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विटामिन की कमी पूरा करेंगे लाल, पीला, सफेद पालक, इन रोगों को रोकने में है कारगर

किसानों को अच्छा मुनाफा देती है, बल्कि मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर में विटामिनों की कमी को पूरा करते है।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 04:50 AM IST

घरौंडा. आपने अभी तक केवल हरे पालक की सब्जी ही खाई होगी, लेकिन अब आप लाल, पीले व सफेद रंग के पालक यानी स्वीश चार्ड (रसपालक) का भी स्वाद ले सकते है। स्वीश चार्ड में न सिर्फ किसानों को अच्छा मुनाफा देती है, बल्कि मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर में विटामिनों की कमी को पूरा करते है। किसानों को स्वीश चार्ड की खेती के प्रति जागरूक करने के लिए इंडो-इजराइल सब्जी उत्कृष्टता केंद्र (सीईवी) में डेमोस्ट्रेशन लगाया गया। जहां विशेषज्ञों की देखरेख में विभिन्न रंगों के पालक की खेती की जा रही है।


सीईवी के विशेषज्ञों की माने तो मात्र साढ़े तीन माह की खेती में किसान लाखों की आमदन कर सकता है। स्वीश चार्ड को लगाने का उपयुक्त समय अक्तूबर व नवम्बर माह में होता है। इसकी खेती के लिए किसान को सर्वप्रथम खेत में मिट्टी के बैड तैयार करने होते हंै। एक एकड़ में लगभग ढाई किलोग्राम तक बीज लगाया जाता है। प्लांट से प्लांट की दूरी 4 सेमी. और लाइन से लाइन की दूरी 40 सेंमी हो। जनवरी माह तक चार बार हार्वेस्ट किया जा सकता है। सब्जी उत्कृष्टता केंद्र के विशेषज्ञ कृष्ण कुमार बताते है कि सीईवी में सब्जियों के डेमोस्ट्रेशन लगाए जाते है। इसी कड़ी में स्वीश चार्ड का डेमो लगाया गया है। जिसमें लाल, पीले व सफेद पालक के साथ, हरे पालक को भी लगाया गया है।

स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

स्वीश चार्ड में प्रचुर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होते है। जो शरीर के फ्री रेडिकल्स को बाहर निकालने में सहायता करते है। विशेषज्ञों के अनुसार स्वीश चार्ड का सेवन करने से हृदय ठीक रहता है। जिससे हाई कॉलेस्ट्रोल, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। इसके एंटी-ऑक्सीडेंट केंसर से लड़ने की क्षमता भी प्रदान करते है। साथ ही, डाइबिटीज को रोकने में मदद मिलती है, बोन हेल्थ मेनटेन रहती है और मस्तिष्क व आंखों के लिए फायदेमंद होती है।

डेमो के बाद ही किसानों को करेंगे प्रेरित

सीईवी स्पेशलिस्ट कृष्ण कुमार का कहना है कि अभी रसपालक का डेमोस्ट्रेशन लगाया गया है और स्वीश चार्ड को हार्वेस्ट करने के बाद सीइवी के ऑउटलेट सेंटर पर ग्राहकों को बेचा जा रहा है और इसका सेवन करने वाले लोगों से फीडबैक भी ली जा रही है। लास्ट क्रोप हार्वेस्ट होने के बाद आंकलन किया जाएगा। जिसके बाद ही किसानों को अपने खेत में फसल लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।