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पंचायतों के प्रस्ताव पर आबकारी का नियम फेर रहा पानी, गांव में 2 साल में एक भी अवैध शराब का मामला मिला तो नहीं बंद होगा ठेका

Bhaskar news | Last Modified - Dec 30, 2017, 07:01 AM IST

सरकार ने पंचायत को यह अधिकार दे दिया है कि अगर वह चाहें तो शराबबंदी कर सकती हैं।
पंचायतों के प्रस्ताव पर आबकारी का नियम फेर रहा पानी, गांव में 2 साल में एक भी अवैध शराब का मामला मिला तो नहीं बंद होगा ठेका

पानीपत/रोहतक.‘हरियाणा सरकार शराबबंदी को लेकर फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। सरकार ने पंचायत को यह अधिकार दे दिया है कि अगर वह चाहें तो शराबबंदी कर सकती हैं। पंचायतें अगर 31 दिसंबर तक सरकार को लिखित रूप में दें कि उनके पंचायत में शराबबंदी हो तो सरकार वहां शराब की दुकान के लिए टेंडर नहीं करेगी।’

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यह बयान 3 दिसंबर को बिहार के प्रवासी दिवस में शराबबंदी को लेकर दिया था। मगर बड़ी बात यह है कि प्रदेश की पंचायतें चाहकर भी शराब ठेके बंद नहीं करवा पा रही हैं। ग्राम पंचायतों की ओर से प्रस्ताव देने के बाद भी अफसरशाही इन पर मुहर नहीं लगाती। कारण, नियमों में बने लूप होल की अड़चन हैं।
आबकारी नियम यह है कि यदि किसी गांव में एक बार भी अवैध शराब का मामला पकड़ा गया तो वहां शराब ठेका बंद करने की अनुमति नहीं मिलेगी। चाहे भले ही वह कोई शराबी ही बोतल लेकर पकड़ा जाए। वहीं, जिस पंचायत का ठेका बंद होगा वह भी सिर्फ एक साल के लिए। ऐसे में अपने गांवों में हर साल सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करने के बाद भी सरपंच खुद को ठगा सा महसूस करते हैं। चुनाव के समय भी पढ़े-लिखे सरपंचों ने ग्रामीणों से शराबबंदी का वादा किया, लेकिन अधिकारियों की ओर से बनाए बेतुके नियम सरपंचों के अरमानों पर पानी फेर देते हैं। जिला रोहतक सरपंच एसोसिएशन के प्रधान राकेश किलोईया कहते हैं कि गांवों में शराब ठेका बंद करवाने के लिए काफी सरपंचों की ओर से सहमति बनी है। अधिकतर सरपंच चाहते हैं कि उनके गांवों में शराब ठेका ना खुलने दिया जाए, इसके लिए हर साल प्रस्ताव भी दिए जाते हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी नियमों का हवाला देकर प्रस्ताव का मंजूरी नहीं देते।

एक बार ठेका बंद करने का प्रस्ताव सिर्फ एक वर्ष के लिए
पंचायत की ओर से सर्वसम्मति से प्रस्ताव दिया जाता है कि वे अपने गांव में आगामी सत्र में शराब ठेका नहीं खुलने देना चाहते हैं। इसमें दो तरह से शराब ठेके की मनाही होती है। पहली आबादी देह से बाहर कर दिया और दूसरा गांव में बिल्कुल ही नहीं खुलने दिया जाए। विभाग में ये प्रस्ताव आने के बाद अंतिम फैसले के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय भेजे जाते हैं। वहां पर ईटीसी की ओर से इन मामलों पर पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को बुलाकर सुनवाई की जाती है। साथ ही देखा जाता है कि संबंधित गांव में प्रस्ताव की तारीख से लेकर पिछले दो साल के दौरान अवैध बिक्री का कोई भी केस ना दर्ज किया गया हो। यदि किसी गांव में शराब ठेका बंद करवाया जाना है तो इसके लिए हर वर्ष प्रस्ताव दिए जाते हैं। यानी एक बार का प्रस्ताव सिर्फ एक साल के लिए ही मान्य होता है।

पिछले साल 13 पंचायतों ने भेजा प्रस्ताव सिर्फ 4 पास
बीते वर्ष 2016-17 में शराब ठेका बंद करने के लिए 13 ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव पास करके भेजा था, लेकिन इसमें से सराय अहमद नसीरपुर, सुडाना, बैंसी, पटवापुर, गिरावड़, टिटौली, समचाना, काहनी, नौनंद ग्राम पंचायत के प्रस्ताव को यह कहकर रद्द कर दिया गया कि उनके गांव में अवैध शराब बिकती है, लिहाजा ठेका खोला जाएगा। आबकारी विभाग ने मकड़ौली खुर्द, कटवाड़ा, रिठाल फौगाट व मुंगाण ग्राम पंचायत का प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया है।

35 पंचायतों ने भेजे प्रस्ताव, 19 रिजेक्ट
पिछले साल यहां 35 गांवों की पंचायतों ने शराबबंदी के लिए प्रस्ताव बनाकर आबकारी विभाग को भेजा था। उनमें से 16 प्रस्ताव ही स्वीकृत हुए। 19 प्रस्ताव रिजेक्ट कर दिए गए। इसका कारण इन गांवों में शराब की अवैध तरीके से बक्री होना कारण बताया गया। इस साल 27 पंचायतो ने शराबबंदी का प्रस्ताव पारित करके आबकारी विभाग को भेजा है।

वर्ष 2018-19 के लिए आए 25 प्रस्ताव, पिछली बार 22 हुए थे कैंसिल

जिले में 25 गांव के ग्रामीण व पंचायतों ने इस वर्ष आबकारी विभाग के पास अपने अपने गांव में शराब बंद करवाने का प्रस्ताव भेजे हैं। पिछले वर्ष जिले की 40 पंचायतों ने आबकारी विभाग में उनके गांवों में ठेके बंद करने का प्रस्ताव दिया था। जिनमें से 18 गांवों में सरकार ने शराब ठेके बंद कर दिए थे और 22 गांवों के प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके पीछे सरकार व विभाग ने तर्क दिया था कि इन गांवों में अवैध शराब की बिक्री हो रही है। ग्रामीण खुद शराब बिक्री कर रहे है तो ऐसे में विभाग अपने शराब ठेके को कैसे बंद कर सकती है।

इस बार आए सिर्फ 2 प्रस्ताव
सिरसा जिले में सिर्फ दो गांवों बूढ़ीमेड़ी और बेहरवालाखुर्द में पिछले एक साल से शराबबंदी लागू है। इस सिर्फ दो प्रस्ताव ही आए हैं जो उक्त दोनों गांवों से हैं। पिछले साल कुल 63 गांवों की पंचायतों ने शराबबंदी का प्रस्ताव पारित कर आबकारी विभाग के पास भेजा था। उनमें से 16 प्रस्ताव मंजूर हुए जबकि 47 प्रस्ताव रिजेक्ट हुए। रिजेक्ट इसलिए किए क्योंकि उन गांवों में अवैध शराब बेचने का धंधा बदस्तूर चलता रहा है और उस पर अंकुश लगाने के लिए ही प्रस्ताव रिजेक्ट कर वहां पर शराब के ठेके खोलने की मंजूरी दी गई ताकि अवैध शराब की सेल न हो।

पिछले साल आए 4 प्रस्ताव, सभी रिजेक्ट कर दिए गए
अम्बाला में पांच गांवों ने एक्साइज ऑफिस में एप्लीकेशन देकर गांव में शराबबंदी करने की मांग की है। इनमें से एक गांव भानोखेड़ी में तो पिछले साल से ही शराब का ठेका नहीं खोला गया, जबकि नारायणगढ़ के नन्हेड़ा, कलेरां, बरनाला और राजोमाजरा की पंचायत ने भी गांव में शराबबंदी को लेकर प्रस्ताव दिया है। पिछले साल 4 पंचायतों ने शराबबंदी को लेकर प्रस्ताव भेजा था। चारों रिजेक्ट हो गए थे, क्योंकि क्राइम रिपोर्ट उनके खिलाफ चली गई थी। उनके गांवों में अवैध शराब के केस बने हुए थे।

30 पंचायतों ने भेज प्रस्ताव, सभी खारिज, इस बार सिर्फ 3 आए
फतेहाबाद जिले में वर्ष 2017-18 में जिले की 30 पंचायतों ने आबकारी विभाग के पास ठेके न खोलने प्रस्ताव के प्रस्ताव भेजे हैं। लेकिन विभाग की पॉलिसी के अनुसार इन गांवों में पिछले 2 सालों में शराब बिक्री के कई मामले सामने आने के बाद पंचायतों के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। वर्ष 2018-19 के लिए आबकारी विभाग ने पंचायतों से ठेके न खोलने के िलए प्रस्ताव मांगे हैं। लेकिन अभी तक 3 पंचायतों ने ही जिला मुख्यालय पर आवेदन किया है। इनमें गांव खुंबर, मेहूवाला, हैदरवाला व जांडवाला सोत्तर गांव शामिल हैं।

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Web Title: pnchaayton ke prstaav par aabkari ka niyam fer raha paani, gaaanv mein 2 saal mein ek bhi avaidh shraab ka maamlaa milaa to nahi band hoga theka
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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