी ने याचिका दायर कर कैट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। कैट ने सरकार से पूछा है कि किस पॉलिसी के तहत इन अफसरों को प्रमोशन दी जा रही है। 9 जनवरी तक सरकार को जवाब दाखिल करना होगा तब तक इन आईएएस चयन पर रोक रखने का कैट ने आदेश जारी रखा है। पहले जिन अफसरों के नाम पैनल में थे उनकी एसीआर पूरी नहीं थी। इस कारण यूपीएससी ने पैनल को वापस भेज दिया था। सरकार ने दोबारा पैनल तैयार किया। इसमें शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा की बेटी आशा शर्मा, विधानसभा की डिप्टी स्पीकर संतोष यादव के भाई लाजपत राय, गवर्नर हाउस में तैनात डॉ. राकेश तलवार, स्वास्थ्य महानिदेशक (दंत चिकित्सा) डॉ. प्रवीण सेठी और जिला टाउन प्लानर (डीटीपी) बिजेंद्र राणा के नाम शामिल है। कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक सुरेंद्र सिंह दहिया ने खुद को टॉप पर बताते हुए इस पैनल को कैट में चुनौती दे दी।

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